मानसिक मरीजों को बांधने पर भी पाबंदी, संस्थानों को सुरक्षित माहौल और जरूरी सुविधाएं देनी होंगी; इलाज, निजता और गरिमा की सुरक्षा पर जोर
Yuva Haryana: हरियाणा में मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं देने वाले संस्थानों के लिए नए नियम अधिसूचित किए गए हैं। इनका उद्देश्य मानसिक रोगियों की गरिमा, सुरक्षा, निजता और बेहतर इलाज सुनिश्चित करना है। नए प्रावधानों के तहत मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों को फर्श पर सुलाने, उनकी शारीरिक स्वतंत्रता पर अनावश्यक रोक लगाने और उन्हें बांधकर रखने जैसी प्रथाओं पर पाबंदी लगाई गई है। संस्थानों को मरीजों के लिए उचित बिस्तर, सुरक्षित वातावरण और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध करानी होंगी।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, इन नियमों का मकसद मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक मानवीय, सुरक्षित और जवाबदेह बनाना है। संस्थानों को मरीजों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करना होगा और उनकी देखभाल में निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करना होगा।
मरीजों को फर्श पर सुलाने और बांधने पर रोक
नए नियमों के अनुसार, मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों को फर्श पर सुलाने की अनुमति नहीं होगी। संस्थानों को प्रत्येक मरीज के लिए उचित बिस्तर और आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था करनी होगी। इसी तरह, किसी मरीज को शारीरिक रूप से रोकने या बांधने के मामले में भी सख्त प्रावधान किए गए हैं।
मरीज की सुरक्षा के नाम पर उसकी शारीरिक स्वतंत्रता पर मनमाने ढंग से रोक नहीं लगाई जा सकेगी। किसी भी आपात स्थिति में निर्धारित नियमों और सुरक्षा मानकों का पालन करना जरूरी होगा। इसका उद्देश्य मरीजों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार और उनकी गरिमा को नुकसान पहुंचाने वाली घटनाओं को रोकना है।
नियमों के तहत संस्थानों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि मरीजों को पर्याप्त जगह, स्वच्छ वातावरण और जरूरत के अनुसार उपचार उपलब्ध हो।
छह श्रेणियों में बांटे गए मानसिक स्वास्थ्य संस्थान
अधिसूचना में मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों को उनकी प्रकृति और उपलब्ध सेवाओं के आधार पर छह श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है। इनमें मानसिक अस्पताल, मेडिकल कॉलेजों से जुड़े मानसिक स्वास्थ्य विभाग, सामान्य और गैर-मनोरोग अस्पतालों में संचालित मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं, आवासीय पुनर्वास केंद्र और अन्य संबंधित संस्थान शामिल हैं।
इस वर्गीकरण का उद्देश्य अलग-अलग प्रकार के संस्थानों के लिए स्पष्ट मानक तय करना है, ताकि मरीजों को मिलने वाली सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके। प्रत्येक श्रेणी के संस्थान को अपनी क्षमता, उपलब्ध सुविधाओं और सेवाओं के अनुरूप निर्धारित नियमों का पालन करना होगा।
नियमों के अनुसार, संबंधित संस्थानों को मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था, मरीजों की देखभाल और सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों पर विशेष ध्यान देना होगा।
मरीजों को बिस्तर और जरूरी सुविधाएं देना अनिवार्य
मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों में भर्ती मरीजों को उचित बिस्तर, साफ-सफाई, सुरक्षित पेयजल, पर्याप्त हवा और रोशनी जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना जरूरी होगा। संस्थानों को मरीजों की शारीरिक और मानसिक जरूरतों के अनुरूप देखभाल की व्यवस्था भी करनी होगी।
इसके अलावा, मरीजों की निजता और व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा को भी महत्वपूर्ण माना गया है। इलाज के दौरान मरीजों की जानकारी का इस्तेमाल निर्धारित नियमों के अनुसार ही किया जा सकेगा। संस्थानों को ऐसा माहौल तैयार करना होगा, जहां मरीज बिना डर और भेदभाव के उपचार प्राप्त कर सकें।
इलाज और मरीजों की गरिमा पर विशेष जोर
नए नियमों में मानसिक रोगियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार को प्राथमिकता दी गई है। मरीजों की शारीरिक स्वतंत्रता, निजता और व्यक्तिगत गरिमा की रक्षा करना संस्थानों की जिम्मेदारी होगी। मरीजों को उपचार से संबंधित जरूरी जानकारी देना और उनकी स्थिति के अनुसार देखभाल उपलब्ध कराना भी व्यवस्था का हिस्सा होगा।
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों और संबंधित कर्मचारियों को निर्धारित मानकों के अनुसार काम करना होगा। संस्थानों में शिकायतों और सुरक्षा से जुड़े मामलों पर ध्यान देना भी जरूरी होगा, ताकि मरीजों को किसी तरह की परेशानी होने पर उचित सहायता मिल सके।
नशा मुक्ति केंद्रों की निगरानी भी होगी जरूरी
नियमों के तहत नशा मुक्ति केंद्रों में भर्ती मरीजों की सुरक्षा और इलाज की व्यवस्था पर भी ध्यान दिया गया है। ऐसे केंद्रों में मरीजों को उपचार के दौरान आवश्यक सुविधाएं देना और उनके साथ उचित व्यवहार सुनिश्चित करना जरूरी होगा।
नशा मुक्ति केंद्रों को मरीजों की देखभाल, उपचार और सुरक्षा से संबंधित निर्धारित मानकों का पालन करना होगा। इसका उद्देश्य नशे की समस्या से जूझ रहे लोगों को सुरक्षित और व्यवस्थित उपचार उपलब्ध कराना है।
नियमों का पालन करना होगा अनिवार्य
हरियाणा में नए नियम लागू होने के बाद मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं देने वाले संस्थानों को निर्धारित मानकों के अनुसार अपनी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करनी होंगी। इससे मरीजों की देखभाल में पारदर्शिता बढ़ाने और उनकी सुरक्षा से जुड़े जोखिमों को कम करने में मदद मिल सकती है।
मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में मरीजों की गरिमा और अधिकारों की रक्षा महत्वपूर्ण है। नए नियमों का प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि संस्थान इन्हें कितनी गंभीरता से लागू करते हैं और संबंधित विभाग इनके पालन की निगरानी किस तरह करता है।

