Yuva Haryana: हरियाणा में Assistant District Attorney (ADA) के 255 पदों पर होने वाले इंटरव्यू से पहले सरकारी वकीलों के पदनाम को लेकर नया विवाद सामने आया है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने सरकारी वकीलों के पदनाम में इस्तेमाल हो रहे ‘Attorney’ यानी ‘न्यायवादी’ शब्द पर सवाल उठाते हुए हरियाणा सरकार के कई बड़े अधिकारियों को नोटिस भेजा है।
उन्होंने सरकार से पूछा है कि District Attorney (DA), Deputy District Attorney (DDA) और Assistant District Attorney (ADA) जैसे पदनामों का मौजूदा कानून में क्या आधार है।
255 ADA पदों पर होने हैं इंटरव्यू
हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) की ओर से ADA के 255 पदों पर भर्ती प्रक्रिया चल रही है। इन पदों के लिए इंटरव्यू 10 से 18 अक्टूबर 2026 तक होने हैं।
इसी बीच सरकारी वकीलों के पदनाम में ‘Attorney’ शब्द के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठने से यह मामला चर्चा में आ गया है।
1976 में कानून से हटाया गया था ‘Attorney’ शब्द
एडवोकेट हेमंत कुमार का कहना है कि करीब 50 साल पहले, 1976 में संसद ने Advocates Act, 1961 में बदलाव किया था। इस बदलाव के बाद कानून में ‘Vakil or Attorney’ की जगह ‘Advocate’ शब्द का इस्तेमाल किया गया।
उनका तर्क है कि जब कानून में ‘Attorney’ शब्द को इस तरह हटाया गया, तो सरकारी वकीलों के पदनाम में आज भी District Attorney, Deputy District Attorney और Assistant District Attorney जैसे नाम क्यों इस्तेमाल किए जा रहे हैं, इसकी स्थिति सरकार को स्पष्ट करनी चाहिए।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह फिलहाल एडवोकेट की ओर से उठाया गया कानूनी सवाल है। इसे अदालत या किसी सक्षम प्राधिकारी का अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता।
अदालतों में Government Pleader और Public Prosecutor
हेमंत कुमार ने अपने नोटिस में कहा है कि सरकारी वकील अदालतों में अलग-अलग मामलों के लिए Government Pleader (GP) और Public Prosecutor (PP) के रूप में काम करते हैं।
सिविल मामलों में Code of Civil Procedure (CPC), 1908 में Government Pleader का उल्लेख है। वहीं आपराधिक मामलों में Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita (BNSS), 2023 में Public Prosecutor और Assistant Public Prosecutor जैसे पदों का प्रावधान है।
इस आधार पर नोटिस में सरकारी वकीलों के मौजूदा पदनामों की कानूनी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की गई है।
‘Attorney General’ अलग संवैधानिक पद
नोटिस में संविधान के अनुच्छेद 76 का भी उल्लेख किया गया है। इसमें भारत के Attorney General यानी महान्यायवादी के पद का प्रावधान है।
हेमंत कुमार का कहना है कि Attorney General एक संवैधानिक पद है, जबकि District Attorney या Assistant District Attorney जैसे पदों के लिए राज्य के सेवा नियमों में स्पष्ट कानूनी आधार होना चाहिए।
पदनाम बदलने की मांग
एडवोकेट हेमंत कुमार ने हरियाणा सरकार से सरकारी वकीलों के सेवा नियमों की समीक्षा करने की मांग की है। उन्होंने सुझाव दिया है कि जरूरत होने पर Government Advocate, Government Pleader, Public Prosecutor या Law Officer जैसे पदनाम इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
उन्होंने इस संबंध में हरियाणा के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, गृह सचिव, एडवोकेट जनरल, विधि-परामर्शी और निदेशक अभियोजन समेत संबंधित अधिकारियों को नोटिस भेजा है।
पंजाब और चंडीगढ़ में भी यही पदनाम
हेमंत कुमार ने नोटिस में यह भी कहा है कि पंजाब और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ में भी सरकारी वकीलों के लिए District Attorney, Deputy District Attorney और Assistant District Attorney जैसे पदनाम इस्तेमाल किए जाते हैं। इसलिए वहां के संबंधित अधिकारियों को भी नोटिस भेजकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की गई है।
फिलहाल यह मामला नोटिस और कानूनी सवाल उठाए जाने तक सीमित है। अब देखना होगा कि हरियाणा सरकार इस मुद्दे पर क्या जवाब देती है और क्या सरकारी वकीलों के इन पदनामों में कोई बदलाव किया जाता है।

