Yuva Haryana : हमारे देश के हरियाणा, पंजाब सहित अनेक राज्य धीरे-धीरे कर्ज के बोझ तले दबते ही जा रही है। इसे मुद्दे पर जहां राज्य सरकारें खामोश रहती है तो वहीं विपक्ष द्वारा यह मुद्दा जरूर उठाया जाता है।
राज्य सरकारें कर्ज पर कर्ज लेती जा रही है। बदतर आर्थिक हालतों को देखते हुए यह सवाल उठना लाजमी है कि आखिर यह पैसा जा कहां रहा है ? चलिए इस बारे में आपको बताते हैं।
एक समाचार पत्र में प्रकाशित जानकारी के अनुसार सत्ता पाने के लिए होने वाली मुफ्त की घोषणाओं को पूरा करने के लिए सारा पैसा खर्च हो जाता है। ऐसे में विकास के लिए राज्यों के पास पैसा नहीं बच रहा है।
राज्य सरकारों के पास बिजली, पानी, सड़क और आवास के लिए पैसा ही नहीं है। सरकार का अधिकतम खर्च सब्सिडी, वेतन, पेंशन और ब्याज के भुगतान में ही खर्च हो जाता है। कमाई के पैसे का कुछ ही हिस्सा सरकार बचा पाती है।
पंजाब के हालात बयां करते हुए रिपोर्ट में बताया गया है कि फिलहाल पंजाब के पास केवल सात प्रतिशत ही राशि बची है और इस बीच इस साल का 90 हजार करोड़ रुपए का मूलधन भी पंजाब को चुकाना है। पंजाब को इसके लिए भारी कर्ज की जरूरत पड़ेगी। पंजाब बाजार से इस साल अक्टूबर में 20 हजार करोड़ रुपए का कर्ज ले चुका है।
राजस्थान को इस बार 1.50 लाख करोड़ कर्ज का मूलधन चुकाना है। बाजार से राजस्थान 32 हजार करोड़ रुपए का कर्ज उठा चुका है।
थोडे समय पहले चुनाव हुए राज्य बिहार के हालात बेहद खराब नजर आ रहे है। एक अनुमान के मुताबिक चुनावी वादे पूरे करने पर आने वाला बोझ राज्य के पूंजीगत व्यय का 25 गुना हो सकता है।
हरियाणा की बात करें तो यहां 56 प्रतिशत सरकार की कमाई वेतन, पेंशन और ब्याज पर खर्च हो जाती है। हरियाणा की अनुमानित कमाई 1.33 लाख करोड़ है, इसमें सब्सिडी और मुफ्त ब्याज पर 21 प्रतिशत, वेतन, पेंशन और ब्याज पर 56 प्रतिशत और कर्ज के मूलधन पर 53 प्रतिशत पैसा खर्च हो जाता है। इन खऱ्चों के बाद अन्य विकास कार्यों पर खर्च करने के लिए कर्ज की तरफ प्रदेश को जाना पड़ता है।
ऐसे में अनेक राज्यों की कमाई का बड़ा हिस्सा केवल वेतन, पेंशन और अन्य जरूरी खर्च में चला जाता है। विकास के लिए केवल छोटा बजट ही राज्यों के पास बचता है।



