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Reading: हरियाणा में CM नायब सैनी के खिलाफ कांग्रेस लाई अविश्वास प्रस्ताव, 5 घंटे तक चली चर्चा में क्या खास रहा? जानें
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हरियाणा में CM नायब सैनी के खिलाफ कांग्रेस लाई अविश्वास प्रस्ताव, 5 घंटे तक चली चर्चा में क्या खास रहा? जानें

Yuva Haryana
Last updated: December 20, 2025 1:03 pm
Yuva Haryana
Published: December 20, 2025
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Yuva Haryana : हरियाणा में वीरवार को विधानसभा का शीतकालीन सत्र शुरू हुआ था। शुक्रवार को सत्र का दूसरा दिन था, जो कि सुबह 10.30 बजे से रात 10.20 बजे तक चला। इस दौरान सदन में खूब हंगामा भी देखने को मिला।

शुक्रवार को कांग्रेस ने हरियाणा  की बीजेपी सरकार के खिलाफ जनादेश की चोरी और चुनावी प्रक्रिया में धांधली जैसे अनेक गंभीर आरोप लगाते अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। सीएम नायब सैनी सरकार के खिलाफ आए इस पहले अविश्वास प्रस्ताव पर सदन में करीब पांच घंटे चर्चा हुई। इस दौरान सीएम ने दो घंटे तक भाषण दिया।

अविश्वास प्रस्ताव पर स्पीकर द्वारा कांग्रेस को 82 मिनट, सत्ता पक्ष को 60 मिनट और इनेलो के दो विधायकों को 15 मिनट बोलने का समय दिया गया।

हालांकि, कांग्रेस द्वारा लाया गया यह अविश्वास प्रस्ताव गिर गया। प्रस्ताव पर मतदान से पहले ही कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया, जिसके चलते सरकार को बहुमत साबित करने की नौबत ही नहीं आई।

अविश्वास प्रस्ताव गिरते ही हरियाणा विधानसभा स्पीकर ने 22 दिसंबर सुबह 11 बजे तक के लिए सदन की कार्यवाही को स्थगित कर दिया।

आपको बता दें कि कांग्रेस के पास फिलहाल कुल 37 विधायक है, लेकिन 32 कांग्रेसी विधायकों ने ही सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया था।

सदन में कांग्रेस के विधायक रघुबीर कादियान ने इस प्रस्ताव पर चर्चा की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि वर्तमान भाजपा सरकार की खराब नीतियों के कारण जनता का विश्वास सरकार से उठ गया है। उन्होंने आरोप लगाए कि हरियाणा में हिंसा, आगजनी और किसान की दुर्गति हो रही है। कादियान ने कानून व्यवस्था, खेल व्यवस्था, रोजगार आदि के विषय भी उठाए और सरकार को विफल बताया।

पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि भाजपा सरकार ने लोकतंत्र को तंत्रलोक में बदल दिया है। उन्होंने कहा कि मशीन और मशीनरी के दुरुपयोग से बनी यह सरकार संवेदनहीन और संवादहीन है।


इसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के अनेक विधायकों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने एक लंबा भाषण देते हुए विपक्ष के आरोपों का सिलसिलेवार जवाब दिया। सीएम ने कांग्रेस के अविश्वास प्रस्ताव को जल्दबाजी में लाया गया विपक्ष की हताशा का दस्तावेज बताया। उन्होंने कहा कि जनता के विश्वास पर बीजेपी सरकार खरी उतरी है और 13 महीनों में 54 संकल्प पूरे किए।

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सीएम ने कटाक्ष करते हुए कहा कि इस अविश्वास पत्र में महंगाई शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है। इससे स्पष्ट होता है कि विपक्ष भी मानता है कि पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में महंगाई कम हुई है।

उन्होंने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव में सरकार पर लगाया गया पहला आरोप है कि “सरकार ने लोकतंत्र को तंत्र-लोक में बदल दिया है।” उन्हें शायद यह नहीं मालूम कि भारतीय संस्कृति में तंत्रलोक कोई अपशब्द नहीं है। वरन यह कश्मीर शैव दर्शन के एक महान ग्रंथ का नाम है, जिसे आचार्य अभिनव गुप्त जी ने 10वीं शताब्दी में रचा था। वे भारत के एक महान दार्शनिक, आचार्य और साधक थे।

मुख्यमंत्री ने सवालिया लहजे में कहा कि क्या कांग्रेस के विधायक शब्दों का अर्थ और संदर्भ भी भूल गए हैं। उन्होंने शायराना अंदाज में कहा कि शब्द जब अर्थ खो देते हैं,तो संवाद शोर बन जाता है।

कानून व्यवस्था पर उठ रहे सवाल के जवाब पर सीएम ने कहा कि पिछले 11 वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में सभी बड़े अपराधों में भारी कमी आई है। हत्या के मामलों में 12.75 प्रतिशत, डकैती में 49.41 प्रतिशत, दंगों में 20.78 प्रतिशत और लूट के मामलों में 10.52 प्रतिशत की कमी आई। जबकि, कांग्रेस के 10 सालों के कार्यकाल में इन सभी मामलों में बड़ी भारी बढ़ोतरी हुई थी। वर्ष 2004 से 2014 तक प्रदेश में हत्या के मामलों में 50.88 प्रतिशत, डकैती में 230.76 प्रतिशत, दंगों में 178 प्रतिशत और लूट के मामलों में 258.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस ने प्रदेश में बेरोजगारी बढ़ने की बात कही, लेकिन हैरानी है कि उन्होंने इसका कोई आंकड़ा नहीं बताया। यहां तक की इस बार सी.एम.आई.ई. नामक संस्था की किसी रिपोर्ट का भी जिक्र नहीं किया। हालांकि, पिछले सप्ताह जारी की गई भारतीय रिजर्व बैंक की हैंड बुक ऑफ स्टेटिस्टिक्स ऑन इंडियन स्टेटस स्पष्ट बताती है कि हरियाणा के ग्रामीण क्षेत्र की बेरोजगारी दर अब केवल 3.1 प्रतिशत है।

उन्होंने कहा कि लगभग 2 लाख युवाओं को बिना पर्ची बिना खर्ची केवल मेरिट के आधार पर पक्की सरकारी नौकरियां दी गई हैं और निजी क्षेत्र में भी रोजगार के भरपूर अवसर युवाओं को दिलवाए गए हैं। जबकि कांग्रेस के 10 साल के शासनकाल में केवल 86 हजार सरकारी नौकरियां दी गई।

सीएम ने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव में हरियाणा कौशल रोजगार निगम को भी निशाना बनाया गया है। बिना किसी आंकड़े अथवा उदाहरण के कहा गया कि इसके माध्यम से ठेके पर कम मजदूरी पर सरकारी काज को धकेला जा रहा है।

उन्होंने कहा कि सच्चाई तो यह है कि इस निगम का गठन करके प्रदेश के युवाओं को प्राइवेट ठेकेदारों के शोषण से मुक्त किया है। यही नहीं, इसी निगम के माध्यम से कर्मियों को 58 साल की आयु तक नौकरी करने का कानूनी अधिकार एक लाख से भी अधिक कच्चे कर्मचारियों को दिया। 1 लाख 22 हजार युवाओं को इस निगम के माध्यम से नौकरी दी है।

नायब सैनी ने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव में अशिक्षा शब्द का उपयोग भी किया गया है। यह प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर कड़ा प्रहार है। आज हरियाणा की 80 प्रतिशत से ज्यादा जनता पढ़ी-लिखी है। हर 20 किलोमीटर की दूरी पर कॉलेज खोले गए हैं। पिछले 11 वर्षों में प्रदेश में 80 नए राजकीय कॉलेज स्थापित किए गए, जिनमें से 30 कॉलेज लड़कियों के हैं। आज प्रदेश में महाविद्यालयों की कुल संख्या बढ़कर 185 हो चुकी है, जबकि वर्ष 2014 में यह संख्या मात्र 105 थी।

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इसके अलावा, पिछले 11 वर्षों के कार्यकाल में प्रदेश में 13 नए विश्वविद्यालय स्थापित किए गए हैं। आज विश्वविद्यालयों की कुल संख्या 56 हो चुकी है, जो वर्ष 2014 में 43 थी।

इसी तरह, प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 6 से बढ़कर 17 हो गई है और एम.बी.बी.एस. की सीटें 700 से बढ़कर 2,435 हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 15 नए सरकारी बहुतकनीकी संस्थान खोले हैं। वर्ष 2014 में इनकी संख्या 28 थी, जो अब बढ़कर 43 हो गई है। इन संस्थानों में प्रवेश क्षमता भी 11,985 से बढ़कर 16,434 हो गई है।

मुख्यमंत्री ने अविश्वास प्रस्ताव में असमानता शब्द लिखे होने पर विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा कि असामनता के बारे में एक भी विपक्षी सदस्य ने एक भी शब्द नहीं बोला।

उन्होंने आंकड़े प्रस्तुत करते हुए कहा कि गरीबी और असमानता शीर्षक से अक्टूबर 2025 में विश्व बैंक द्वारा जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार भारत में पिछले 11 वर्षों में गरीबी दर 16.2 प्रतिशत से कम होकर 2.3 प्रतिशत रह गई है। इस अवधि में कुल 17 करोड़ 10 लाख भारतीय गरीबी से ऊपर उठे हैं।

नायब सैनी ने कहा कि खेल और खिलाड़ियों को लेकर जो आरोप अविश्वास प्रस्ताव में लगाए गए हैं, वे बेबुनियाद और हरियाणा की गौरवशाली पहचान पर भी सवालिया निशान लगाने का कुप्रयास है, जो देश-दुनिया में “खिलाड़ियों की धरती” के रूप में स्थापित है।

उन्होंने कहा कि खेल विभाग के बजट को सरकार ने दोगुणे से भी अधिक बढ़ाया है। जहां वर्ष 2014-15 में यह 275 करोड़ रुपये था, वहीं इस वित्त वर्ष में 590 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बड़ी हैरानी की बात है कि अविश्वास प्रस्ताव में विपक्ष ने फर्जी राशन कार्ड बनाकर लाभार्थी बनाना और चुनाव के बाद कैंसल करने की बात कही है। जबकि इसी सदन में मार्च, 2025 में बजट अधिवेशन के दौरान उन्होंने स्वयं 27 मार्च को बीपीएल कार्डों के विषय पर अपनी बात रखी थी। उस समय विपक्ष ने आपत्ति की थी कि सरकार ने 50 लाख से अधिक बीपीएल राशन कार्ड बनाए हैं।

उन्होंने कहा कि विपक्ष ने असंवैधानिक तरीके व वोट चोरी से सत्ता हथियाने का आरोप भी लगाया है। लोकतंत्र में अपनी बात कहने का अधिकार सबको है। लेकिन इस अधिकार का दुरुपयोग करते हुए अनाप-शनाप आरोप लगाना गैर जिम्मेदाराना है। लेकिन कांग्रेस तो जनहित भूल ही चुकी है। पार्टी के भीतर कैसा लोकतंत्र है। यह सब लोग देख रहे है। विधानसभा चुनाव के लगभग एक साल बीत जाने के बावजूद भी ये नेता प्रतिपक्ष का चुनाव नहीं कर पाए थे। इस कारण कितने लंबे समय तक हरियाणा विधानसभा नेता प्रतिपक्ष से वंचित रही।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस के लोग तो केवल भ्रामक प्रचार करने में लगे हुए हैं। उन्होंने सवालिया अंदाज में कहा कि विपक्ष को अपने द्वारा चुनावों में की गई धांधलियां याद क्यों नहीं आ रहीं?

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सीएम ने उदाहरण देते हुए कहा कि वर्ष 2009 के विधानसभा चुनावों में सुखबीर कटारिया बोगस वोटिंग मामला खूब चर्चा में रहा। आरोप मुख्य रूप से फ़र्जी वोटर आईडी कार्ड और झूठे दस्तावेज़ों का इस्तेमाल करके मतदाता सूची में हेरफेर करने पर आधारित थे।

उन्होंने आगे कहा कि वर्ष 2009 में मतदाता जागरूक मंच नामक एक एनजीओ ने याचिका दायर की, जिसमें आरोप लगाया गया कि कटारिया जी और अन्य कई लोग गुरुग्राम चुनाव परिणामों को प्रभावित करने के लिए फ़र्जी वोटर आईडी कार्ड बनाने और इस्तेमाल करने में शामिल थे। इसी मामले में 2013 में एक जिला अदालत के निर्देश पर कटारिया के खिलाफ दो नई एफआईआर दर्ज हुई थी।

इसी प्रकार, लोकसभा चुनाव 2014 में नूंह, फिरोज़पुर झिरका और पुन्हाना में फर्जी मतदान और बूथ-कैप्चरिंग के आरोप लगे। इस क्षेत्र में मतदान 78 प्रतिशत दर्ज किया गया। विशेषकर जिला मुख्यालय नूंह में, जिसमें रैना गांव जैसे इलाके शामिल हैं। लेकिन जब लोगों से उनकी अंगुलियों पर इंक मार्क दिखाने को कहा गया, तो बहुत कम मतदाताओं की अंगुलियों पर इंक मार्क थे।

सीएम ने कहा कि वर्ष 2014 के विधानसभा चुनावों से पहले कैथल निवासी पारस मित्तल ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में केस दायर किया था कि जो लोग कैथल के निवासी नहीं हैं, उनके वोट भी बनाए जा रहे हैं।

साथ ही ऐसे कई लोग हैं, जिनकी वोट कैथल और नरवाना दोनों विधानसभा क्षेत्रों में है। इन दोनों ही विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस के नेता रणदीप सुरजेवाला चुनाव लड़ते रहे हैं। पारस मित्तल ने 6 मई, 2014 को 10 हजार फर्जी वोटरों की लिस्ट भी निर्वाचन अधिकारी को सौंपी। जांच के बाद 7 हजार 447 मतदाताओं को फर्जी मानते हुए मतदाता सूची से हटा दिया गया था।

सीएम ने कहा कि उस समय प्रदेश में किसकी सरकार थी। उन्होंने कहा कि गत विधानसभा चुनाव 2024 में नारनौंद विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के विधायक जस्सी पेटवाड़ भरी जनसभा में लोगों से दो-दो, तीन-तीन वोट डालने की अपील कर रहे थे। तब इनकी नैतिकता और चुनाव शुचिता कहां थी।

मुख्यमंत्री ने आगे सवालिया अंदाज में कहा कि अविश्वास प्रस्ताव लाने वालों से यह पूछना चाहता हूं, क्या यह अविश्वास जनता का है या इनकी अपनी खोई हुई जमीन का। क्योंकि जब जनता का विश्वास सरकार के साथ होता है, तब ऐसे प्रस्ताव केवल औपचारिकता बनकर रह जाते हैं।

उन्होंने कहा कि सच्चाई तो यह है कि वर्तमान राज्य सरकार प्रदेश की जनता के विश्वास पर खरी उतरी है और आगे भी उतरेगी। यह अविश्वास प्रस्ताव विपक्ष की हताशा का दस्तावेज मात्र है। जनता ने देखा है कि कैसे 13 महीनों में सरकार ने अपने संकल्प पत्र के 217 संकल्पों में से 54 संकल्प पूरे किए हैं और 163 पर कार्य प्रगति पर है।

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