Yuva Haryana : हरियाणा के सरकारी अस्पतालों में लगे ऑक्सीजन प्लांट शोपीस बनकर रह गए है। कोरोना काल के समय लोगों की जान बचाने के लिए करीब 10 करोड़ रुपए खर्च करके 26 ऑक्सीजन प्लांटों को स्थापित किया गया था, जो कि आज सिस्टम की लापरवाही के चलते दम तोड़ चुके है।
एक प्रमुख समाचार पत्र में प्रकाशित खबर के अनुसार हरियाणा के चार जिलों मेवात, महेंद्रगढ़, झज्जर और यमुनानगर में ही ऑक्सीजन प्लांट चालू है। इनके अलावा अन्य सभी जिलों के सरकारी अस्पतालों में मरीजों की सांसे बाजारों से मिलने वाले ऑक्सीजन सिलेंडरों पर निर्भर है।
इसके पीछे वजह बताई जा रही है कि ऑक्सीजन प्लांटों की मरम्मत, वार्षिक मरम्मत ठेका और जरूरी तकनीकी सुधार के लिए मुख्यालय से बजट स्वीकृत नहीं किया गया है। ऐसे में ये सभी प्लांट टेस्टिंग के बाद कभी चालू नहीं किए।
आज प्लांटों का हाल ये हो चुका है कि मशीनें जंग खा रही है, कई जगह बिजली व तकनीकी कनेक्शन अधूरे है।
कोरोना काल में लगाए गए अधिकांश ऑक्सीजन प्लांटों की क्षमता 500 से 1000 लीटर प्रति मिनट है। सरकार का दावा था कि प्लांट से 100 से 200 बेड पर ऑक्सीजन सप्लाई की जाएगी।
एक बड़ी बात ये भी है कि इन प्लांटों को चलाने के लिए महज 50 लाख रुपए का खर्च आना है, जबकि इनके चालू नहीं होने से अब तक 7.88 करोड़ रुपए से 75.88 लाख लीटर ऑक्सीजन बाजार से खरीदा जा चुका है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रदेश में रोजाना करीब 51 हजार रुपए की 5100 लीटर ऑक्सीजन बाजारों से खरीदी जा रही है। ऐसे में करीब लाखों मरीजों की सांसे बाजार पर निर्भर है।
ऐसे में अगर आने वाले समय में कोई स्वास्थ्य आपातकाल आता है तो हरियाणा के सरकारी अस्पतालों में ऑक्सीजन की बड़ी समस्या देखने को मिल सकती और सरकारी सिस्टम की व्यवस्था ठप होने के चलते बाजार पर निर्भर रहना पड़ेगा।
कोरोना काल के दौरान भी बड़ी संख्या में ऑक्सीजन की कमी के कारण लोगों की मौत के मामले सामने आए थे। ऑक्सीजन की कमी को दूर करने के लिए उस समय हर जिले में ऑक्सीजन प्लांट बनाकर हर रोज लगभग 8 लाख लीटर ऑक्जीन बनाने का लक्ष्य रखा था। लेकिन अब सिस्टम की लापरवाही के चलते ये बनी बनाई व्यवस्था पूरी तरह से ठप पड़ी है।
उधर, डीजी हेल्थ का कहना है कि कोरोना काल में ऑक्सीजन की मांग अधिक हो गई थी, तब इन ऑक्सीजन प्लांटों का निर्माण किया गया था। इन प्लांटों में हवा से ऑक्सीजन बनती है, जो कि ज्यादा शुद्ध नहीं होती है और महंगी भी पड़ती है। ऐसे में फिलहाल इन्हें चालू करने की कोई योजना नहीं है।



