भजनलाल की बेटी और दामाद के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी
गुरुग्राम की अदालत ने रोशनी बिश्नोई और अनूप बिश्नोई के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया, फर्जी प्लॉट बिक्री का मामला
गुरुग्राम, 31 अक्तूबर। हरियाणा के गुरुग्राम की एक अदालत ने पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल की बेटी रोशनी बिश्नोई और दामाद अनूप बिश्नोई के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। दोनों पर वर्ष 2016-17 में दो प्लॉटों की फर्जी बिक्री कर करोड़ों रुपये की अवैध कमाई करने का आरोप है।
अदालत ने गुरुग्राम पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया है कि दोनों आरोपियों को जल्द से जल्द अदालत के समक्ष पेश किया जाए। सूत्रों के अनुसार, ये प्लॉट मूल रूप से संदीप और सुनील नामक व्यक्तियों को मुख्यमंत्री कोटे से आवंटित किए गए थे, लेकिन आरोप है कि हिसार से भाजपा नेता और पूर्व सांसद कुलदीप बिश्नोई की बहन रोशनी बिश्नोई और उनके पति अनूप बिश्नोई ने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज़ों के ज़रिए इन्हें बेच दिया।
अदालत ने 15 अक्टूबर को जारी आदेश में दोनों मुख्य आरोपियों के खिलाफ वारंट के साथ-साथ पुलिस को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। यह मामला अदालत में चल रहे “स्टेट बनाम विकास बिश्नोई एवं अन्य” केस से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसमें पहले से ही कई आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी
न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी, गुरुग्राम की अदालत में हुई सुनवाई के दौरान विकास बिश्नोई, कृष्ण लाल, कीर्ता राम और सुभाष चंदर अरोड़ा को जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश किया गया। अदालत ने चारों को न्यायिक हिरासत में रखने का आदेश देते हुए उनकी अगली पेशी 17 अक्तूबर 2025 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए तय की।
इस केस में सुदेश कुमार, चमन लाल अरोड़ा और नरेंद्र शर्मा फिलहाल जमानत पर हैं। सुदेश कुमार की ओर से अधिवक्ता दया चंद गुप्ता ने नया पावर ऑफ अटॉर्नी दाखिल किया, जिसे अदालत ने रिकॉर्ड में शामिल कर लिया।
हालांकि, निर्धारित तिथि पर कोई गवाह उपस्थित नहीं हुआ, जिसके चलते अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख तय की। इस दौरान बचाव पक्ष ने दो आवेदन दाखिल किए — पहला, मुख्य आरोपियों अनूप बिश्नोई, रोशनी बिश्नोई और सुरभि बिश्नोई के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट और लुक आउट सर्कुलर जारी करने की मांग से संबंधित था, जिसमें पुलिस आयुक्त और डीजीपी हरियाणा को सख्त अनुपालन के निर्देश देने की गुजारिश की गई।
दूसरा आवेदन दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 239 सहपठित धारा 216 के तहत मुक्ति (डिस्चार्ज) या आरोपों में संशोधन के लिए दाखिल किया गया। अदालत ने दोनों आवेदनों की प्रति राज्य पक्ष को उपलब्ध कराते हुए राज्य को 11 दिसंबर 2025 तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
अब इस मामले की अगली सुनवाई 11 दिसंबर 2025 को होगी।
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First published on: November 01, 2025 12:52 AM