Yuva Haryana : भारत और अमेरिका की ट्रेड डील पर हरियाणा में भी सियासी विरोध देखने को मिल रहा है। इस डील को देश हित के खिलाफ बताते हुए कांग्रेस और इनेलो नेताओं ने भाजपा सरकार को घेरा है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि देशहित को गिरवी रख कर हुआ यह व्यापार समझौता कांग्रेस को मंजूर नहीं, क्योंकि यह किसानों की रोजी-रोटी, भारत की ऊर्जा सुरक्षा, संप्रभुता और आत्मनिर्भरता पर हमला है। सुरजेवाला ने कहा कि इस डील के बाद देश की जनता जानना चाहती है कि देश में मजबूत सरकार है या फिर मजबूर सरकार, आत्मनिर्भर भारत है या अमेरिका-निर्भर भारत ?

कांग्रेस का आरोप है कि अमेरिका-भारत व्यापार समझौते के 6 फरवरी, 2026 के फ्रेमवर्क एग्रीमेंट के पहले बिंदु में ही सहमति जताई है कि भारत बगैर किसी आयात शुल्क के अमेरिका के खाद्य और कृषि उत्पादों के लिए हमारा बाजार खोल देगा, जिससे मक्का, ज्वार, सोयाबीन, कपास आदि फसलों से जुड़े भारत के किसान कहां जाएंगे ? क्योंकि भारत में इन फसलों का भारी उत्पादन होता है।
ऐसे में कांग्रेस ने सवाल किया है कि व्यापार समझौते के पहले बिंदु में अमेरिका से आयात किए जाने वाले खाद्य व कृषि उत्पादों में एडिशनल प्रोडक्ट्स’’ (अतिरिक्त उत्पाद) लिखा है। ये अतिरिक्त उत्पाद और कौन-कौन से है? क्या मोदी सरकार बताएगी कि पिछले दरवाजे से अमेरिकी अनाज आयात करने के और क्या-क्या समझौते किए गए हैं?
वहीं इनेलो नेता अभय चौटाला ने कहा कि भारत सरकार ने अमेरिका के दबाव में आकर ट्रेड डील की है। इस ट्रेड डील का सबसे ज्यादा नुकसान देश के किसानों को होगा। इससे कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड के सेब की खेती करने वाले किसानों को भी भारी नुकसान होगा।

अभय चौटाला ने कहा कि हमारे यहां कोई भी बड़ा जमींदार नहीं है। किसानों पर औसतन 1 हेक्टेयर जमीन है। अगर कोई हजारों करोड़ की इंडस्ट्री लगाता है तो सरकार उसको 25-65 प्रतिशत तक सब्सिडी देती है। लेकिन कोई किसान 32 एकड़ से ज्यादा जमीन रखता है तो सरकार उसे सीलिंग एक्ट के अंदर ले लेती है। अमेरिका में सीलिंग एक्ट नहीं है। वहां सिर्फ 8 प्रतिशत किसान हैं उनके पास हजारों एकड़ के खेत हैं। वहां किसान की फसल खराब होती है तो सरकार अच्छा खासा मुआवजा देती है। लेकिन यहां अगर गांव की फसल खराब है तो ही किसान की फसल खराब मानी जाती है। उसकी भी सही गिरदावरी का कोई तरीका नहीं है।
अभय ने ये भी कहा कि हम कोई सामान निर्यात करते हैं तो उस पर टैरिफ है। लेकिन अमेरिका से कोई माल आएगा तो उस पर कोई टैरिफ नहीं है। इससे किसानों को सबसे ज्यादा नुकसान होगा। इसका नुकसान डेयरी वाले किसानों को भी होगा क्योंकि छोटा किसान जिसके पास ज्यादा जमीन नहीं होती वो ही पशु पालता है और जीवन चलाता है। यह ट्रेड डील तो तीन काले कानूनों से भी ज्यादा बुरी है। किसान नेताओं को इसका खुलकर विरोध करना चाहिए। वे किसान नेताओं को चिट्ठी भी लिखेंगे।



