Yuva Haryana: पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने एक तरफ जहां गुरुग्राम की परियोजना में फ्लैट खरीदारों को कब्जा मिलने के बाद भी देरी का मुआवजा मांगने का कानूनी हक दिया है, वहीं दूसरी ओर रोहतक में 11.69 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में पुलिस की ढिलाई पर फटकार लगाते हुए सीनियर IPS अधिकारी से जांच कराने के आदेश दिए हैं।
- फ्लैट पर कब्जा मिलने के बाद भी देरी का मुआवजा मांग सकेंगे खरीदार
उच्च न्यायालय ने गुरुग्राम की एक परियोजना से जुड़े 47 खरीदारों की याचिका पर सुनवाई करते हुए बिल्डरों की ‘मनमानी’ पर लगाम लगाई है।
मामला और कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां:
प्रोजेक्ट में देरी: गुरुग्राम की यह आवासीय परियोजना 2016 में पूरी होनी थी, लेकिन बिल्डर ने इसे 2019 के अंत तक लटकाए रखा। खरीदारों द्वारा ब्याज मांगने पर बिल्डर ने तर्क दिया कि कब्जा लेने और दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के बाद अब कोई दावा नहीं बनता। कोर्ट ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया।
कब्जा और ब्याज दो अलग बातें: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि फ्लैट का कब्जा पाना खरीदार का अधिकार है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि बिल्डर देरी के मुआवजे या ब्याज से बच सकता है।
दबाव में कराए गए हस्ताक्षर अमान्य: कोर्ट के अनुसार जब तक खरीदार ने स्वेच्छा से लिखित में ‘फुल एंड फाइनल सेटलमेंट’ न किया हो, तब तक बिल्डर की वैधानिक जिम्मेदारी खत्म नहीं होती।
3 साल का समय और कोविड छूट: खरीदार कब्जा मिलने के 3 साल के भीतर शिकायत दर्ज करा सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, कोविड काल (15 मार्च 2020 से 28 फरवरी 2022) को इस 3 वर्ष की समय सीमा की गणना में शामिल नहीं किया जाएगा।
- रोहतक रियल एस्टेट फ्रॉड: 11.69 करोड़ की ठगी की जांच अब सीनियर IPS के हाथ
रोहतक के सेक्टर-27ए स्थित एक हाउसिंग प्रोजेक्ट में 30 से अधिक खरीदारों के साथ करीब 11.69 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में हाईकोर्ट ने सख्त रवैया अपनाया है।
मामले के मुख्य बिंदु:
पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल: जस्टिस एनएस शेखावत की पीठ ने FIR दर्ज होने के चार महीने बाद भी ठोस कार्रवाई न होने पर चिंता जताई और आरोपियों को बचाने की आशंका जाहिर की।
सीनियर IPS को जांच: कोर्ट ने हरियाणा सरकार को निष्पक्ष जांच के लिए एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया है।
जमानत याचिकाओं की सुनवाई पर रोक: रोहतक सत्र मंडल के न्यायिक अधिकारियों द्वारा आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई पर रोक लगा दी गई है।
सिविल विवाद नहीं माना जाएगा: हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि रियल एस्टेट फ्रॉड को महज सिविल विवाद मानकर ढिलाई नहीं बरती जा सकती, क्योंकि इससे अपराधियों के हौसले बुलंद होते हैं। मामले की अगली सुनवाई के लिए 28 अक्टूबर की तारीख तय करते हुए स्टेटस रिपोर्ट तलब की गई है।

