Yuva Haryana: उत्तर भारत में शीतकाल की शुरुआत के साथ ही वायु प्रदूषण और पराली जलाने (Stubble Burning) का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। कृषि विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, इस साल हरियाणा ने पराली प्रबंधन के क्षेत्र में अभूतपूर्व सफलता हासिल की है, जबकि पड़ोसी राज्य पंजाब में अब भी मामले सामने आ रहे हैं।
हरियाणा: 850 से घटकर महज 8 रह गए मामले
हरियाणा कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 15 सितंबर से 15 अक्टूबर के बीच राज्य में पराली जलाने के केवल 8 मामले दर्ज किए गए हैं। वर्ष 2021 की इसी अवधि में यह आंकड़ा 850 था, जबकि 2022 में 168, 2023 में 542 और 2024 में 559 मामले दर्ज किए गए थे।
हरियाणा में इस वर्ष लगभग 6.21 लाख किसान 5,600 गांवों में करीब 34.1 लाख एकड़ क्षेत्र में धान की खेती कर रहे हैं। राज्य अधिकारियों ने इस भारी गिरावट का श्रेय निम्नलिखित उपायों को दिया है:
मशीनरी और तकनीक उपलब्ध कराना: किसानों को ‘क्रॉप रेजीड्यू मैनेजमेंट’ (CRM) मशीनों की आसान पहुंच प्रदान की गई।
वित्तीय प्रोत्साहन (Financial Incentive): पराली न जलाने या उसका इन-सिचू/एक्स-सिचू प्रबंधन करने पर किसानों को ₹1,200 प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।
सख्त निगरानी व ‘पराली प्रोटेक्शन फोर्स‘: जिला और ब्लॉक स्तर पर विशेष बल तैनात किए गए हैं। राज्य में 8,000 से अधिक गांव-स्तरीय नोडल अधिकारी तैनात हैं।
ड्रोन और सैटेलाइट सर्विलांस: संवेदनशील इलाकों (Hotspots) की पहचान और देर शाम पराली जलाने की कोशिशों पर नजर रखने के लिए ड्रोन तथा सैटेलाइट ट्रैकिंग का सहारा लिया जा रहा है।
जुर्माना व एफआईआर: नियम उल्लंघनकर्ताओं पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति शुल्क लगाने के साथ-साथ पुलिस कार्रवाई (FIR) और राजस्व रिकॉर्ड में ‘रेड एंट्री’ दर्ज करने का प्रावधान किया गया है।
पंजाब: 123 मामलों में दर्ज हुईं 14 FIR
दूसरी ओर, पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB) के 15 सितंबर से 12 अक्टूबर तक के आंकड़ों के अनुसार, पंजाब में पराली जलाने के कुल 123 मामले सामने आए हैं।
कार्रवाई: इनमें से नियमों के उल्लंघन पर 3 जिलों में कुल 14 एफआईआर (FIR) दर्ज की गई हैं।
प्रभावित क्षेत्र: सबसे अधिक मामले माझा क्षेत्र के अमृतसर (61), तरनतारन (40), फिरोजपुर (5) और गुरदासपुर (5) जिलों में दर्ज किए गए हैं।
पर्यावरण मुआवजा: 2026 में अब तक किसानों पर ₹2.3 लाख का पर्यावरण मुआवजा लगाया गया है, जिसमें से ₹1.15 लाख की वसूली की जा चुकी है।
ऐतिहासिक आंकड़ा: पंजाब में 15 सितंबर से 11 अक्टूबर के बीच 2024 में 533, 2025 में 116 और 2026 में 118 पराली जलाने की घटनाएं दर्ज की गई हैं।
कार्रवाई पर छिड़ी राजनीतिक बहस
पराली जलाने पर किसानों के खिलाफ दर्ज हो रही एफआईआर और कानूनी कार्रवाई को लेकर राजनीतिक सरगर्मी भी बढ़ गई है:
किसान संगठनों का विरोध: भारतीय किसान यूनियन (एकता उगराहां) के नेताओं का कहना है कि सरकार को किसानों पर एफआईआर दर्ज करने के बजाय उन्हें पराली प्रबंधन के लिए आवश्यक संसाधन और मुआवजा देना चाहिए।
विपक्षी दलों के सवाल: शिरोमणि अकाली दल (SAD) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राज्य सरकार के दोहरे रवैये पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का आरोप है कि सरकार किसानों को ₹1,500 प्रति एकड़ बोनस देने के अपने वादे से मुकर रही है और केवल दंडात्मक कार्रवाई पर जोर दे रही है।

