Yuva Haryana: मानसून की बेरुखी और अब फसल पकने के समय हो रही बेमौसम बारिश के कारण हरियाणा में चावल उत्पादन में भारी गिरावट का अनुमान जताया जा रहा है। बेमौसम बारिश की वजह से मंडियों में बिकने के इंतजार में पड़ी धान काली पड़ रही है तथा खेतों में खड़ी फसल जमीन पर बिछ गई है। उत्पादन घटने की आशंका से बाजार में बासमती और साधारण चावल, दोनों के दामों में उछाल आना शुरू हो गया है।
बासमती धान ₹1000 और साधारण चावल ₹400 तक महंगा
बाजार विशेषज्ञों और व्यापारियों के अनुसार:
बासमती धान: 0पिछले साल की तुलना में बासमती धान के दाम में 1,000 रुपये प्रति क्विंटल तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
साधारण चावल: आने वाले दिनों में साधारण चावल की कीमतें भी 400 रुपये प्रति क्विंटल तक बढ़ सकती हैं।
प्रति किलो रेट: गत वर्ष 1509 बासमती चावल का रेट 55 रुपये प्रति किलो खुला था, जो इस बार बढ़कर 76 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है और इसके और महंगे होने की उम्मीद जताई जा रही है।
23 फीसदी तक घट सकता है चावल उत्पादन
उत्पादन का अनुमान: कृषि विभाग और राइस मिलर एसोसिएशन के अनुसार, पिछले साल राज्य में 97 लाख मीट्रिक टन धान का उत्पादन हुआ था। इस बार यह 23% घटकर लगभग 73 से 75 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है।
सरकारी खरीद का लक्ष्य घटा: इस बार सरकारी खरीद का लक्ष्य 58 लाख मीट्रic टन से घटाकर 32 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है (8 लाख मीट्रिक टन की कटौती)।
कटाई की स्थिति: राज्य में अभी भी लगभग 63 प्रतिशत धान की फसल की कटाई बाकी है, जिससे किसानों की चिंता और बढ़ गई है।
प्रति एकड़ 2 क्विंटल तक उत्पादन प्रभावित
कैथल की अतिरिक्त अनाज मंडी के प्रधान रघुवीर मलिक और कृषि विशेषज्ञों के अनुसार:
बारिश में धान भीगने के बाद जब धूप में सूखती है, तो उसके दाने का वजन कम हो जाता है।
इससे प्रति एकड़ लगभग 2 से 3 क्विंटल तक झाड़ (उपज) कम हो जाती है।
चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (HAU) के सेवानिवृत्त एग्रोनॉमिस्ट डॉ. दर्शन सिंह नेहरा का कहना है कि बारिश से धान का दाना काला पड़ने के साथ-साथ टूटता भी है, जिससे चावल की गुणवत्ता खराब होती है और उत्पादन पर 5% से 7% तक सीधा असर पड़ता है।
देश में हरियाणा का योगदान
हरियाणा देश के कुल चावल उत्पादन का लगभग 5 प्रतिशत हिस्सा प्रदान करता है। केंद्रीय पुल में चावल आपूर्ति के मामले में हरियाणा देश भर में दूसरे स्थान पर है। ऐसे में हरियाणा में उत्पादन घटने का सीधा असर पूरे देश में चावल की उपलब्धता और दामों पर पड़ेगा।

