Yuva Haryana: चीन में आयोजित एशियन खेलों (Asian Games) में भारतीय महिला खिलाड़ियों ने अपने अदम्य साहस, संघर्ष और प्रतिभा के दम पर नया इतिहास रच दिया है। तीरंदाजी, बॉक्सिंग और हॉकी जैसे खेलों में बेटियों ने देश के लिए गोल्ड मेडल जीतकर तिरंगे का मान बढ़ाया है।
- खेत में बज उठी पिता के फोन की घंटी: ‘पापा, मैंने सोना जीत लिया’
जींद के पिल्लूखेड़ा गांव की कीर्ति शर्मा ने एशियन गेम्स की तीरंदाजी (रिकर्व टीम स्पर्धा) में भारत को ऐतिहासिक स्वर्ण पदक दिलाया।
भावुक पल: जिस समय कीर्ति ने फाइनल मुकाबला जीता, उनके पिता विजय शर्मा खेत में धान की कटाई कर रहे थे। फोन बजते ही बेटी की आवाज आई— “पापा, मैंने सोना जीत लिया।” यह सुनते ही पिता की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े।
60 हजार का कर्ज लेकर खरीदा था धनुष: किसान पिता विजय शर्मा ने बताया कि बेटी के सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने आढ़ती से कर्ज लेकर रु. 60,000 का धनुष खरीदा था। आज उसी बेटी ने देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।
अंकिता भक्त, कीर्ति शर्मा और कुमकुम अनिल मोहोड़ की तिकड़ी ने फाइनल में दक्षिण कोरिया को 5-3 से हराकर यह स्वर्णिम सफलता हासिल की।
- पुराने ग्लव्स से शुरू हुआ रुड़की की परवीन का सफर
रोहतक के रुड़की गांव की मुक्केबाज परवीन हुड्डा ने अपनी मेहनत और संघर्ष के दम पर एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया।
कड़ा संघर्ष: कभी दूसरे खिलाड़ियों के पुराने ग्लव्स पहनकर अभ्यास करने वाली परवीन ने अपने परिवार की आर्थिक तंगहाली को कभी अपने सपनों के आगे नहीं आने दिया।
मां का त्याग: बेटी के खेल का खर्च उठाने के लिए मां नीलम ने अपनी दो भैंसें बेचकर और दूध बेचकर उसकी जरूरतें पूरी कीं। परवीन का अगला लक्ष्य अब ओलंपिक में देश के लिए पदक जीतना है।
- 44 साल बाद महिला हॉकी में भारत की ‘गोल्डन जीत‘
भारतीय महिला हॉकी टीम ने 44 साल बाद एशियन खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास दोहराया है।
रोमांचक मुकाबला: भारत ने फाइनल मुकाबले में चीन को 1-0 से मात दी। इस ऐतिहासिक जीत में शाहबाद की नवनीत कौर, हिसार की दीपिका और सिरसा की सविता पूनिया ने अहम भूमिका निभाई।
नवनीत का शानदार प्रदर्शन: टूर्नामेंट में 10 गोल करने वाली नवनीत कौर ने चीन के पेनाल्टी कॉर्नर के दौरान निर्णायक गोल लाइन बचाव भी किया। इस जीत के साथ ही भारतीय महिला हॉकी टीम ने 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक के लिए सीधा प्रवेश हासिल कर लिया है।
- अंकुश और सुजीत का दमदार पंच और दांव
अंकुश पंघाल (बॉक्सिंग): मुक्केबाजी में अंकुश पंघाल के स्वर्ण पदक जीतते ही उनके गांव भूरिया और घर में जश्न का माहौल बन गया। अंकुश ने जाने से पहले अपने पिता से स्वर्ण पदक जीतकर लाने का वादा किया था, जिसे उन्होंने पूरा दिखाया।
सुजीत कलकल (कुश्ती): चरखी दादरी के पहलवान सुजीत कलकल ने भी देश को स्वर्ण पदक दिलाया। पिछड़ने के बाद भी हार न मानने का जज्बा दिखाते हुए सुजीत ने फाइनल में वापसी की और शानदार जीत दर्ज की।

