Yuva Haryana: रेलवे भर्ती प्रक्रिया में फर्जीवाड़े और धोखाधड़ी का बड़ा मामला सामने आया है। अंबाला छावनी रेलवे स्टेडियम में आयोजित की जा रही शारीरिक दक्षता परीक्षा (Group D Physical Efficiency Test) के दौरान रेलवे भर्ती प्रकोष्ठ (RRC) द्वारा पहली बार तैनात किए गए AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) कैमरों और बायोमीट्रिक रिकॉर्ड के मिलान से फर्जी परीक्षार्थियों की पोल खुल गई।
तीन दिनों के भीतर AI तकनीक की मदद से 9 फर्जी अभ्यर्थी (मुन्नाभाई) पकड़े गए, जो असली उम्मीदवारों की जगह परीक्षा में दौड़ लगाने पहुंचे थे। पुलिस ने दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि 5 अन्य संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। वहीं, दो आरोपी मौके से फरार होने में कामयाब रहे।
कैसे हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा?
रेलवे अधिकारियों की शिकायत और पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपियों में:
संदीप कुमार यादव: (शाहपुर गांव, फिरोजाबाद, यूपी)
गिरराज मीणा: (रूपबास गांव, अलवर, राजस्थान)
जांच में सामने आए चौंकाने वाले खुलासे:
नागपुर से रतलाम तक का नेटवर्क: 24 सितंबर को पकड़े गए गिरराज मीणा का रिकॉर्ड खंगालने पर पता चला कि वह इसी साल 5 सितंबर को नागपुर में असली अभ्यर्थी राहुल मीणा (जो उसका मौसेरा भाई है) की जगह दौड़ लगा चुका था।
दो-दो जगह फर्जीवाड़ा: संदीप कुमार यादव ने 6 सितंबर को रतलाम (मध्य प्रदेश) में अपने रिश्तेदार अभिषेक की जगह परीक्षा दी थी।
अपनी जगह दूसरे को दौड़ाया, खुद भी भागा: हिसार के जाखल रेलवे कॉलोनी निवासी सतीश ने 22 सितंबर को अपने दोस्त दीपक की जगह दौड़ लगाई। अगली तारीख को जब वह खुद अपनी परीक्षा देने पहुंचा, तो AI कैमरों ने उसका पुराना रिकॉर्ड मैच कर दिया। पोल खुलते ही सतीश और दीपक दोनों मौके से फरार हो गए।
शुक्रवार को 5 और संदिग्ध AI कैमरों की पकड़ में आए
फर्जीवाड़े का सिलसिला यहीं नहीं थमा। शुक्रवार को फिजिकल टेस्ट के दौरान AI कैमरों की निगरानी से 5 और संदिग्ध पहचान में आए, जो दूसरों के नाम पर परीक्षा देने पहुंचे थे। पुलिस ने सभी को हिरासत में ले लिया है।
कैसे काम करते हैं ये AI कैमरे?
लाइव फेस कैप्चर: सबसे पहले कैमरे अभ्यर्थी का चेहरा लाइव कैप्चर करते हैं।
डाटा एनालिसिस: सिस्टम लाइव चेहरे की तुलना आवेदन के समय जमा फोटो और पुराने रिकॉर्ड्स से करता है।
बायोमीट्रिक वेरिफिकेशन: आवश्यकता पड़ने पर फिंगरप्रिंट और बायोमीट्रिक रिकॉर्ड से पहचान सत्यापित की जाती है।
अलर्ट जनरेशन: यदि चेहरा किसी अन्य अभ्यर्थी के रिकॉर्ड में पहले से दर्ज मिलता है या कोई संदिग्ध अंतर होता है, तो सिस्टम तुरंत अधिकारियों को अलर्ट भेज देता है।
डबल वेरिफिकेशन: अलर्ट के बाद अधिकारी फोटो, आईडी और दस्तावेजों की दोबारा मैनुअल जांच करते हैं।
पुलिस कार्रवाई और उच्च स्तरीय समिति का गठन
मामले की गंभीरता को देखते हुए DRM अंबाला (विनोद भाटिया) ने तीन वरिष्ठ अधिकारियों की एक विशेष जांच समिति का गठन किया है।
“अंबाला मंडल में ग्रुप डी की शारीरिक दक्षता परीक्षा में पहली बार AI कैमरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसी तकनीक की मदद से फर्जीवाड़े के मामले पकड़े गए हैं।”- विनोद भाटिया, DRM अंबाला
सहायक कार्मिक अधिकारी सुरेश कुमार की शिकायत पर पड़ाव थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। थाना प्रभारी प्रवीण आर्य के अनुसार, फरार आरोपियों की तलाश जारी है और रतलाम व नागपुर रेलवे पुलिस को भी इस फर्जीवाड़े की जानकारी भेजी जा रही है।

