Yuva Haryana: IDFC बैंक घोटाले (आईडीएफसी घोटाला) में सीबीआई (CBI) की सप्लीमेंट्री चार्जशीट में दो वरिष्ठ आईएएस (IAS) अधिकारियों को लेकर बड़े चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। जांच रिपोर्ट के अनुसार, 2 आईएएस अधिकारियों को क्लीनचिट मिलने पर अभी भी संशय बरकरार है।
साकेत कुमार पर नियमों की अनदेखी और सबूत मिटाने का आरोप
विकास एवं पंचायत विभाग में आयुक्त रहने के दौरान वरिष्ठ आईएएस डॉ. साकेत कुमार पर नियमों को ताक पर रखकर निजी बैंकों में खाते खुलवाने के आरोप लगे हैं।
सबूत मिटाने के दावे:सीबीआई जांच के मुताबिक, डॉ. साकेत कुमार ने केवल सरकारी फंड का डायवर्जन ही नहीं कराया, बल्कि रिश्वत से जुड़े कई अहम सबूत भी मिटा दिए। जांच टीम को उनके खिलाफ चैट समेत रिश्वत के पुख्ता सबूत मिले हैं।
निजी बैंकों को तरजीह: उन्होंने वित्त विभाग के निर्देशों का उल्लंघन करते हुए बिना वेरिफिकेशन और बिना ब्याज दरों के कोटेशन मांगे ही निजी बैंकों (IDFC और एयू स्मॉल फाइनेंस) में तीन नए खाते खोलने की मंजूरी दी।
दबाव बनाने के आरोप: यह मामला आधिकारिक मार्ग के बजाय RTI विंग के सुपरिटेंडेंट के जरिए लाया गया था। आरोप है कि उन्होंने महानिदेशक डीके बेहरा पर दबाव बनाकर खाते खुलवाए और उप निदेशक मनोज कौशल को डांट लगाई।
मो. शाइन: घोटाले के मुख्य सूत्रधार
सीबीआई ने आईएएस मो. शाइन को इस घोटाले का मास्टरमाइंड/मुख्य किरदार माना है।
फर्जी प्रस्ताव पर खाता खुलवाया: एचपीजीसीएल (HPGCL) के प्रबंध निदेशक रहते हुए उन्होंने नियमों के खिलाफ काम किया। 19 फरवरी 2024 को आधिकारिक प्रस्ताव से पहले ही IDFC बैंक मैनेजर का संपर्क विवरण निदेशक वित्त को भेजकर मीटिंग के निर्देश दिए।
जल्दबाजी में मंजूरी: बैंक के एम्पैनल होने से महीनों पहले (12 जुलाई 2024 की जगह फरवरी में ही) बैंक मैनेजर के फर्जी प्रस्ताव पत्र पर 20 फरवरी 2024 को मात्र एक दिन के भीतर खाता खोलने की मंजूरी दे दी गई।
चंडीगढ़ शाखा में घपला: उन पर चंडीगढ़ शाखा में ड्राई फ्लाई एश फंड खाता खुलवाने का आरोप है। उनके निर्देश पर इंडसइंड बैंक की ₹108.46 करोड़ की एफडी (FD) समय से पहले तुड़वाकर ₹50 करोड़ IDFC बैंक में ट्रांसफर किए गए, जिससे संस्था को ₹1.66 करोड़ का ब्याज नुकसान हुआ। यह राशि 14% फर्जी ब्याज दर के ज़बानी वादे पर ट्रांसफर की गई थी।
‘सुकून ग्रुप‘ और पैसों का खेल
जांच में सामने आया है कि मास्टरमाइंड रिभव ऋषि ने इस घोटाले को अंजाम देने के लिए ‘सुकून ग्रुप’ नाम से एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया था, जिसमें इन आईएएस अधिकारियों के नंबर बतौर सदस्य जुड़े हुए थे। गबन के एक-एक पैसे का मैसेज इस ग्रुप के जरिए भेजा जाता था।
महज ₹1.27 करोड़ ही हो सके रिकवर
विकास कार्य की स्वीकृति न होने के बावजूद 3 अक्टूबर 2025 को ₹75 करोड़ निजी बैंकों में ट्रांसफर कर दिए गए। पुलिस रिपोर्ट के बजाय फंड एक्सिस बैंक में बदले गए और पेंशन ट्रस्ट से ₹25 करोड़ निकालकर शेल कंपनी के जरिए फर्जी भरपाई की गई। ऑडियो रिकॉर्डिंग, व्हाट्सएप चैट और अधिकारियों के बयानों के आधार पर तत्कालीन आयुक्त साकेत के खिलाफ पुख्ता सबूत मिले हैं, हालांकि अब तक इस पूरे मामले में केवल ₹1.27 करोड़ ही रिकवर किए जा सके हैं।

