Yuva Haryana : चौधरी बंसीलाल यूनिवर्सिटी में वित्तीय प्रबंधन को लेकर ऑडिट जांच में कई अहम सवाल सामने आए हैं। यूनिवर्सिटी ने निर्माण एजेंसी वैकपोस लिमिटेड को करीब 182.77 करोड़ रुपये का एडवांस भुगतान किया। करीब सात साल में किए गए इस एडवांस भुगतान का पूरा समायोजन भी नहीं हो पाया।
बिना मंजूरी किया गया भुगतान
ऑडिट जांच में सामने आया कि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने वर्ष 2019 से मार्च 2025 के बीच एजेंसी को विभिन्न निर्माण कार्यों के लिए बड़ी रकम एडवांस के तौर पर दी। प्रशासन ने एजेंसी को 7 जुलाई 2019 से 27 मार्च 2025 के बीच 31 किस्तों में करीब 182.77 करोड़ रुपये का भुगतान किया।
इनमें कैंपस में अकादमिक ब्लॉक, फैकल्टी ब्लॉक और प्रशासनिक भवन सहित विभिन्न निर्माण कार्य शामिल थे।
निर्माण कार्यों के लिए करोड़ों का भुगतान
प्रथम चरण के निर्माण कार्य के लिए भी यूनिवर्सिटी की ओर से कई किस्तों में भुगतान किया गया। इनमें प्रथम डिपॉजिट रिलीज के तौर पर 4 करोड़ रुपये, अकादमिक ब्लॉक के निर्माण के लिए 17.76 करोड़ रुपये और अन्य निर्माण कार्यों के लिए अलग-अलग राशि शामिल थी।
4.58 करोड़ रुपये के खर्च का नहीं मिला हिसाब
ऑडिट में एक अन्य महत्वपूर्ण आपत्ति 4.58 करोड़ रुपये के एडवांस खर्च को लेकर सामने आई है। एडवांस फंड में 4,58,49,740 रुपये का हिसाब नहीं मिल रहा है।
यह राशि विभिन्न कार्यों और खर्चों के लिए बताई गई थी। इसमें इंजीनियरिंग शाखा, बिजली लाइन बिछाने, हाई-वोल्टेज लाइटिंग, सिविल मरम्मत और लिफ्ट मरम्मत समेत अन्य कार्य शामिल हैं।
दूसरी एजेंसियों को भी नियमों के तहत बांटा गया फंड
बिजली कनेक्शन, वाटर पाइपलाइन, हाई-वोल्टेज लाइट और लिफ्ट रखरखाव जैसे कार्यों के लिए अन्य सरकारी विभागों और कंपनियों को भी एडवांस भुगतान किया गया। इन एजेंसियों को दिए गए भुगतान को मिलाकर करीब 3.46 करोड़ रुपये की राशि बताई गई है।
ऑडिट आपत्तियों को क्लियर करने की प्रक्रिया जारी
यूनिवर्सिटी की ओर से ऑडिट आपत्तियों को दूर करने की प्रक्रिया चलने की बात कही गई है। भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न आए, इसके लिए विशेष अधिकारी की नियुक्ति किए जाने का भी उल्लेख है।
यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि नियमों के अनुसार ऑडिट आपत्तियों को दूर करने और लंबित हिसाब-किताब को व्यवस्थित करने की प्रक्रिया जारी है।

