Yuva Haryana: हरियाणा में बिजली वितरण कंपनियों के निजीकरण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (HERC) के गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण के लिए निजी कंपनी को लाइसेंस देने के फैसले के विरोध में बिजली कर्मचारियों ने प्रदर्शन तेज कर दिया है। कर्मचारियों ने मंगलवार को बिजली सर्कल और उपमंडल स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया। वहीं, सरकार की ओर से बातचीत के लिए बैठक बुलाए जाने के बावजूद कर्मचारी नेताओं ने इसमें शामिल होने में असमर्थता जताई है।
बिजली कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि निजीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया, तो वे आंदोलन तेज करेंगे। संयुक्त मोर्चे और कर्मचारी संगठनों ने 21 अक्टूबर से तीन दिवसीय हड़ताल पर जाने की तैयारी भी की है। कर्मचारियों का कहना है कि बिजली वितरण व्यवस्था को निजी हाथों में सौंपने से विभाग के कर्मचारियों, किसानों और आम उपभोक्ताओं पर असर पड़ सकता है।
गुरुग्राम और नूंह में निजीकरण के फैसले का विरोध
हरियाणा विद्युत नियामक आयोग ने गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण के लिए निजी कंपनी को लाइसेंस देने की प्रक्रिया को मंजूरी दी है। इस फैसले के खिलाफ बिजली कर्मचारियों, इंजीनियरों और विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने विरोध जताया है।
कर्मचारियों का आरोप है कि बिजली वितरण जैसी महत्वपूर्ण सार्वजनिक सेवा का निजीकरण करने से सरकारी व्यवस्था कमजोर हो सकती है। उनका कहना है कि बिजली आपूर्ति की जिम्मेदारी सार्वजनिक क्षेत्र के पास रहनी चाहिए, ताकि उपभोक्ताओं को उचित दरों पर निर्बाध बिजली मिल सके।
कर्मचारी संगठनों ने सरकार से मांग की है कि निजीकरण की प्रक्रिया पर दोबारा विचार किया जाए और कर्मचारियों की चिंताओं को दूर किया जाए।
सरकार ने बातचीत के लिए बुलाई बैठक
निजीकरण के विरोध के बीच सरकार ने कर्मचारी नेताओं को बातचीत के लिए बैठक में शामिल होने का निमंत्रण दिया। हालांकि, कर्मचारी नेताओं ने समय की कमी और पहले से निर्धारित कार्यक्रमों का हवाला देते हुए बैठक में शामिल होने में असमर्थता जताई।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि निजीकरण का फैसला वापस लिए बिना आंदोलन समाप्त करना मुश्किल होगा। उनका दावा है कि बिजली वितरण व्यवस्था में बदलाव से कर्मचारियों के भविष्य, सेवा शर्तों और रोजगार की सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।
21 अक्टूबर से तीन दिवसीय हड़ताल की तैयारी
बिजली कर्मचारियों ने 21 अक्टूबर से तीन दिन की हड़ताल पर जाने की तैयारी की है। इस दौरान बिजली आपूर्ति और विभागीय कामकाज प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। हालांकि, वास्तविक प्रभाव कर्मचारियों की भागीदारी और विभाग की वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर निर्भर करेगा।
कर्मचारी संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। उन्होंने निजीकरण के फैसले को वापस लेने और सार्वजनिक बिजली व्यवस्था को मजबूत बनाने की मांग की है।
कर्मचारी संगठनों को मिला समर्थन
बिजली कर्मचारियों के आंदोलन को विभिन्न कर्मचारी संगठनों और किसान प्रतिनिधियों का समर्थन मिला है। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि बिजली वितरण व्यवस्था का निजीकरण केवल कर्मचारियों का मुद्दा नहीं है, बल्कि इससे आम उपभोक्ताओं और कृषि क्षेत्र पर भी असर पड़ सकता है।
किसान संगठनों ने भी बिजली व्यवस्था से जुड़े फैसलों में किसानों के हितों को प्राथमिकता देने की मांग की है। उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति और कृषि कार्यों के लिए उचित व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है।
बिजली आपूर्ति सुचारू रखने के लिए अधिकारियों को निर्देश
हड़ताल की आशंका को देखते हुए बिजली वितरण निगमों ने अधिकारियों को बिजली आपूर्ति सुचारू रखने के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों को बिजली आपूर्ति से जुड़े कार्यों की निगरानी करने और आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने को कहा गया है।
विभागीय अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि बिजली आपूर्ति में किसी प्रकार की बाधा आने पर उसका जल्द समाधान किया जाए। उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे बिजली संबंधी शिकायतों के लिए अपने संबंधित बिजली कार्यालय या आधिकारिक हेल्पलाइन से संपर्क करें।
सरकार के फैसले पर टिकी नजरें
हरियाणा में बिजली वितरण के निजीकरण को लेकर सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच टकराव बढ़ता दिखाई दे रहा है। एक ओर कर्मचारी निजीकरण के फैसले को वापस लेने की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विभाग बिजली आपूर्ति को सामान्य बनाए रखने की तैयारी कर रहा है।
अब देखना होगा कि सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत से कोई समाधान निकलता है या 21 अक्टूबर से प्रस्तावित हड़ताल के कारण विवाद और बढ़ता है।

