Yuva Haryana: हरियाणा के यमुनानगर स्थित दीनबंधु छोटूराम थर्मल पावर प्लांट पर्यावरण मानकों के उल्लंघन के मामले में बड़ी कार्रवाई के दायरे में आ गया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने प्लांट पर लगभग 31 करोड़ रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा (Environmental Compensation) लगाने की प्रक्रिया शुरू करते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
CPCB के अनुसार प्लांट में पार्टिकुलेट मैटर (PM) उत्सर्जन निर्धारित मानकों से अधिक पाया गया। पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत बोर्ड ने प्लांट प्रबंधन से पूछा है कि उसके खिलाफ यह जुर्माना क्यों न लगाया जाए।
उत्सर्जन मानकों के उल्लंघन का आरोप
जून 2023 में CPCB और PM उत्सर्जन निगरानी प्रणाली से प्राप्त आंकड़ों में पाया गया कि प्लांट की इकाइयों से निकलने वाला उत्सर्जन निर्धारित सीमा से अधिक था। नियमों के तहत थर्मल पावर प्लांट के लिए PM उत्सर्जन की सीमा 30 मिलीग्राम प्रति नॉर्मल क्यूबिक मीटर निर्धारित है, जबकि जांच में यह सीमा कई बार पार होती पाई गई।
प्लांट की कुल स्थापित क्षमता 300 मेगावाट बताई गई है और इसकी दो उत्पादन इकाइयां संचालित हैं।
31.64 करोड़ रुपये के मुआवजे का आकलन
CPCB ने पर्यावरणीय क्षति के आधार पर लगभग 31.64 करोड़ रुपये के पर्यावरणीय मुआवजे का आकलन किया है। बोर्ड का कहना है कि निर्धारित अवधि के दौरान उत्सर्जन मानकों के उल्लंघन के कारण यह कार्रवाई प्रस्तावित की गई है।
नोटिस में प्लांट प्रबंधन को जवाब देने और यह स्पष्ट करने का अवसर दिया गया है कि उसके खिलाफ प्रस्तावित कार्रवाई क्यों न की जाए।
ऑनलाइन निगरानी प्रणाली में भी खामियां
निरीक्षण के दौरान यह भी पाया गया कि प्लांट में स्थापित ऑनलाइन उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (OCEMS) में कई तकनीकी कमियां थीं। कुछ स्थानों पर निगरानी उपकरण सही तरीके से कार्य नहीं कर रहे थे, जबकि कुछ जगह आवश्यक उपकरण लगाए ही नहीं गए थे।
उत्सर्जन संबंधी आंकड़ों की सटीक निगरानी और रिपोर्टिंग में भी अनियमितताएं सामने आई हैं।
प्लांट प्रबंधन से मांगा गया जवाब
पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत जारी नोटिस में प्लांट प्रबंधन को निर्धारित समय के भीतर जवाब देने के निर्देश दिए गए हैं। CPCB प्लांट द्वारा दिए जाने वाले स्पष्टीकरण और अनुपालन रिपोर्ट की समीक्षा के बाद अंतिम निर्णय लेगा।
यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो पर्यावरणीय मुआवजा वसूलने सहित अन्य कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
पर्यावरणीय अनुपालन पर बढ़ी सख्ती
विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में प्रदूषण नियंत्रण मानकों को लेकर निगरानी और सख्ती बढ़ी है। ऐसे में उद्योगों और बिजली संयंत्रों के लिए पर्यावरणीय नियमों का पालन करना पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।

