Yuva Haryana: हरियाणा की राजनीतिक, शैक्षणिक और सामाजिक पृष्ठभूमि से जुड़े कई प्रमुख व्यक्तित्व दूसरे राज्यों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, कर्नाटक की राज्यपाल डॉ. सुषमा यादव और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला का नाम इस संदर्भ में चर्चा में है। इन हस्तियों के माध्यम से हरियाणा का दूसरे राज्यों के प्रशासन, शिक्षा और राजनीति से जुड़ाव भी सामने आता है।
आचार्य देवव्रत का हरियाणा के कुरुक्षेत्र स्थित गुरुकुल से गहरा संबंध रहा है। वहीं, डॉ. सुषमा यादव हरियाणा के महेंद्रगढ़ लोकसभा क्षेत्र से सांसद रह चुकी हैं। रणदीप सिंह सुरजेवाला की राजनीतिक भूमिका हरियाणा के साथ-साथ कर्नाटक में भी महत्वपूर्ण रही है।
आचार्य देवव्रत का हरियाणा के गुरुकुल से जुड़ाव
गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत शिक्षा, भारतीय संस्कृति, सामाजिक सेवा और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए जाने जाते हैं। उनका हरियाणा के कुरुक्षेत्र स्थित गुरुकुल से गहरा संबंध रहा है। उन्होंने गुरुकुल में लंबे समय तक प्राचार्य के रूप में काम किया और शिक्षा, अनुशासन तथा भारतीय संस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ाने में योगदान दिया।
आचार्य देवव्रत को वर्ष 2015 में हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। इसके बाद जुलाई 2019 में उन्हें गुजरात का राज्यपाल बनाया गया। इस तरह उनका संवैधानिक दायित्व हिमाचल प्रदेश से गुजरात तक विस्तारित हुआ।
आचार्य देवव्रत की शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी उल्लेखनीय है। उन्होंने विज्ञान में स्नातक की पढ़ाई की और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) रुड़की से पीएचडी की उपाधि हासिल की। शिक्षा और सामाजिक कार्यों से जुड़े अनुभव ने उन्हें सार्वजनिक जीवन में अलग पहचान दिलाई है।
डॉ. सुषमा यादव का राजनीतिक सफर
डॉ. सुषमा यादव हरियाणा के महेंद्रगढ़ लोकसभा क्षेत्र से वर्ष 1999 में सांसद रह चुकी हैं। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के साथ राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में भी योगदान दिया है।
डॉ. सुषमा यादव ने कर्नाटक के राज्यपाल पद की शपथ ग्रहण की। अखबार की कटिंग में बताया गया है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 12 अक्टूबर को उन्हें इस पद पर नियुक्त किया था। कर्नाटक उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।
उनकी नियुक्ति को हरियाणा से जुड़े व्यक्तित्व की दूसरे राज्य में संवैधानिक जिम्मेदारी के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, राज्यपाल के पद पर उनकी भूमिका मुख्य रूप से संवैधानिक दायित्वों और राज्य के प्रशासनिक ढांचे के अनुसार निर्धारित होती है।
रणदीप सिंह सुरजेवाला की कर्नाटक में भूमिका
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला का हरियाणा और कर्नाटक दोनों राज्यों की राजनीति से जुड़ाव रहा है। कर्नाटक में कांग्रेस संगठन को मजबूत करने और पार्टी की राजनीतिक रणनीति में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है।
सितंबर 2020 में उन्हें कर्नाटक कांग्रेस का प्रभारी महासचिव बनाया गया था। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने राज्य में पार्टी के प्रचार और संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई। कांग्रेस की जीत के बाद राज्य सरकार के गठन और केंद्रीय नेतृत्व तथा प्रदेश संगठन के बीच तालमेल बनाए रखने में भी उनकी भूमिका का उल्लेख किया गया है।
सुरजेवाला का राजनीतिक अनुभव हरियाणा की राजनीति से जुड़ा रहा है। दूसरे राज्य में संगठनात्मक जिम्मेदारी मिलने से उनकी भूमिका राष्ट्रीय स्तर पर भी सामने आई है।
हरियाणा से बाहर भी मजबूत पहचान
हरियाणा के इन व्यक्तित्वों की जिम्मेदारियां अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़ी हैं। आचार्य देवव्रत राज्यपाल के रूप में संवैधानिक दायित्व निभा रहे हैं, डॉ. सुषमा यादव का राजनीतिक और शैक्षणिक अनुभव रहा है, जबकि रणदीप सिंह सुरजेवाला कांग्रेस संगठन और चुनावी राजनीति में सक्रिय हैं।
इनके अनुभव यह दिखाते हैं कि हरियाणा से जुड़े लोग शिक्षा, प्रशासन और राजनीति जैसे क्षेत्रों में दूसरे राज्यों में भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभा रहे हैं। इससे राज्य की राजनीतिक और सामाजिक पृष्ठभूमि का व्यापक परिचय मिलता है।
हालांकि, इन पदों और जिम्मेदारियों का महत्व संबंधित संवैधानिक नियमों, संगठनात्मक भूमिका और सार्वजनिक कार्यों के आधार पर समझा जाना चाहिए।

