हरियाणा में प्रदूषण पर सख्ती: मंत्री राव नरबीर सिंह ने मांगी साप्ताहिक रिपोर्ट, GRAP लागू होने से पहले कार्रवाई के निर्देश

Yuva Haryana: दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए हरियाणा सरकार ने तैयारियां तेज करने के निर्देश दिए हैं। हरियाणा के वन, पर्यावरण एवं वन्यजीव मंत्री राव नरबीर सिंह ने हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) को निर्देश दिया है कि वह NCR में वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए किए जा रहे उपायों की साप्ताहिक रिपोर्ट प्रस्तुत करे। उन्होंने स्पष्ट किया कि ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) लागू होने से पहले ही प्रदूषण नियंत्रण के प्रयास जमीन पर दिखाई देने चाहिए।
15 अक्टूबर को गुरुग्राम के PWD रेस्ट हाउस में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान मंत्री ने अधिकारियों से प्रदूषण के स्रोतों की पहचान करने, नियमित निरीक्षण करने और नियमों का पालन सुनिश्चित कराने को कहा। बैठक में गुरुग्राम, रेवाड़ी, नूंह और महेंद्रगढ़ जिलों से संबंधित प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी मौजूद रहे।
GRAP लागू होने से पहले दिखनी चाहिए कार्रवाई
मंत्री राव नरबीर सिंह ने कहा कि प्रदूषण रोकने के लिए केवल आदेश जारी करना पर्याप्त नहीं है। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि नियंत्रण के उपाय जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू हों। उन्होंने साप्ताहिक रिपोर्ट के जरिए काम की समीक्षा करने और जरूरत पड़ने पर सुधारात्मक कदम उठाने पर जोर दिया।
GRAP दिल्ली-NCR में वायु गुणवत्ता बिगड़ने पर लागू किया जाने वाला चरणबद्ध कार्ययोजना ढांचा है। इसके तहत प्रदूषण के स्तर के अनुसार विभिन्न पाबंदियां और नियंत्रण उपाय लागू किए जाते हैं। मंत्री का जोर इस बात पर था कि प्रदूषण की स्थिति गंभीर होने का इंतजार करने के बजाय पहले से तैयारी की जाए।
उन्होंने कहा कि गुरुग्राम सहित पूरे NCR में प्रभावी प्रदूषण नियंत्रण जरूरी है। इससे पहले मुख्यमंत्री की ओर से भी गुरुग्राम में नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने के निर्देश दिए गए थे। मंत्री ने कहा कि जनप्रतिनिधि होने के नाते शहर के निवासियों के प्रति उनकी जवाबदेही है और प्रदूषण नियंत्रण इसमें महत्वपूर्ण विषय है।
निर्माण स्थलों और RMC प्लांट पर रहेगी नजर
बैठक में अधिकारियों को निर्माण स्थलों, रेडी-मिक्स कंक्रीट (RMC) प्लांट और सड़कों की सफाई व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने को कहा गया। ये गतिविधियां धूल प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों में शामिल हो सकती हैं।
निर्माण स्थलों पर धूल उड़ने से रोकने, सामग्री को ढककर रखने, नियमित सफाई और जरूरत के अनुसार पानी का छिड़काव जैसे उपाय महत्वपूर्ण हैं। इसी तरह RMC प्लांट में निर्धारित पर्यावरणीय मानकों का पालन और धूल नियंत्रण की व्यवस्था सुनिश्चित करना जरूरी है।
मंत्री ने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए। नगर निगमों और गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (GMDA) को भी प्रदूषण नियंत्रण के लिए अतिरिक्त कदम उठाने को कहा जाएगा।
सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और कचरा प्रबंधन की जांच
राव नरबीर सिंह ने HSPCB के अधिकारियों और कर्मचारियों की NCR जिलों में तैनाती मजबूत करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रदूषण के स्रोतों की पहचान के लिए नियमित निरीक्षण और निर्धारित मानकों के अनुपालन की जांच आवश्यक है।
अधिकारियों को अलग-अलग स्थानों से प्रदूषण के स्तर और श्रेणियों के अनुसार नमूने एकत्र करने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) की नियमित निगरानी करने और बड़े स्तर पर कचरा पैदा करने वाली इकाइयों से अधिक से अधिक नमूने लेकर उनकी जांच करने पर जोर दिया गया।
इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह पता लगाना है कि प्रदूषण कहां से फैल रहा है और किन इकाइयों या गतिविधियों में सुधार की जरूरत है। नमूनों की जांच और निरीक्षण के आधार पर नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
नियमित निगरानी और समयबद्ध समीक्षा पर जोर
मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि कार्रवाई केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। नियमित निगरानी, समयबद्ध समीक्षा और निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों से प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सुझाव देने को भी कहा।
दिल्ली-NCR में सर्दियों के दौरान प्रदूषण की समस्या गंभीर हो सकती है। ऐसे में निर्माण गतिविधियों, सड़क की धूल, कचरा प्रबंधन और औद्योगिक इकाइयों की निगरानी जैसे कदम महत्वपूर्ण हैं। साप्ताहिक रिपोर्ट से विभागों के काम की समीक्षा करने और कमियों को समय रहते दूर करने में मदद मिल सकती है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि हरियाणा के संबंधित विभाग इन निर्देशों को किस तरह लागू करते हैं और गुरुग्राम सहित NCR के जिलों में प्रदूषण नियंत्रण के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

