Yuva Haryana: सूचना का अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी के लिए एक आवेदक को पांच साल से भी ज्यादा का इंतजार करना पड़ा। अधिकारियों की इस घोर लापरवाही और हीला-हवाली पर सख्त रुख अपनाते हुए हरियाणा राज्य सूचना आयोग ने फरीदाबाद नगर निगम को 30 दिन के भीतर 10,000 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। इसके साथ ही दोषी अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच के निर्देश जारी किए गए हैं।
क्या है पूरा मामला?
गौरी मौलेखी ने 23 दिसंबर 2020 को फरीदाबाद नगर निगम से ‘पशु जन्म नियंत्रण नियम 2001’ के पालन से जुड़ी जानकारियां मांगी थीं। इसमें निगरानी व क्रियान्वयन समिति के गठन, मास्टर प्लान, पशु जन्म नियंत्रण के लिए नियुक्त एजेंसी और भारतीय नस्ल के कुत्तों को गोद लेने को बढ़ावा देने के प्रयासों का ब्योरा शामिल था।
लेकिन अधिकारियों ने आवेदन को फुटबॉल की तरह कभी एक विभाग तो कभी दूसरे विभाग के पाले में सरकाया। आयोग द्वारा 2021 से 2026 तक कई बार आदेश जारी किए जाने के बाद भी पूरी जानकारी समय पर उपलब्ध नहीं कराई गई। जो जानकारी दी भी गई (21 अक्टूबर 2021 और 17 जुलाई 2025 को), आयोग के अनुसार वह भी अधूरी पाई गई।
राज्य सूचना आयोग का सख्त रुख
राज्य सूचना आयुक्त डॉ. अजय कुमार सूरा ने मामले पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रशासनिक देरी की वजह से ‘सूचना का अधिकार’ कानून को बेअसर नहीं बनाया जा सकता।
2 महीने में पूरी होगी जांच: निगम आयुक्त को जिम्मेदार अधिकारियों की विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं, जिसकी रिपोर्ट 15 दिनों के अंदर प्रस्तुत करनी होगी।
व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश: अतिरिक्त मुख्य सचिव (शहरी स्थानीय निकाय विभाग) को प्रदेश के सभी निकायों में RTI व्यवस्था दुरुस्त करने और पत्राचार के नाम पर आवेदनों को लंबित न रखने की ताकीद की गई है।
अधिकारियों पर जताई नाराजगी: 11 सितंबर 2026 को हुई सुनवाई के दौरान संबंधित सेनेटरी इंस्पेक्टर के बजाय सहायक सेनेटरी इंस्पेक्टर के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में पेश होने पर भी आयोग ने गहरी नाराजगी जाहिर की।
क्या कहता है RTI का नियम?
अधिनियम के तहत सामान्य RTI आवेदन का जवाब संबंधित जन सूचना अधिकारी को 30 दिनों के भीतर देना अनिवार्य है। जीवन और स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में यह सीमा मात्र 48 घंटे है। निर्धारित समय में सूचना न देने या लापरवाही बरतने पर अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई का कड़ा प्रावधान है।

