Yuva Haryana: हरियाणा के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों पर अब कचरे का ढेर नजर नहीं आएगा। सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद प्रदेश सरकार ने इन स्थलों को स्वच्छ बनाए रखने के लिए पूरे साल की विशेष सफाई कार्ययोजना तैयार की है।
इस नई रणनीति के तहत प्रत्येक चयनित तीर्थ और पर्यटन स्थल के आसपास 500 मीटर का क्लीन जोन (सफाई क्षेत्र) बनाया जाएगा। इसमें पहुंच मार्ग, पार्किंग स्थल, दुकानें और आसपास के अन्य सभी क्षेत्र शामिल रहेंगे।
पहले चरण में शामिल प्रमुख धार्मिक स्थल
अभियान के पहले चरण में राज्य के तीन बड़े धार्मिक स्थलों को शामिल किया गया है:
- मनसा देवी मंदिर (पंचकूला): नवरात्र के दौरान यहां प्रतिदिन करीब 48 टन कचरा निकलता है, जो सामान्य दिनों की तुलना में 10 गुना अधिक है।
- शीतला माता मंदिर (गुरुग्राम): सामान्य दिनों में रोजाना 200 किलो से अधिक फूल निकलते हैं, जबकि त्योहारों में यह आंकड़ा 1,000 किलो (1 टन) तक पहुंच जाता है।
- ब्रह्मसरोवर (कुरुक्षेत्र): रोजाना करीब 5-6 हजार श्रद्धालु व पर्यटक यहां पहुंचते हैं। यहां से प्रतिदिन लगभग 100 टन कचरा निकलता है।
सफाई व्यवस्था के लिए कड़े नियम और डिजिटल निगरानी
जिओ-टैग तस्वीरों से निगरानी: सफाई कार्य केवल झाड़ू लगाने तक सीमित नहीं रहेगा। बड़े आयोजनों के दौरान रोजाना डिजिटल रूप से निगरानी की जाएगी और दिन में दो बार जिओ-टैग (Geo-tagged) तस्वीरों के जरिए जांच होगी। इसके लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे।
24 घंटे में कचरा साफ: कार्यक्रम या आयोजन समाप्त होने के 24 घंटे के भीतर पूरा कचरा हटाना अनिवार्य होगा। आसपास के 1 किलोमीटर क्षेत्र से पान, तंबाकू के दाग और अन्य गंदगी भी साफ की जाएगी।
फूल-निर्मात्य के लिए अलग कलश: मंदिरों और घाटों पर श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए फूल और पूजा सामग्री को नदी, तालाब या जल स्रोतों में बहाने पर रोक रहेगी। इनके लिए अलग कलश रखे जाएंगे।
डस्टबिन की व्यवस्था: प्रमुख रास्तों पर हर 50 मीटर तथा श्रद्धालुओं की कतार वाले स्थानों पर हर 25 मीटर पर चार तरह के डस्टबिन (गीला, सूखा, सैनिटरी और विशेष कचरा) लगाए जाएंगे।
भंडारे, लंगर, होटल और ढाबों पर भी लागू होंगे नियम
500 मीटर के दायरे में आने वाले भंडारे, लंगर, प्रसाद की दुकानें, धर्मशालाएं, होटल और ढाबे भारी कचरा उत्पादक श्रेणी में माने जाएंगे।
- इन्हें कचरा अलग-अलग (सूखा व गीला) रखना होगा और खुद डस्टबिन लगाने होंगे।
- सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा।
- नियम तोड़ने पर जुर्माना, जमा राशि जब्त करने से लेकर व्यावसायिक अनुमति रद्द की जा सकती है। पानी व बिजली के कनेक्शन भी काटे जा सकते हैं।
शौचालय व सीवेज व्यवस्था
- बड़े आयोजनों में प्रति 100 उपयोगकर्ताओं पर कम से कम एक शौचालय सीट उपलब्ध कराई जाएगी, जिसमें 50% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
- जरूरत के अनुसार मोबाइल शौचालय भी तैनात किए जाएंगे। गंदे पानी और मल-गाद को निर्धारित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) तक पहुंचाना अनिवार्य होगा।
- हर स्थल पर 7 दिनों का कचरा प्रबंधन रिकॉर्ड रखा जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट का रुख:
सुप्रीम कोर्ट ने 19 फरवरी 2026 को पर्यटन और तीर्थ स्थलों पर बढ़ती गंदगी को लेकर चिंता व्यक्त की थी। इसके बाद 5 मई 2026 को कोर्ट ने सभी राज्यों को प्रमुख पर्यटन व तीर्थ स्थलों की पहचान कर कचरा प्रबंधन प्रणाली लागू करने के आदेश दिए थे।

