Yuva Haryana : भारत से करीब छह हजार किलोमीटर दूर अफ्रीका के तंजानिया में रहने वाले एक युवा ने कभी शायद यह नहीं सोचा होगा कि एक दिन उसकी आवाज उसे भारत के हरियाणा तक ले आएगी। लेकिन सपने जब बड़े हों और उन्हें पूरा करने की जिद उससे भी बड़ी, तो सफर की दूरी मायने नहीं रखती।
यह कहानी है फैजल की, जिन्होंने तंजानिया से भारत का रुख किया और आखिरकार हरियाणा के कुरुक्षेत्र को अपना घर बना लिया। आज वह हिंदी ही नहीं, बल्कि मराठी और पंजाबी समेत कई भारतीय भाषाओं में गाने की कोशिश करते हैं, ठेठ हरियाणवी अंदाज में बातचीत करते हैं और अपनी प्रतिभा के दम पर ‘India’s Got Latent’ जैसे चर्चित मंच तक पहुंच चुके हैं।
भारतीय फिल्मों से शुरू हुआ संगीत का सफर
फैजल का भारतीय संगीत और सिनेमा से लगाव उनके सफर का अहम हिस्सा रहा। भारतीय फिल्में देखते-देखते उन्होंने हिंदी सीखी और गाना शुरू किया। धीरे-धीरे भारतीय भाषाओं को समझने और बोलने की उनकी क्षमता बढ़ती गई।
आज उनकी खासियत सिर्फ उनकी आवाज नहीं है। अलग-अलग भारतीय भाषाओं में गाने और हरियाणवी अंदाज में बातचीत करने की उनकी क्षमता उन्हें दूसरों से अलग बनाती है।
तंजानिया से हरियाणा… कुरुक्षेत्र बना घर
भारत आने के बाद फैजल का सफर हरियाणा के कुरुक्षेत्र तक पहुंचा। यहां उन्होंने सिर्फ एक शहर नहीं चुना, बल्कि इसे अपना घर बना लिया।
कुरुक्षेत्र की गलियों और स्थानीय माहौल में घुलते-मिलते हुए फैजल ने हरियाणवी भाषा और संस्कृति को भी अपनाया। उनका अंदाज देखकर कई बार यह भूलना मुश्किल हो जाता है कि उनका जन्म भारत में नहीं हुआ।
कुरुक्षेत्र में उन्हें ऐसे लोग भी मिले जिन्हें वह अपने परिवार का हिस्सा मानते हैं। यही अपनापन शायद उनके लिए भारत को सिर्फ एक देश नहीं, बल्कि घर जैसा बनाने में अहम रहा।
रास्ते में मिले ताने और नस्लभेद की मुश्किलें
हालांकि यह सफर हमेशा आसान नहीं रहा। एक दूसरे देश से आकर नई भाषा, संस्कृति और समाज में अपनी जगह बनाना अपने आप में चुनौती थी।
फैजल को शुरुआती दौर में तानों और नस्लवाद जैसी परिस्थितियों का भी सामना करना पड़ा। लेकिन इन मुश्किलों ने उनके सपनों को रोकने के बजाय उनके इरादे को और मजबूत किया।
कुरुक्षेत्र की एक तंग गली में बने छोटे से मकान में रहते हुए भी फैजल की सोच छोटी नहीं हुई। उनके सामने सपने बड़े थे और उन्हें पूरा करने की जिद उससे भी बड़ी।
मार्शल आर्ट्स भी जानते हैं फैजल
संगीत और भाषाओं के अलावा फैजल की एक और दिलचस्प पहचान है—उन्हें मार्शल आर्ट्स का भी ज्ञान है।
उनकी शख्सियत में संगीत, भारतीय संस्कृति, हरियाणवी अंदाज और मार्शल आर्ट्स का यह मेल उन्हें एक अलग तरह का व्यक्तित्व देता है।
वह ‘भाईचारा ऑन टॉप’ में विश्वास रखने की बात करते हैं और अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोगों के बीच जुड़ाव को महत्व देते हैं।
‘India’s Got Latent’ तक पहुंचा सपना
तंजानिया से शुरू हुआ यह सफर आखिरकार उन्हें समय रैना के चर्चित शो ‘India’s Got Latent’ तक ले गया।
एक ऐसे युवा के लिए, जिसने हजारों किलोमीटर दूर से भारत को फिल्मों और संगीत के जरिए जाना था, किसी बड़े भारतीय मंच तक पहुंचना उसके सफर का महत्वपूर्ण पड़ाव है।
फैजल की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि इसमें सिर्फ एक कलाकार के पहचान बनाने की कहानी नहीं है। इसमें एक ऐसे इंसान की कहानी है जिसने एक नई जगह को समझा, नई भाषा सीखी, नई संस्कृति को अपनाया और मुश्किलों के बावजूद अपने सपनों का पीछा करना जारी रखा।
तंग गली से बड़े सपनों तक
आज भी फैजल कुरुक्षेत्र की उसी दुनिया से जुड़े हैं, जहां उन्होंने भारत में अपने सफर को आगे बढ़ाया। फर्क सिर्फ इतना है कि अब उनके सपनों की पहुंच कहीं ज्यादा दूर है।
तंजानिया से भारत, भारत से हरियाणा और हरियाणा से एक बड़े मंच तक का यह सफर बताता है कि पहचान हमेशा जन्म की जगह से तय नहीं होती। कभी-कभी इंसान जहां अपनापन पाता है, वही जगह उसका घर बन जाती है।
फैजल के लिए कुरुक्षेत्र अब सिर्फ रहने की जगह नहीं, बल्कि उनके सपनों की जमीन है—जहां से वह आगे की उड़ान भरने की तैयारी कर रहे हैं।

