हरियाणा की रेणु सांगवान की मिसाल, 9 गायों से शुरू किया 3 करोड़ का डेयरी कारोबार; 15 देशों में पहुंचा घी
Yuva Haryana: मेहनत, हौसले और कुछ नया करने का जज्बा हो तो छोटी शुरुआत भी बड़ी सफलता में बदल सकती है। हरियाणा के झज्जर जिले के गांव खरमाण की रेणु सांगवान ने इसे सच कर दिखाया है। कभी नौ गायों से शुरू हुई उनकी डेयरी आज करोड़ों रुपये के कारोबार तक पहुंच चुकी है। पारंपरिक बिलौना विधि से तैयार उनका देसी घी देश के साथ विदेशों में भी पहचान बना रहा है। आज उनके कारोबार का सालाना टर्नओवर करीब 3 करोड़ रुपये से अधिक बताया जा रहा है और उनके उत्पादों की मांग 15 देशों तक पहुंच चुकी है।
दिवाली के मौके पर उनकी सफलता की कहानी खास चर्चा में है। घी से बने लड्डुओं की भी मांग बढ़ी है और त्योहार से पहले करीब 300 किलो बेसन के लड्डुओं के ऑर्डर मिलने की जानकारी सामने आई है।
पति के सपने को बनाया अपनी मंजिल
रेणु सांगवान के पति कृष्ण कुमार ने वर्ष 2016 में करीब 350 वर्ग गज जगह पर नौ देसी गायों के साथ डेयरी कारोबार शुरू किया था। उनका उद्देश्य अच्छी गुणवत्ता वाला दूध और घी उपलब्ध कराने के साथ देसी गायों का संरक्षण करना भी था। लेकिन वर्ष 2017 में पति के अचानक निधन के बाद परिवार के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई।
उस समय उनके दोनों बेटे पढ़ाई कर रहे थे। परिवार की जिम्मेदारी और डेयरी कारोबार संभालने का बोझ रेणु पर आ गया। उन्होंने मुश्किल हालात में हार मानने के बजाय पति के सपने को आगे बढ़ाने का फैसला किया। धीरे-धीरे गायों की संख्या बढ़ाई और डेयरी के काम को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया।
कोरोना काल में मिला बिलौना घी बनाने का विचार
रेणु के कारोबार के लिए कोरोना महामारी का समय भी बड़ी चुनौती लेकर आया। लॉकडाउन के दौरान दूध की बिक्री प्रभावित हो गई। उनके पास रोजाना करीब 150 लीटर दूध उपलब्ध था, लेकिन उसे बेच पाना मुश्किल हो रहा था।
ऐसे में उन्होंने दूध से पारंपरिक बिलौना विधि द्वारा देसी घी तैयार करना शुरू किया। इस तरीके में पहले दूध से दही बनाया जाता है और फिर उसे मथकर मक्खन निकाला जाता है। इसके बाद मक्खन को गर्म करके घी तैयार किया जाता है।
रेणु ने अपने उत्पाद की जानकारी लोगों तक पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया। वर्ष 2021 में अमेरिका में रहने वाली एक एनआरआई ग्राहक ने उनसे 10 किलो घी का पहला विदेशी ऑर्डर दिया। यह उनके कारोबार के लिए महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ।
15 देशों तक पहुंचा गोकुल फार्म का घी
रेणु सांगवान का कारोबार अब ‘गोकुल फार्म’ के नाम से जाना जाता है। शुरुआती छोटी डेयरी का विस्तार करीब चार एकड़ तक हो चुका है। अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, फार्म में लगभग 270 से 300 देसी गायें हैं। इनमें साहीवाल, गिर, राठी और अन्य देसी नस्लें शामिल हैं।
यहां तैयार होने वाले पारंपरिक बिलौना घी की कीमत करीब 3,500 रुपये प्रति किलो बताई गई है। इसकी मांग अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, दुबई, ब्रिटेन और फिलीपींस सहित कई देशों में है। रिपोर्टों के मुताबिक, फार्म का सालाना कारोबार 3 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है।
दोनों बेटे भी संभाल रहे कारोबार
रेणु की सफलता में उनके दोनों बेटों का भी महत्वपूर्ण योगदान है। बड़ा बेटा अक्षय डेयरी के कामकाज और कारोबार को संभालने में मदद करता है। वहीं छोटा बेटा विनय सांगवान पशु चिकित्सक है और गायों के स्वास्थ्य तथा देखभाल की जिम्मेदारी निभाता है।
डेयरी में घी के अलावा उससे तैयार होने वाले लड्डुओं की भी मांग है। त्योहारों के समय इनकी बिक्री बढ़ जाती है। दिवाली से पहले मिले 300 किलो लड्डुओं के ऑर्डर ने कारोबार को अतिरिक्त गति दी है।
गोसेवा के लिए मिल चुका है राष्ट्रीय सम्मान
रेणु सांगवान को देसी गायों के संरक्षण और गोसेवा के क्षेत्र में योगदान के लिए सम्मानित भी किया जा चुका है। वर्ष 2024 में उन्हें राष्ट्रीय गोपाल रत्न पुरस्कार मिला था। इसके अलावा हरियाणा में आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने उन्हें सर्वोच्च गोसेवा सम्मान से सम्मानित किया था। इस सम्मान के साथ 51 हजार रुपये की पुरस्कार राशि भी दी गई थी।
रेणु सांगवान की कहानी बताती है कि विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य और मेहनत से नई राह बनाई जा सकती है। नौ गायों से शुरू हुआ उनका सफर आज ग्रामीण महिला उद्यमिता, डेयरी व्यवसाय और देसी नस्लों के संरक्षण की प्रेरक मिसाल बन गया है।

