त्योहारी सीजन में हरियाणा रोडवेज की 180 बसें खड़ी, टायरों की कमी से यात्रियों की बढ़ेगी परेशानी
Yuva Haryana: त्योहारी सीजन में यात्रियों की बढ़ती भीड़ के बीच हरियाणा रोडवेज की बस सेवाएं टायरों की कमी से प्रभावित हो रही हैं। प्रदेश के अलग-अलग डिपो में करीब 180 बसें टायरों और उनकी रिसोलिंग की व्यवस्था नहीं होने के कारण खड़ी बताई जा रही हैं। ऐसे समय में जब त्योहारों पर यात्रियों की आवाजाही बढ़ जाती है और अतिरिक्त बसों की जरूरत होती है, तब बसों का वर्कशॉप में खड़ा रहना परिवहन विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
टायरों की कमी के साथ-साथ पुराने टायरों को दोबारा इस्तेमाल लायक बनाने की प्रक्रिया यानी रिसोलिंग का काम भी प्रभावित है। इसका असर कई जिलों के बस रूटों पर पड़ रहा है। यात्रियों को बसों के लिए अधिक इंतजार करना पड़ सकता है, वहीं ग्रामीण और छोटे शहरों के रूटों पर परेशानी बढ़ने की आशंका है।
तीन महीने से प्रभावित है टायरों की रिसोलिंग
हरियाणा रोडवेज की वर्कशॉप में बसों के पुराने टायरों पर नई रबर की परत चढ़ाकर उन्हें दोबारा इस्तेमाल के योग्य बनाया जाता है। इस प्रक्रिया को रिसोलिंग या रीट्रेडिंग कहा जाता है। लेकिन ठेके की अवधि समाप्त होने और नई एजेंसी तय करने में देरी के कारण यह व्यवस्था प्रभावित हुई है।
करनाल की राज्यस्तरीय वर्कशॉप में रिसोलिंग का काम करीब एक महीने से बंद होने की रिपोर्ट सामने आई है। यहां अलग-अलग डिपो से आए लगभग 1,200 घिसे हुए टायर जमा हैं, जो करीब 200 बसों के बताए गए हैं। नई एजेंसी और जरूरी सामग्री उपलब्ध होने के बाद ही इन टायरों पर काम शुरू हो सकेगा।
हिसार में भी टायरों की कमी का असर देखने को मिला है। अगस्त में वहां रिसोलिंग प्लांट दोबारा शुरू होने के बाद करीब एक हजार टायरों को रिसोल करने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। हालांकि, बाद की रिपोर्टों में हिसार और हांसी डिपो में 50 से अधिक बसों के प्रभावित होने की बात सामने आई।
गुरुग्राम से हिसार तक बस संचालन प्रभावित
टायरों की कमी का असर प्रदेश के कई डिपो में दिखाई दे रहा है। गुरुग्राम में टायरों की उपलब्धता कम होने के कारण बसों को संचालन से बाहर रखना पड़ रहा है। कुछ जगहों पर उपलब्ध टायरों को एक बस से दूसरी बस में लगाकर काम चलाया जा रहा है।
झज्जर और बहादुरगढ़ में भी करीब 20 बसें इस समस्या से प्रभावित बताई गई हैं। वहीं हिसार और हांसी में 30 से अधिक बसों के संचालन में परेशानी की जानकारी सामने आई है। चंडीगढ़ डिपो की करीब 10 बसों की रिसोलिंग लंबित बताई गई है। इसके अलावा भिवानी, सिरसा, फरीदाबाद और पानीपत सहित अन्य जिलों में भी टायरों की कमी से बस सेवाओं पर असर पड़ने की बात कही गई है।
सिरसा में रोडवेज कर्मचारी यूनियन ने भी टायरों की कमी का मुद्दा उठाते हुए कहा था कि प्रदेशभर में सैकड़ों बसें रोजाना इस समस्या के कारण सड़कों पर नहीं उतर पा रहीं। यूनियन ने मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी थी।
टेंडर प्रक्रिया में देरी बनी बड़ी वजह
परिवहन विभाग के आयुक्त एवं सचिव अतुल कुमार के अनुसार, टायरों की खरीद और रिसोलिंग से संबंधित टेंडर पहले भी आमंत्रित किए गए थे, लेकिन कोई एजेंसी आगे नहीं आई। अब विभाग ने दोबारा शॉर्ट-टर्म टेंडर जारी किए हैं। इन्हें आगामी 10 दिनों के भीतर खोले जाने की बात कही गई है। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने और एजेंसी तय होने के बाद रिसोलिंग के लिए जरूरी सामग्री उपलब्ध कराई जा सकेगी।
कर्मचारी यूनियन ने जताई नाराजगी
हरियाणा रोडवेज कर्मचारी संघ के राज्य प्रधान कृष्ण नोहरा और रोडवेज वर्कर्स यूनियन के राज्य उपप्रधान जयकुमार दहिया ने टायरों की कमी पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि कर्मचारी पिछले तीन महीनों से परिवहन मंत्री अनिल विज और विभाग के अधिकारियों को इस समस्या से अवगत करा रहे हैं, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं निकला है।
त्योहारी सीजन में बसों की मांग बढ़ने के बावजूद इतनी बड़ी संख्या में बसों का खड़ा रहना यात्रियों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। अब सभी की नजर विभाग की टेंडर प्रक्रिया और टायरों की आपूर्ति पर है। यदि जल्द व्यवस्था नहीं सुधरी तो आने वाले दिनों में रोडवेज सेवाओं पर दबाव और बढ़ सकता है।

