गुरुग्राम में 1417 एकड़ जमीन अधिग्रहण मामला: CBI ने 7 साल बाद दाखिल की चार्जशीट, बिल्डरों पर गंभीर आरोप
Yuva Haryana: हरियाणा के गुरुग्राम में किसानों की जमीन अधिग्रहण से जुड़े चर्चित मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने करीब सात साल की जांच के बाद चार्जशीट दाखिल की है। यह मामला पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के कार्यकाल (2007-2012) के दौरान गुरुग्राम के सेक्टर 58 से 63 और सेक्टर 65 से 67 में किसानों की जमीन अधिग्रहित करने से जुड़ा है। आरोप है कि किसानों से कम कीमत पर जमीन अधिग्रहित कर बाद में बिल्डरों को महंगे दामों पर बेचने का फायदा पहुंचाया गया।
इस मामले में करीब 1417.07 एकड़ जमीन के अधिग्रहण को लेकर जांच की गई है। आरोपों के मुताबिक, किसानों से सस्ते दामों पर जमीन ली गई और बाद में इसी जमीन को ऊंची कीमतों पर बिल्डरों को उपलब्ध कराया गया। इस पूरी प्रक्रिया में बिल्डरों को अनुचित आर्थिक लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया गया है।
चार बिल्डरों के खिलाफ दाखिल की गई चार्जशीट
CBI ने अपनी जांच पूरी करने के बाद बिल्डर कंपनियों और उनसे जुड़े लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। एजेंसी ने एम3एम के एमडी रूप कुमार बंसल, हरदीप बेदी, दलवीर सिंह और राम अवतार समेत बिल्डर पक्ष से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई की है।
जांच एजेंसी के अनुसार, इन बिल्डरों ने किसानों से जमीन खरीदी थी। मामले की जांच में यह पता लगाने की कोशिश की गई कि जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में किन लोगों की भूमिका रही और किस तरह बिल्डरों को इसका आर्थिक फायदा पहुंचा।
2019 में दर्ज हुआ था मामला
CBI ने 23 जनवरी 2019 को इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, पूर्व IAS अधिकारी टीसी गुप्ता और 15 बिल्डर कंपनियों के खिलाफ केस दर्ज किया था। इसके बाद एजेंसी ने जमीन अधिग्रहण से जुड़े दस्तावेजों, जमीन के लेन-देन और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच शुरू की।
हालांकि, दाखिल की गई चार्जशीट में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और पूर्व IAS अधिकारी टीसी गुप्ता के नाम शामिल हैं या नहीं। इस संबंध में जांच की स्थिति को लेकर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर शुरू हुई थी जांच
इस मामले की जांच का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने 1 नवंबर 2017 को दिया था। अदालत के निर्देश के बाद CBI ने जमीन अधिग्रहण की पूरी प्रक्रिया की जांच शुरू की। जांच का मुख्य आधार यह था कि किसानों से जमीन कम कीमत पर अधिग्रहित करने और बाद में बिल्डरों को महंगे दामों पर उपलब्ध कराने के पीछे क्या कारण थे।
15 बिल्डर कंपनियां भी जांच के दायरे में
जिन 15 बिल्डर कंपनियों के नाम सामने आए हैं, उनमें आरएस इंफ्रास्ट्रक्चर, मार्शल बिल्डकॉन, मार्कोनी इंफ्राटेक, कमांडर रियल्टर्स, एमयू एस्टेट्स, बज होटल्स, कृष बिल्डटेक, इमार एमजीएफ लैंड लिमिटेड, जेएमडी लिमिटेड, अंसल प्रॉपर्टीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर, गुप्ता प्रमोटर्स, डीएलएफ न्यू गुड़गांव होम्स, एचएस रियल्टी, डीपीएस इंफ्रास्ट्रक्चर और साना रियल्टर्स शामिल हैं।
इस मामले में CBI की चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब जांच से जुड़े तथ्यों और आरोपों पर आगे की कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। गुरुग्राम में किसानों की जमीन अधिग्रहण से जुड़ा यह मामला लंबे समय से चर्चा में रहा है। अब करीब सात साल बाद जांच पूरी होने और चार्जशीट दाखिल होने से इस मामले में आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें रहेंगी।

