Yuva Haryana: हरियाणा में गन्ने के दाम बढ़ाने की मांग को लेकर किसान संगठनों ने सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। किसानों ने गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य (SAP) बढ़ाकर 600 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग की है। मांग पूरी नहीं होने पर किसान 5 जनवरी 2027 से प्रदेश की चीनी मिलों पर ताला लगाने और गन्ने की सप्लाई रोकने की तैयारी कर रहे हैं। भारतीय किसान यूनियन (चारुणी) के नेतृत्व में 12 चीनी मिलों की किसान समितियों के प्रतिनिधियों ने मिलकर आंदोलन की रणनीति तैयार की है।
किसानों का कहना है कि सरकार ने गन्ने के दाम में जो बढ़ोतरी की है, वह खेती की लगातार बढ़ती लागत के मुकाबले बेहद कम है। खाद, बीज, कीटनाशक, डीजल, सिंचाई और मजदूरी का खर्च बढ़ने के बावजूद किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है।
सरकार ने दो साल में 35 रुपये बढ़ाया गन्ने का भाव
हरियाणा सरकार ने आगामी दो पेराई सत्रों के लिए गन्ने के राज्य परामर्श मूल्य में कुल 35 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की है। सरकार के फैसले के अनुसार, 2025-26 के पेराई सत्र में 415 रुपये प्रति क्विंटल मिलने वाला गन्ना अब 2026-27 में 430 रुपये प्रति क्विंटल मिलेगा। वहीं, 2027-28 के पेराई सत्र में इसका भाव बढ़ाकर 450 रुपये प्रति क्विंटल किया जाएगा।
इस तरह पहले साल 15 रुपये और अगले साल 20 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है। हालांकि, किसान संगठनों ने इस फैसले को नाकाफी बताते हुए कहा है कि उन्हें कम से कम 600 रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिलना चाहिए।
12 चीनी मिलों की किसान समितियों ने बनाई रणनीति
भारतीय किसान यूनियन (चारुणी) के प्रदेश अध्यक्ष गुरनाम सिंह चारुणी के अनुसार, प्रदेश की 12 चीनी मिलों से जुड़ी गन्ना किसान समितियों के प्रतिनिधियों की बैठक में राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया गया है।
किसान नेताओं का कहना है कि गन्ने की खेती में लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि किसानों को मिलने वाला मूल्य उस अनुपात में नहीं बढ़ाया जा रहा। दूसरी ओर चीनी और उससे बनने वाले अन्य उत्पादों के बाजार भाव में वृद्धि हो रही है। ऐसे में किसानों को भी इसका उचित लाभ मिलना चाहिए।
नवंबर के अंत तक हर चीनी मिल पर होगी किसान पंचायत
आंदोलन के पहले चरण में नवंबर के अंत तक प्रदेश की सभी चीनी मिलों पर किसान पंचायत आयोजित की जाएगी। इन पंचायतों के माध्यम से किसानों को एकजुट किया जाएगा और सरकार को ज्ञापन सौंपकर गन्ने का भाव 600 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग रखी जाएगी।
इसके बाद करीब 15 दिसंबर को राज्यस्तरीय महापंचायत आयोजित करने की योजना है। इसमें प्रदेशभर के किसान और किसान संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। महापंचायत के जरिए आंदोलन को और मजबूत करने तथा सरकार पर मांग स्वीकार करने का दबाव बनाया जाएगा।
25 दिसंबर से चीनी मिलों के बाहर धरना
किसान संगठनों ने आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने का फैसला किया है। इसके तहत 25 दिसंबर से प्रदेश की सभी चीनी मिलों के बाहर धरने शुरू किए जाएंगे। यदि इसके बाद भी सरकार गन्ने के दाम बढ़ाने पर फैसला नहीं लेती है, तो किसान 2 जनवरी 2027 से गन्ने की कटाई बंद कर देंगे।
इसके अगले चरण में 5 जनवरी से चीनी मिलों पर ताला लगाने की चेतावनी दी गई है। किसानों ने कहा है कि जब तक सरकार उनकी मांग स्वीकार नहीं करती, तब तक मिलों को गन्ने की सप्लाई भी नहीं की जाएगी।
गन्ने की खेती का रकबा घटने की चिंता
किसान नेताओं का कहना है कि उचित मूल्य नहीं मिलने के कारण प्रदेश में गन्ने की खेती का रकबा घट रहा है। किसान दूसरी नकदी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं। इससे आने वाले समय में चीनी मिलों को पर्याप्त गन्ना मिलने में परेशानी हो सकती है और उनकी पेराई क्षमता पर भी असर पड़ सकता है।
नारायणगढ़ चीनी मिल में 17 नवंबर से पेराई शुरू होने की उम्मीद है, जबकि गन्ने की कटाई लगभग 15 नवंबर से शुरू होने की संभावना जताई गई है। किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर सकारात्मक फैसला नहीं लिया तो आंदोलन का असर चीनी मिलों के संचालन पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल किसान संगठनों ने सरकार से बातचीत और मांगों पर विचार करने की अपील की है। आने वाले दिनों में सरकार की प्रतिक्रिया और किसान संगठनों के आंदोलन की दिशा पर सभी की नजर रहेगी।

