रत्नावली महोत्सव में रैंप पर उतरी हरियाणवी संस्कृति, चाप सिंह-सोमवती के सांग ने दर्शकों को बांधे रखा
Yuva Haryana: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में आयोजित राज्यस्तरीय रत्नावली महोत्सव-2026 के दूसरे दिन हरियाणवी लोक संस्कृति के रंग देखने को मिले। प्रदेश के अलग-अलग कॉलेजों और संस्थानों से पहुंचे विद्यार्थियों ने फैशन शो, लोकनृत्य, सांग और नाट्य प्रस्तुतियों के जरिए हरियाणा की परंपराओं को मंच पर जीवंत कर दिया। हरियाणवी फैशन शो में पारंपरिक वेशभूषा को नए अंदाज में पेश किया गया, वहीं चाप सिंह-सोमवती की प्रेमगाथा पर आधारित सांग ने दर्शकों को लंबे समय तक बांधे रखा।
चार दिवसीय रत्नावली महोत्सव का आयोजन 1 से 4 नवंबर तक कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में किया जा रहा है। इसमें प्रदेशभर से 3,000 से अधिक कलाकार 33 सांस्कृतिक विधाओं में अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं। महोत्सव का उद्देश्य हरियाणा की लोक कला, संगीत, नृत्य, भाषा और पारंपरिक जीवनशैली को नई पीढ़ी से जोड़ना है।
50 से ज्यादा विद्यार्थियों ने रैंप पर दिखाए लोक परिधान
महोत्सव के दूसरे दिन हरियाणवी फैशन शो खास आकर्षण रहा। इसमें 15 से अधिक संस्थानों के 50 से ज्यादा छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। विद्यार्थियों ने हरियाणा के पारंपरिक महिला और पुरुष परिधानों को आधुनिक अंदाज में रैंप पर प्रस्तुत किया। घाघरा, धोती-कुर्ता, चुंदड़ी, दामण, पगड़ी, कुर्ती, दुपट्टा, घाघरी और अन्य पारंपरिक पहनावे शो का हिस्सा बने।
फैशन शो में हरियाणा के अलग-अलग क्षेत्रों की वेशभूषा और उनकी सांस्कृतिक पहचान को सामने लाने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम के जरिए यह संदेश भी दिया गया कि पारंपरिक पहनावे केवल पुराने समय की पहचान नहीं हैं, बल्कि इन्हें नए डिजाइन और अंदाज के साथ आज की पीढ़ी तक पहुंचाया जा सकता है।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के युवा एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग के निदेशक प्रो. विवेक चावला ने बताया कि फैशन शो हरियाणा की सांस्कृतिक विरासत की झलक पेश करने का माध्यम बना। विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. वीरेंद्र पाल ने भी युवाओं को प्रदेश की परंपराओं से जोड़ने के महत्व पर जोर दिया।
चाप सिंह-सोमवती की प्रेमगाथा का मंचन
महोत्सव में सांग की प्रस्तुति भी दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रही। राजकीय महाविद्यालय हिसार के 15 विद्यार्थियों ने करीब 90 मिनट तक चाप सिंह और सोमवती की प्रेमगाथा को मंच पर प्रस्तुत किया। कलाकारों ने लोकनाट्य की पारंपरिक शैली के माध्यम से प्रेम, वीरता और सच्चाई जैसे भावों को जीवंत किया।
इस प्रस्तुति में हरियाणा की पुरानी सांग परंपरा और लोककथाओं की झलक देखने को मिली। विद्यार्थियों ने अभिनय, संवाद और संगीत के माध्यम से दर्शकों को लोकनाट्य की समृद्ध विरासत से परिचित कराया।
स्किट और स्टैंडअप के जरिए सामाजिक संदेश
ओपन एयर थिएटर में स्किट और हास्य व्यंग्य से जुड़ी प्रस्तुतियां भी आयोजित की गईं। विद्यार्थियों ने सामाजिक मुद्दों और बदलती जीवनशैली से जुड़े विषयों को मंच पर उठाया। भारत कॉलेज ऑफ लॉ, लाडवा की टीम ने मोबाइल फोन और सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल से जुड़े मुद्दों पर प्रस्तुति दी। कलाकारों ने दिखाया कि तकनीक के उपयोग के साथ सामाजिक व्यवहार और रिश्तों पर भी ध्यान देना जरूरी है।
हरियाणवी खानपान और लोककला भी आकर्षण
रत्नावली महोत्सव में केवल मंचीय कार्यक्रम ही नहीं, बल्कि हरियाणा के पारंपरिक खानपान और हस्तकला को भी जगह दी गई है। गुड़ का हलवा, गुड़ के लड्डू, बाजरे से बने व्यंजन और अन्य पारंपरिक पकवान लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। लोक चित्रकला और पुरानी हरियाणवी वस्तुओं की प्रदर्शनी के जरिए भी प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित किया जा रहा है।
कुल मिलाकर, रत्नावली महोत्सव विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा दिखाने के साथ-साथ हरियाणा की लोक परंपराओं को समझने और आगे बढ़ाने का मंच दे रहा है। फैशन शो से लेकर सांग और लोकनृत्य तक, हर प्रस्तुति में प्रदेश की संस्कृति और पहचान की झलक दिखाई दे रही है।

