Yuva Haryana : हरियाणा के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार किन कारणों से हुई ? यह चर्चा चुनाव परिणाम के बाद से ही हरियाणा में जारी है। कई राजनीतिक दल जहां खुलकर पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा और भाजपा की मिलीभगती के आरोप लगाते आ रहे हैं तो वहीं कांग्रेस की गुटबाजी को भी हार का बड़ा कारण माना जाता है।
इस बीच हरियाणा कांग्रेस की नवगठित अनुशासन समिति के चेयरमैन धर्मपाल मलिक ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि कांग्रेसियों की आपसी गुटबाजी, एक-दूसरे के प्रति विरोधी बयानबाजी और अनुशासनहीनता की वजह से कांग्रेस को भारी नुकसान हुआ।
धर्मपाल मिलक ने यह भी कहा कि हरियाणा की जनता कांग्रेस को वोट देना चाहती थी, कांग्रेसियों की खींचतान और आपसी टकराव ने जनसमर्थन और जनभावनाओं को नुकसान पहुंचाया। इसमें जनता का कोई दोष नहीं था, क्योंकि गलती कांग्रेसियों की ही थी।
दरअसल, रविवार को चंडीगढ़ स्थित कांग्रेस कार्यालय में कांग्रेस की अनुशासन समिति की बैठक हुई थी, जिसमें कांग्रेस की आपसी गुटबाजी पर भी विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में पार्टी अनुशासन से जुड़ी कार्यप्रणाली पर भी चर्चा की गई और कांग्रेसियों को लक्ष्मण रेखा पार न करने को लेकर रूपरेखा तैयार की गई।

हरियाणा कांग्रेस को अनुशासन के दायरे में लाने के लिए गठित की गई पांच सदस्यीय अनुशासनात्मक कमेटी की पहली बैठक में चेयरमैन धर्मपाल सिंह मलिक, जगाधरी विधायक अकरम खान, पूर्व सांसद कैलाशो सैनी, पूर्व विधायक अनिल धंतौड़ी और सदस्य सचिव व वरिष्ठ अधिवक्ता रोहित जैन शामिल रहे।
इस कमेटी ने स्वीकार किया कि गुटबाजी, अनुशासनहीनता व बयानबाजी के कारण कांग्रेस को नुकसान हुआ है, इसलिए प्रदेश को पांच जोनों में बांटने, हर जोन में अनुशासन और आचार संहिता पर जागरूकता बैठकों का आयोजन करने सहित कई अहम फैसले लिए गए।
साथ ही कांग्रेस ने शिकायतों और सुझावों के लिए एक ई-मेल dac.hpcc@gmail.com बनाई है।
कमेटी चेयरमैन धर्मपाल मलिक ने बताया कि आने वाले दिनों में जोन-वाइज बैठकें आयोजित होंगी जिनमें जिला स्तरीय पदाधिकारियों, प्रमुख नेताओं और ब्लॉक स्तर के कार्यकर्ताओं को बुलाया जाएगा। इन बैठकों में उन्हें अनुशासन की आचार संहिता का विस्तार से पाठ पढ़ाया जाएगा।
धर्मपाल मलिक ने पत्रकार वार्ता में कहा कि पार्टी का संविधान और नियम सबसे ऊपर हैं। नेता चाहे कितना ही बड़ा क्यों न हो, अगर उसने नियम तोड़े तो कार्रवाई जरूर होगी। उन्होंने कहा कि कमेटी का गठन 28 अक्टूबर को हुआ है, इसलिए अब 28 अक्टूबर के बाद सामने आने वाले अनुशासनहीनता के मामलों पर ही कार्रवाई की जाएगी और पुराने मामलों में कमेटी दखल नहीं देगी।
कमेटी की बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि जिन मामलों का संबंध प्रदेश संगठन के अधिकार क्षेत्र में है, उन पर सुनवाई के बाद तुरंत फैसला लिया जाएगा। वहीं सांसदों, एआईसीसी सदस्यों या राष्ट्रीय पदाधिकारियों से जुड़े मामलों में रिपोर्ट हाईकमान को भेजी जाएगी।



