Yuva Haryana : हरियाणा में भ्रष्टाचार की जांच के लिए नियमों में बदलाव किया गया है। अब भ्रष्टाचार के आरोप में किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ जांच एजेंसियां सरकार की मंजूरी के बिना कार्रवाई नहीं कर सकेगी।
दरअसल, हरियाणा सरकार ने केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की गाइडलाइन्स के तहत नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) लागू की है।
इसके अनुसार अब सरकार की मंजूरी के बिना भ्रष्टाचार के आरोप में किसी अधिकारी या कर्मचारी पर न तो जांच व पूछताछ होगी और न ही एफआईआर दर्ज की जा सकेगी।
हरियाणा सरकार ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए के तहत नई एसओपी लागू की है। इस नई एसओपी के लागू होने से साल 2022 में जारी हुए निर्देश रद्द हो गए है। ऐसे में भ्रष्टाचार के पुराने लंबित मामलों पर भी यह नए नियम लागू हो गए है, उनकी जांच के लिए भी एजेंसियों को अनुमति लेनी होगी।
हालांकि, रंगे हाथ रिश्वत लेते पकड़े गए अधिकारियों और कर्मचारियों पर यह नए नियम लागू नहीं होंगे, इस मामले में एजेंसियां पहले की तरह तुरंत कार्रवाई कर सकेगी।
नए नियमों में क्या ?
- अधिकारियों-कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच से पहले सरकार या सक्षम प्राधिकारी की अनुमति अनिवार्य
- चरणबद्ध तरीके से होगी जांच की प्रक्रिया। पहले जांच के लिए लिखित अनुमति लेनी होगी, फिर मंजूरी के बाद पूछताछ और जांच आगे बढ़ेगी
- इसके लिए सिंगल विंडो सिस्टम लागू किया गया
- अनुमति देने वाली अथॉरिटी के लिए समयसीमा तय और तीन महीने में निर्णय लेना अनिवार्य। विशेष मामलों में एक माह का समय और मिल सकता है, लेकिन देरी का कारण बताना होगा।
- अगर मामला हरियाणा स्टेट विजिलेंस एवं एंटी करप्शन ब्यूरो से जुड़ा है तो सरकार देगी मंजूरी
- प्रशासनिक अधिकारियों के मामलों में विजिलेंस ब्यूरो को पहले मुख्य सचिव से मंजूरी लेनी पड़ेगी
- अन्य एजेंसियों की जांच के लिए प्रशासनिक विभाग ही सक्षम प्राधिकारी माना जाएगा
- नई एसओपी में बड़े अधिकारियों के अलावा ग्रुप-सी और ग्रुप-डी के अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए भी यह प्रक्रिया होगी
इन नए नियमों को लागू करके राज्य सरकार का मानना है कि इससे जांच एजेंसियों की मनमानी पर रोक लगेगी और अफसरशाही में भरोसा बढ़ेगा। इससे ईमानदार अधिकारियों को बेवजह जांच और मानसिक प्रताड़ना का सामना नहीं करना पड़ेगा। साथ ही भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई और ज्यादा मजबूत होगी।



