हरियाणा के 10,757 अतिथि शिक्षकों को झटका, सरकार ने नियमित करने से किया इनकार; 14-15 नवंबर को प्रदर्शन
Yuva Haryana: हरियाणा के सरकारी स्कूलों में वर्षों से सेवाएं दे रहे 10,757 अतिथि शिक्षकों को नियमित करने की मांग पर प्रदेश सरकार ने फिलहाल इनकार कर दिया है। मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर के साथ 2 नवंबर को हुई बैठक में शिक्षकों को नियमित करने का रास्ता नहीं निकल पाया। सरकार की ओर से नियमों और कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया गया कि मौजूदा व्यवस्था के तहत अतिथि शिक्षकों को नियमित नहीं किया जा सकता। इस फैसले के बाद शिक्षक संगठनों में नाराजगी बढ़ गई है। उन्होंने 14 और 15 नवंबर को कुरुक्षेत्र में बड़ा प्रदर्शन करने का ऐलान किया है।
राजकीय अनुबंधित अध्यापक संघ के प्रतिनिधियों के मुताबिक, बैठक में शिक्षा विभाग की ओर से पहले जारी किए गए स्पीकिंग ऑर्डर का हवाला दिया गया। शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव विजय दहिया भी स्पष्ट कर चुके हैं कि अतिथि शिक्षकों को केवल लंबे समय तक सेवा देने के आधार पर नियमित नहीं किया जा सकता। विभाग का कहना है कि इस संबंध में कानूनी स्थिति स्पष्ट करते हुए आदेश जारी किए जा चुके हैं।
2005 से सरकारी स्कूलों में दे रहे सेवाएं
अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति वर्ष 2005 में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी और बढ़ते कार्यभार को देखते हुए की गई थी। उन्हें नियमित भर्ती की तरह स्थायी पदों पर नियुक्त करने के बजाय प्रति पीरियड भुगतान की व्यवस्था के तहत काम पर रखा गया था। शिक्षक संगठन का कहना है कि इनमें से कई शिक्षक पिछले करीब 21 वर्षों से लगातार शिक्षा विभाग में सेवाएं दे रहे हैं।
संघ के अनुसार, प्रदेश में नियमितीकरण की मांग कर रहे अतिथि शिक्षकों की संख्या 10,757 है। संगठन का तर्क है कि लंबे समय तक सेवा देने के बावजूद उन्हें स्थायी कर्मचारी का दर्जा नहीं मिला है। शिक्षक वर्ष 2014 की नियमितीकरण नीतियों और अदालत के आदेशों के आधार पर अपना दावा पेश कर रहे हैं।
सरकार ने नियमित भर्ती से अलग बताया नियुक्ति का तरीका
शिक्षा विभाग का तर्क है कि अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति नियमित भर्ती प्रक्रिया के तहत नहीं हुई थी। वर्ष 2005 से स्कूलों में स्थानीय जरूरत और शिक्षकों की कमी के आधार पर उनकी सेवाएं ली गई थीं। विभाग के मुताबिक, नियमित भर्ती की तरह केंद्रीकृत चयन प्रक्रिया, आरक्षण के नियम और निर्धारित चयन मानकों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया था।
इसी आधार पर सरकार का कहना है कि केवल अनुभव, योग्यता और लंबे समय तक नौकरी करने से नियमितीकरण का अधिकार अपने आप नहीं बन जाता। विभाग ने 16 और 18 जून 2014 की नियमितीकरण नीतियों तथा अदालतों के फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा है कि संबंधित पात्रता शर्तों को पूरा करना जरूरी है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद जारी हुआ स्पीकिंग ऑर्डर
इस मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चार पोस्ट ग्रेजुएट टीचर्स (PGT) की याचिका पर सुनवाई हुई थी। अदालत के निर्देश के बाद शिक्षा विभाग ने संबंधित दावों और नियमों की समीक्षा की। इसके बाद 27 अक्टूबर 2026 को विभाग ने स्पीकिंग ऑर्डर जारी किया। इसमें नियमितीकरण के दावों को स्वीकार नहीं करने के कारण बताए गए।
इससे पहले 25 मई 2026 को हाईकोर्ट की एकल पीठ ने नियमितीकरण के दावों पर विचार करने के निर्देश दिए थे। राज्य सरकार की अपील पर 6 अगस्त 2026 को खंडपीठ ने कहा था कि दावों पर उपलब्ध तथ्यों और कानून के स्थापित सिद्धांतों के आधार पर निर्णय लिया जाए। यदि कोई दावा नीति के तहत पात्र नहीं पाया जाता है तो सरकार कारणों सहित आदेश जारी कर सकती है।
58 साल तक नौकरी की सुरक्षा का दावा
सरकार की ओर से अतिथि शिक्षकों को 58 वर्ष की आयु तक सेवा सुरक्षा दिए जाने की बात कही गई है। हरियाणा अतिथि शिक्षक सेवा अधिनियम, 2019 और इसके तहत जारी 2026 के सेवा नियमों में अतिथि शिक्षकों की सेवा से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। हालांकि, सेवा सुरक्षा और नियमित कर्मचारी का दर्जा दोनों अलग-अलग विषय हैं। इसलिए 58 वर्ष तक सेवा जारी रखने की सुविधा मिलने का अर्थ नियमित कर्मचारी के समान सभी लाभ मिलना नहीं है।
अब दोबारा हाईकोर्ट जाएंगे अतिथि शिक्षक
सरकार के फैसले से असंतुष्ट शिक्षक संगठन ने दोबारा अदालत जाने की तैयारी की है। संघ के महासचिव भूपेंद्र सिंह के मुताबिक, संगठन का मानना है कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति और सेवा संबंधी शर्तें नियमितीकरण नीति के अनुरूप हैं, उनके मामलों पर अलग-अलग विचार किया जाना चाहिए।
नियमितीकरण की मांग को लेकर कुरुक्षेत्र के लघु सचिवालय में संघ का धरना भी जारी है। संगठन ने 14 और 15 नवंबर को कुरुक्षेत्र में प्रदर्शन करने और स्पीकिंग ऑर्डर की प्रतियां जलाने का ऐलान किया है। अब इस मामले में सरकार और शिक्षक संगठनों के बीच अगली बातचीत तथा संभावित कानूनी कार्रवाई पर नजर रहेगी।

