6 जिलों की मंडियों में धान भीगने से नुकसान की आशंका; कई जगह बोरियों के नीचे भरा पानी, 16 अक्टूबर तक मौसम खराब रहने का अनुमान
Yuva Haryana: हरियाणा में बारिश ने धान की खरीद और उठान व्यवस्था को प्रभावित कर दिया है। प्रदेश की कई मंडियों में खुले में पड़ा धान बारिश के पानी में भीग गया। खरीद और उठान में देरी के कारण किसानों की परेशानी बढ़ गई है। छह जिलों की मंडियों में करीब 6.28 लाख टन धान भीगने का आंकड़ा सामने आया है।
मंडियों में धान की बोरियों के आसपास और नीचे पानी जमा होने से फसल की गुणवत्ता खराब होने का खतरा है। किसानों का कहना है कि यदि समय पर खरीद और उठान होता, तो खुले में रखी फसल को नुकसान से बचाया जा सकता था। मौसम विभाग की ओर से 14 से 16 अक्टूबर के बीच मौसम में बदलाव, बादल छाने और कुछ क्षेत्रों में बारिश की संभावना जताए जाने से चिंता और बढ़ गई है।
छह जिलों में 6.28 लाख टन धान भीगने का दावा
कैथल, अंबाला, करनाल, कुरुक्षेत्र, फतेहाबाद और अन्य मंडियों में धान भीगने की समस्या का सामने आई है। जिलेवार आंकड़ों में कैथल में करीब 3.54 लाख टन धान की आवक और 2.10 लाख टन खरीद का विवरण दिया गया है। अंबाला में 2.31 लाख टन आवक और 1.58 लाख टन खरीद, जबकि करनाल में 2.32 लाख टन आवक और 1.15 लाख टन खरीद दर्ज की गई है।
कुरुक्षेत्र में 5.14 लाख टन आवक और 3.74 लाख टन खरीद का आंकड़ा रिपोर्ट में दिया गया है। फतेहाबाद में 86 हजार टन आवक और 22 हजार टन खरीद का उल्लेख है। ये आंकड़े मंडियों में आवक और खरीद की स्थिति दर्शाते हैं; इन्हें भीगे हुए धान की मात्रा के साथ जोड़कर कुल नुकसान नहीं माना जाना चाहिए।
चार दिन से ट्रॉलियां लेकर इंतजार कर रहे किसान
कई किसान चार दिन से ट्रॉलियों में धान लेकर मंडियों में खरीद का इंतजार कर रहे हैं। खरीद में देरी और खुले में फसल रखे जाने के कारण बारिश ने उनकी चिंता बढ़ा दी है।
कैथल और आसपास की मंडियों में किसानों ने धान की खरीद और उठान में तेजी लाने की मांग की है। किसानों का कहना है कि फसल बेचने के लिए मंडियों में पहुंचने के बाद भी उन्हें इंतजार करना पड़ रहा है। इस दौरान मौसम खराब होने से उनकी मेहनत और लागत पर खतरा मंडरा रहा है।
मंडियों में बोरियों के नीचे भरा पानी
अंबाला की मंडी में बोरियों के नीचे पानी जमा होने की तस्वीरें सामने आई हैं। वहां करीब चार लाख क्विंटल धान भीगने की बात कही गई है। किसानों को डर है कि नमी बढ़ने से धान की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है और खरीद के दौरान उन्हें परेशानी उठानी पड़ सकती है।
यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, कैथल, सिरसा और अन्य क्षेत्रों में भी बारिश के कारण मंडियों तथा खेतों में फसल प्रभावित होने की खबरें हैं। कुछ स्थानों पर धान की कटाई, परिवहन और खरीद व्यवस्था भी प्रभावित हुई है।
खरीद में देरी से बढ़ा नुकसान का खतरा
किसानों की ओर से खरीद व्यवस्था पर सवाल उठाए गए हैं। किसानों का कहना है कि समय पर खरीद और उठान नहीं होने से मंडियों में धान का ढेर लग रहा है। बारिश के दौरान खुले में रखी बोरियों को सुरक्षित रखना मुश्किल हो जाता है।
धान में नमी बढ़ने पर उसकी गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। ऐसे में किसानों को खरीद के समय निर्धारित मानकों को लेकर भी चिंता रहती है। किसानों ने मांग की है कि मंडियों में तिरपाल, जल निकासी और सुरक्षित भंडारण की व्यवस्था मजबूत की जाए तथा खरीदे गए धान का उठान जल्द कराया जाए।
16 अक्टूबर तक मौसम पर नजर
पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से प्रदेश के कुछ हिस्सों में मौसम बदलने और 14 से 16 अक्टूबर के बीच बादल छाने, तेज हवाएं चलने तथा बारिश की संभावना है। ऐसे में मंडियों में खुले में रखी फसल को सुरक्षित करना जरूरी हो गया है।
किसानों की मांग है कि मंडी प्रशासन और खरीद एजेंसियां मिलकर धान को बारिश से बचाने के लिए तत्काल कदम उठाएं। इसमें जल निकासी, तिरपाल की उपलब्धता, तेजी से खरीद और समय पर उठान शामिल हैं।

