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इनेलो ने बिजली आयोग और निगमों पर उठाए बड़े सवाल, उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ाने का आरोप

Yuva Haryana
Last updated: January 10, 2026 6:09 pm
Yuva Haryana
Published: January 10, 2026
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Yuva Haryana : हरियाणा के पूर्व मंत्री और इंडियन नेशनल लोकदल के राष्ट्रीय संरक्षक प्रो. संपत सिंह ने हरियाणा इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (एचईआरसी) पर एक उपभोक्ताओं के हितों में स्वतंत्र आयोग के बजाय सरकार के निर्देशों पर काम करने के गंभीर आरोप जड़े है।

संपत सिंह ने कहा कि एचईआरसी के सदस्यों का व्यवहार बेहद खराब है और ऐसा लगता है कि वे उपभोक्ताओं के हितों के लिए बने आयोग के सदस्य न होकर सरकारी अधिकारी हों। उन्होंने कहा कि एचईआरसी को पारदर्शिता सुनिश्चित करने और बिजली उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए स्थापित किया गया था। लेकिन अब यह आयोग उसके उलट सरकार, यूएचबीवीएन और डीएचबीवीएन के पक्ष में काम कर रहा है। आयोग पावर वितरण कंपनियों (डिस्कॉमस) द्वारा मनमाने और गैर-तार्किक टैरिफ वृद्धि को रोकने में विफल रहा है।

उन्होंने कहा कि पॉवर वितरण कंपनियां डिस्ट्रिब्यूशन लॉस, लाइन लॉस और बिजली चोरी को रोक नहीं पा रही हैं और उस सारे नुकसान की भरपाई उपभोक्ताओं को करनी पड़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग पूरी तरह से राज्य सरकार के निर्देशों पर काम कर रहा है।

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उन्होंने बताया कि हरियाणा सरकार ने वित्त वर्ष 2018-19, 2020-21 और 2023-24 में राजनीतिक लाभ पाने के मंसूबे से बिना एचईआरसी के सब्सिडी निर्देशों के कुछ उपभोक्ता वर्गों के लिए टैरिफ रियायतें घोषित की थी जिससे अन्य निर्दोष उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ गया।

उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिसिटी एक्ट, 2003 की धारा 65 के तहत, सरकार द्वारा निर्देशित किसी भी सब्सिडी का भुगतान पहले से किया जाना आवश्यक है। आयोग को इस प्रावधान को लागू करना चाहिए था। ये बातें उन्होंने डिस्कॉम द्वारा एग्रीगेट रेवेन्यू रिक्वायरमेंट (एआरआर) दाखिल किए जाने के संदर्भ में कहीं।

प्रो. संपत सिंह ने कई प्रक्रिया संबंधी चूकों का भी खुलासा किया और कहा कि इनमें एआरआर फाइलिंग में किसी भी टैरिफ प्रस्ताव का अभाव, उपभोक्ता प्रभावों को छिपाने वाले भ्रामक सार्वजनिक नोटिस, पिछले दशक में वोल्टेज-वार तथा उपभोक्ता-श्रेणी-वार कॉस्ट ऑफ सर्विस अध्ययन के लिए एचईआरसी और एपटेल के निर्देशों का अनुपालन न होना शामिल हैं।

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उन्होंने कहा कि स्टेकहोल्डर वही आपत्ति कर सकते हैं जो प्रस्तुत किया गया हो। उन्होंने कहा कि एक तरफ तो वित्त वर्ष 2026-27 में दोनों डिस्कॉम (डीएचबीवीएन और यूएचबीवीएन) 1,605 करोड़ रूपए का राजस्व सरप्लस प्रोजेक्ट कर रहे हैं जबकि दूसरी ओर वे 4,484.85 करोड़ रूपए का राजस्व गैप मांग रहे हैं।

उन्होंने बताया कि एचईआरसी द्वारा अनुमोदित औसत पावर लागत 3.12 रूपए प्रति यूनिट है। बावजूद इसके फरीदाबाद गैस पावर प्लांट से 85 रूपए से 153 रूपए प्रति यूनिट (तीन वर्षों में 864 रूपए करोड़ का खर्च) और पानीपत थर्मल से 6.50 रूपए प्रति यूनिट पर महंगी बिजली खरीद रही है और उपभोक्ताओं को 7.29 रूपए प्रति यूनिट पर बेच रहे हैं।

पूर्व मंत्री ने कहा कि सुधारों की कमी, अनुशासनहीनता और खराब बुनियादी ढांचे के कारण बिजली उपक्रमों की स्थिति बिगड़ी है, और उपभोक्ता बोझ तले दब रहे हैं। आज तक 22 लाख डिफॉल्टर्स से 8000 करोड़ रूपए बकाया अनसुलझा पड़ा है। 47 पैसे प्रति यूनिट के अतिरिक्त शुल्क (फ्यूल एंड पॉवर कॉस्ट) को जून 2024 के अंत तक पूरी तरह वसूल किया जाना था। परंतु यह अभी भी उपभोक्ताओं पर लगाया जा रहा है इससे छोटे और मध्यम उपभोक्ताओं को लगभग 50 प्रतिशत अधिक बिलों का भुगतान करना पड़ रहा है। वाणिज्यिक और औद्योगिक उपभोक्ता भी फिक्स्ड तथा ऊर्जा शुल्क दोनों में भारी वृद्धि का सामना कर रहे हैं।

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संपत सिंह ने मांग करते हुए कहा कि फिक्स्ड चार्ज, बढ़े एनर्जी चार्ज, फ्यूल सरचार्ज, फ्यूल कॉस्ट समायोजन और क्रॉस-सब्सिडाइजेशन को तुरंत समाप्त किया जाए ताकि पावर वितरण को सुव्यवस्थित किया जा सके, टैरिफ को तर्कसंगत बनाया जा सके और पावर उपभोक्ताओं को राहत दी जा सके। एचईआरसी किसानों के 2 लाख लंबित ट्यूबवेल कनेक्शनों को मंजूर करने के लिए डिस्कॉम को आदेश दे। साथ ही 24-घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति भी सुनिश्चित करे।

संपत सिंह ने एचईआरसी से प्रदर्शन मानकों को लागू करने के लिए भी कहा। साथ ही उन्होंने कहा कि एचईआरसी को यह भी जांच करनी चाहिए कि डीएचबीवीएन और यूएचबीवीएन कैसे 2020-21 में 800 करोड़ के लाभ से 2023-24 में 4,484 करोड़ रूपए के घाटे तक पहुंच गए। एचईआरसी इस 4,484 करोड़ रूपए के घाटे को उपभोक्ताओं पर न थोपने के निर्देश दे। एचईआरसी को अपने उपभोक्ता-संरक्षण जनादेश को बनाए रखना चाहिए।

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