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Reading: बड़ी खबर : हरियाणा कांग्रेस को झटका, इस बड़े नेता ने छोड़ी पार्टी, पढ़िए पूरी वजह
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बड़ी खबर : हरियाणा कांग्रेस को झटका, इस बड़े नेता ने छोड़ी पार्टी, पढ़िए पूरी वजह

Yuva Haryana
Last updated: November 2, 2025 7:20 pm
Yuva Haryana
Published: November 2, 2025
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Yuva Haryana : हरियाणा कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। हाल ही में हरियाणा कांग्रेस में नेता प्रतिपक्ष के रूप में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा की नियुक्ति के बाद पार्टी के इस फैसले पर खुलकर सवाल उठाने वाले पूर्व मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता संपत सिंह ने कांग्रेस को अलविदा कह दिया हैं। एक लंबा इस्तीफा पत्र देते हुए संपत सिंह ने पार्टी हाईकमान को हरियाणा कांग्रेस के हालातों से अवगत करवाया है। संपत सिंह ने कहा कि उनका कांग्रेस नेतृत्व में विश्वास समाप्त हो गया है  इसलिए वे पार्टी छोड़ने पर मजबूर हुए है।

इस्तीफे में क्या लिखा ?

सेवा में,
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे, सांसद
अध्यक्ष, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
24, अकबर रोड
नई दिल्ली

विषयः हरियाणा में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के हालात -एवं पार्टी से त्यागपत्र

प्रिय खड़गे जी,

चूँकि हमारा व्यक्तिगत परिचय नहीं है, कृपया मुझे अपना संक्षिप्त परिचय देने की अनुमति दें। मैं हरियाणा विधान सभा का छह बार निर्वाचित सदस्य रहा हूँ। मैंने दो कार्यकाल तक कैबिनेट मंत्री और एक कार्यकाल तक नेता प्रतिपक्ष के रूप में कार्य किया है। राजनीति में आने से पहले, मैं राजनीति विज्ञान का सहायक प्राध्यापक था।

मेरी राजनीतिक यात्रा का संक्षिप्त उल्लेख करूँ तो, मैंने वर्ष 2009 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आई.एन.सी.) जॉइन की। मुझे फतेहाबाद विधानसभा क्षेत्र से टिकट देने का आश्वासन था, परंतु मुझे नलवा से चुनाव लड़ने को कहा गया। इसके बावजूद नलवा की जनता ने मेरे कार्य और निष्ठा पर विश्वास जताते हुए मुझे विधानसभा के लिए चुना।

दुर्भाग्यवश, कांग्रेस पार्टी फतेहाबाद सीट हार गई, जिसका सीधा कारण यह था कि जनता मेरे क्षेत्र परिवर्तन से नाराज थी कृ जबकि मैं वहाँ से लगातार पाँच बार जीत चुका था। कांग्रेस में मेरे प्रवेश से मेरे प्रभाव वाले लगभग आधे दर्जन अन्य क्षेत्रों में भी पार्टी को विजय मिली।

इसके बावजूद, मुझे न तो मंत्रीमंडल में स्थान मिला और न ही संगठन में कोई भूमिका। बाद में मुझे ज्ञात हुआ कि चुनाव के बाद मेरी कुमारी सैलजा जी से मुलाकात तथा उनके मंत्रालय द्वारा मेरे क्षेत्र को ₹18 करोड़ की स्वीकृति दिए जाने के कारण मुझे दरकिनार कर दिया गया। इसके बाद मुझे एक ही क्षेत्र तक सीमित कर दिया गया, जिससे मैं हरियाणा के अन्य हिस्सों में पार्टी को सशक्त नहीं कर सका।

मेरे साथ आए कई सहयोगी 2014 में वापस इनेलो (प्छस्क्) में चले गए, और परिणामस्वरूप उस वर्ष हिसार लोकसभा और विधानसभा सीटें इनेलो ने जीत लीं। इतिहास ने 2019 के विधानसभा चुनावों में खुद को दोहराया – मुझे फिर टिकट नहीं मिला, और नलवा व फतेहाबाद दोनों सीटें भाजपा ने जीत लीं।

2024 में मुझे सिरसा लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का समन्वयक नियुक्त किया गया, जहाँ कुमारी सैलजा कांग्रेस उम्मीदवार थीं। उनके पक्ष में मेरे सच्चे प्रयासों से राज्य नेतृत्व असुरक्षित महसूस करने लगा। उसी वर्ष मैंने सैलजा जी की नरनौंद रैली में भाग लिया, जिससे राज्य नेतृत्व नाराज हुआ। बाद में, मुझे पुनः टिकट से वंचित किया गया, और एक बार फिर कांग्रेस नलवा सीट हार गई।

2024 का हरियाणा विधानसभा चुनाव कांग्रेस के लिए अध्ययन का विषय होना चाहिए। लगभग हर सर्वे, मीडिया रिपोर्ट और आकलन में कांग्रेस की जीत की भविष्यवाणी थी, परंतु परिणाम इसके विपरीत रहे. जो उन सभी को आश्चर्यजनक नहीं था जो संगठन के भीतर लगातार हो रही कमजोरी से परिचित थे।

वह पलायन जिसने चेतावनी दी
श्री भजनलाल जी – पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, तीन बार मुख्यमंत्री, तीन बार लोकसभा सांसद, एक बार राज्यसभा सांसद, और केंद्रीय मंत्री रहे। उन्हें अपमानित कर पार्टी छोड़ने पर मजबूर किया गया – और परिणाम विनाशकारी रहे।

कांग्रेस से दूरी और सरकार से नजदीकी: 5 विधायकों की बदली सियासी चाल

श्री राव इंदरजीत सिंह – चार बार विधायक, छह बार सांसद, एक समय कांग्रेस के मजबूत स्तंभ, निरंतर अपमान के कारण पार्टी छोड़नी पड़ी। आज वे केंद्र सरकार में मंत्री हैं।

श्री कुलदीप बिश्नोई – चार बार विधायक, दो बार सांसद – बार-बार उपेक्षित किए गए और पार्टी छोड़ दी।

श्री धरमबीर सिंह – चार बार विधायक, तीन बार सांसद – गुटबाजी के कारण कांग्रेस से बाहर हुए – आज भाजपा सांसद हैं।

श्री बीरेंद्र सिंह -पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष, पाँच बार विधायक, तीन बार सांसद कृ निष्ठावान कांग्रेसी होने के बावजूद उन्हें अपमानित कर बाहर किया गया।

डॉ- अशोक तंवर – पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, एक बार सांसद – शारीरिक हमले और अपमान के बाद पार्टी छोड़नी पड़ी।

डॉ. अरविंद शर्मा – चार बार सांसद, एक बार विधायक – उपेक्षा के शिकार, आज हरियाणा भाजपा सरकार में मंत्री हैं।

श्री अवतार भड़ाना – चार बार सांसद – हाशिये पर डाल दिए गएय आज उत्तर प्रदेश में विधायक हैं।

2016 की राज्यसभा की घटना इसका और उदाहरण है। श्रीमती सोनिया गांधी ने श्री आर.के. आनंद के नाम को स्वीकृति दी थी, जिन्हें कांग्रेस और इनेलो के 37 विधायकों का समर्थन था। फिर भी, एक राज्य नेता को “वोट न देने” की अनुमति कैसे दी गई? यहाँ तक कि एक निर्दलीय विधायक (जो अब कांग्रेस सांसद हैं) को जानबूझकर अलग पेन से वोट डालने को कहा गया, जिससे सभी वोट निरस्त हो गए।

2019-2024ः अंतिम विघटन
कुमारी सैलजा, ए.आई.सी.सी. महासचिव और देश की सबसे वरिष्ठ दलित महिला नेता, को हरियाणा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाया गया, पर 2022 में राज्य नेतृत्व के दबाव में उन्हें हटा दिया गया।
श्रीमती श्रुति चैधरी, दो बार सांसद, को भिवानी से टिकट नहीं दिया गया। आज वे भाजपा सरकार में मंत्री हैं।
श्रीमती किरण चैधरी, पाँच बार विधायक, दो बार मंत्री, और भूतपूर्व उपसभापति (दिल्ली), को लगातार अपमानित किया गया। जब वे कांग्रेस विधायक दल की नेता थीं, तब कुछ विधायकों को उनके बैठकों का बहिष्कार करने को कहा गया।
श्रीमती सावित्री जिंदल, तीन बार विधायक, दो बार मंत्री – कांग्रेस छोड़कर आज निर्दलीय विधायक हैं।

श्री नवीन जिंदल, तीन बार सांसद – अब भाजपा सांसद हैं।

इसी बीच राज्य नेतृत्व ने अपनी व्यक्तिगत शक्ति को मजबूत किया। 2020 में राज्यसभा की रिक्त सीट पर अनुसूचित जाति या पिछड़ा वर्ग के योग्य सदस्य को आगे बढ़ाने के बजाय, नेता के पुत्र को नामित किया गया कृ जिससे राष्ट्रीय पार्टी एक पारिवारिक उपक्रम बन गई।

यहाँ तक कि श्री रणदीप सिंह सुरजेवाला, चार बार विधायक और ए.आई.सी.सी. महासचिव, को भी हरियाणा में गुटबाजी के कारण राजस्थान से राज्यसभा भेजा गया। श्री अजय माकन, कोषाध्यक्ष, हरियाणा से राज्यसभा चुनाव हार गए – यह नेतृत्व संकट का ही परिणाम था।

2024 विधानसभा चुनाव
लोकसभा चुनावों में दलित मतदाताओं ने भारी समर्थन देकर कांग्रेस को पाँच सीटें जिताईं, परंतु राज्य नेतृत्व ने अहंकार और पारिवारिक हितों के कारण कुमारी सैलजा जी को हाशिये पर डाल दिया। उनके खिलाफ जातिसूचक टिप्पणियाँ और आपत्तिजनक वीडियो फैलाए गए, और उनके समर्थकों को टिकट से वंचित कर दिया गया। परिणामस्वरूप दलित वर्ग ने कांग्रेस का बहिष्कार कर दिया।

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टिकट चोरीः योग्य उम्मीदवारों को नजरअंदाज कर टिकट धनबल वालों को दिए गए।

चुनाव चोरी: राज्य नेतृत्व के करीबी लोगों ने “स्वतंत्र” उम्मीदवारों के रूप में कांग्रेस के विरुद्ध कार्य किया।

वरिष्ठ नेता जैसे कैप्टन अजय यादव और श्री कुलदीप शर्मा का अपमान होता रहा, और केंद्रीय नेतृत्व मौन रहा। कांग्रेस अब एक व्यक्ति और परिवार की जागीर बन चुकी है, जहाँ निष्ठा का इनाम दासता और मतभेद की सजा निष्कासन है।

2009 से 2024 तक पार्टी की लगातार हार पर कोई जवाबदेही तय नहीं हुई। “वोट चोरी” या “टिकट चोरी” के दोषियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। 2005 में श्री भजनलाल जी के नेतृत्व में कांग्रेस ने 67 सीटें जीती थीं – और उसके बाद से पराजयों का सिलसिला जारी है।

हरियाणा की जनता अब राज्य और राष्ट्रीय नेतृत्व दोनों से निराश है। 2024 की हार के बाद स्वयं श्री राहुल गांधी ने स्वीकार किया कि राज्य नेतृत्व ने व्यक्तिगत हितों को पार्टी से ऊपर रखा। फिर भी वही नेतृत्व बना रहा।

इन परिस्थितियों में, मुझे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की उस क्षमता पर विश्वास नहीं रहा कि वह हरियाणा की जनता के हितों का प्रतिनिधित्व कर सकती है। मैं एक गर्वित हरियाणवी हूँ, और अपने प्रदेश की जनता को निराश नहीं कर सकता। हरियाणा के प्रति मेरी प्रतिबद्धता अटूट है – परंतु वर्तमान कांग्रेस नेतृत्व में मेरा विश्वास समाप्त हो गया है।

अतः, मैं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से अपना त्यागपत्र देने के लिए विवश हूँ।

सादर,
(प्रो. संपत सिंह)
पूर्व मंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष,
हरियाणा विधानसभा

दिनांकः 2 नवम्बर 2025

प्रतिलिपि-

श्री राहुल गांधी, नेता प्रतिपक्ष, लोकसभा

श्री के.सी. वेणुगोपाल, महासचिव (संगठन), कांग्रेस

श्री बी.के. हरिप्रसाद, महासचिव (प्रभारी हरियाणा)

धान-बाजरा खरीद में देरी, किसानों की बढ़ी मुश्किलें

श्री राव नरेंद्र, अध्यक्ष, हरियाणा प्रदेश कांग्रेस समिति

संपत सिंह का राजनीतिक सफर

संपत सिंह का राजनीतिक अनुभव लंबा रहा है।

साल 1987 में चौधरी देवीलाल की सरकार में वे गृहमंत्री रहे।

2000 से 2005 तक ओपी चौटाला की सरकार में वित्त मंत्री रहे।

1991 से 1996 तक वे इनेलो सरकार में विपक्ष के नेता भी रहे।

2009 में उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा की कांग्रेस सरकार में एंट्री की।

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