हरियाणा में धान खरीद पर बड़ा सवाल, एक ही जमीन से दो मंडियों में बिक्री का आरोप; MFMB पोर्टल पर गड़बड़ी का दावा
Yuva Haryana: हरियाणा में धान खरीद सीजन के बीच मेरी फसल मेरा ब्यौरा (MFMB) पोर्टल पर कथित गड़बड़ियों का मामला फिर सामने आया है। भारतीय किसान यूनियन (BKU), पिहोवा ने दावा किया है कि कुरुक्षेत्र जिले में एक ही कृषि भूमि का दो बार पंजीकरण और सत्यापन कराकर अलग-अलग अनाज मंडियों में धान बेचने के मामले सामने आए हैं। संगठन का आरोप है कि इस व्यवस्था का फायदा उठाकर कुछ लोग वास्तविक किसानों के नाम और जमीन के रिकॉर्ड का दुरुपयोग कर रहे हैं।
किसान संगठन के प्रवक्ता प्रिंस वाराइच के मुताबिक, यूनियन को ऐसे दस्तावेज मिले हैं जिनसे एक ही जमीन के रिकॉर्ड पर दो अलग-अलग व्यक्तियों द्वारा धान बेचने की आशंका सामने आई है। संगठन ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने और कथित अनियमितताओं में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
कैथल और पिहोवा मंडी से जुड़ा मामला
BKU (पिहोवा) के प्रवक्ता प्रिंस वाराइच ने एक मामले का जिक्र करते हुए बताया कि कैथल जिले के बरोट गांव के एक किसान ने अपनी धान की फसल कैथल मंडी में बेची थी। वहीं, कथित तौर पर उसी कृषि भूमि के रिकॉर्ड के आधार पर एक अन्य व्यक्ति ने पिहोवा अनाज मंडी में भी धान बेच दिया।
वाराइच ने सवाल उठाया कि जब जमीन एक ही है तो उसके आधार पर दो अलग-अलग व्यक्तियों को फसल बेचने की अनुमति कैसे मिल गई। उनका आरोप है कि कुछ आढ़ती उत्तर प्रदेश से कम कीमत पर धान लाकर हरियाणा की मंडियों में बेच रहे हैं। इस काम में पोर्टल के कथित दुरुपयोग और कुछ अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका भी जताई गई है। हालांकि, इन आरोपों की इस मामले में स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
पहले भी सामने आ चुके हैं फर्जी रजिस्ट्रेशन के मामले
यह पहली बार नहीं है जब MFMB पोर्टल पर फर्जी पंजीकरण का आरोप लगा है। इससे पहले कुरुक्षेत्र के पिहोवा और इस्माइलाबाद क्षेत्र के किसानों ने शिकायत की थी कि उनकी कृषि भूमि को दूसरे लोगों के नाम पर पोर्टल में दर्ज कर दिया गया। कुछ किसानों का कहना था कि उनकी फसल खेत में खड़ी थी, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में उसे मंडी में बिक चुका दिखाया गया।
पिहोवा के शाहपुर गांव के किसान रवि कुमार ने आरोप लगाया था कि उनकी जमीन के आधार पर किसी अन्य व्यक्ति ने पोर्टल पर पंजीकरण कराकर धान बेचने की प्रक्रिया पूरी की। शिकायत में 87 क्विंटल धान का गेट पास जारी होने का भी उल्लेख था।
पिहोवा में पहले मामले में FIR दर्ज
पिहोवा के कराह साहिब खरीद केंद्र से जुड़े एक मामले में प्रशासन ने जांच के बाद आरोपी के खिलाफ FIR दर्ज कराई थी। जांच में शाहपुर और जुरासी कलां गांवों के पांच खसरा नंबरों की करीब 4.94 एकड़ जमीन पर दूसरे व्यक्ति के नाम से धान पंजीकरण कराने की बात सामने आई थी।
पटवारी रिपोर्ट में संबंधित जमीन पर आरोपी का मालिकाना हक या काश्त होना नहीं पाया गया। इसी पंजीकरण के आधार पर 10 अक्टूबर को 87 क्विंटल धान का गेट पास जारी कराया गया था। प्रशासन के अनुसार, उस गेट पास पर धान की खरीद या भुगतान नहीं हुआ था। मामले में भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 318(4) और 319(2) के तहत FIR दर्ज कर जांच पुलिस को सौंपी गई थी।
असली किसानों को MSP पर फसल बेचने में परेशानी का आरोप
किसान संगठन का कहना है कि कथित फर्जी पंजीकरण के कारण वास्तविक किसानों के सामने अपनी फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर बेचने का संकट खड़ा हो सकता है। यदि किसी किसान की जमीन और फसल पहले ही किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर पोर्टल में दर्ज दिखा दी जाती है, तो असली किसान को मंडी में बिक्री और खरीद प्रक्रिया में परेशानी हो सकती है।
वाराइच ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ आढ़ती किसानों पर शिकायत वापस लेने का दबाव बना रहे हैं। उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों, आढ़तियों और मिलर्स के बीच कथित गठजोड़ की जांच कराने की मांग उठाई है। ये आरोप फिलहाल किसान संगठन की ओर से लगाए गए हैं; इनकी जांच और पुष्टि संबंधित एजेंसियों को करनी होगी।
सरकार से निष्पक्ष जांच की मांग
BKU (पिहोवा) ने कहा है कि वह कथित अनियमितताओं से जुड़े दस्तावेज राज्य सरकार को सौंपेगा और निष्पक्ष जांच की मांग करेगा। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि मामले में कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा।
धान खरीद व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जमीन, फसल पंजीकरण, सत्यापन, गेट पास और मंडी में हुई खरीद के रिकॉर्ड का मिलान जरूरी है। अब इस मामले में प्रशासन की अगली कार्रवाई और जांच रिपोर्ट पर नजर रहेगी।

