हरियाणा मेडिकल काउंसिल की पुरानी वेबसाइट हैक कर डेटाबेस से की गई छेड़छाड़, बिना डिग्री और दस्तावेजों के हासिल किया डॉक्टर का रजिस्ट्रेशन नंबर
Yuva Haryan: हरियाणा में फर्जी डॉक्टर बनने का एक गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि तीन युवकों ने हरियाणा मेडिकल काउंसिल की पुरानी वेबसाइट को हैक कर उसके डेटाबेस में छेड़छाड़ की और फर्जी अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) के आधार पर डॉक्टर के रूप में रजिस्ट्रेशन हासिल कर लिया। मामले का खुलासा वेबसाइट के पुराने डेटा को नई वेबसाइट पर स्थानांतरित करने के दौरान हुआ। इसके बाद हरियाणा मेडिकल काउंसिल ने पंचकूला साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई है।
मामले में सुमन कुमार, स्वर्णव और दीपक कुमार के नाम सामने आए हैं। काउंसिल के अनुसार, तीनों के पास डॉक्टर के रूप में पंजीकरण कराने के लिए जरूरी शैक्षणिक डिग्री और दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे। इसके बावजूद रिकॉर्ड में उनके रजिस्ट्रेशन से संबंधित जानकारी दर्ज दिखाई गई।
वेबसाइट हैक कर डेटाबेस में की गई छेड़छाड़
आरोपियों ने हरियाणा मेडिकल काउंसिल की पुरानी वेबसाइट में अनधिकृत तरीके से प्रवेश किया। इसके बाद डेटाबेस में बदलाव कर फर्जी NOC अपलोड की गई और डॉक्टर के रजिस्ट्रेशन नंबर हासिल कर लिए गए।
यह मामला तब सामने आया, जब काउंसिल की पुरानी वेबसाइट का डेटा नई वेबसाइट पर ट्रांसफर किया जा रहा था। इस प्रक्रिया के दौरान रिकॉर्ड में गड़बड़ी सामने आई, जिसके बाद संबंधित दस्तावेजों और पंजीकरण की जांच की गई।
जांच में कथित तौर पर सामने आया कि कुछ रजिस्ट्रेशन ऐसे दस्तावेजों के आधार पर किए गए थे, जिनका वास्तविक शैक्षणिक रिकॉर्ड से मिलान नहीं हो रहा था। इसके बाद काउंसिल ने मामले को गंभीर मानते हुए साइबर पुलिस से जांच कराने का फैसला लिया।
PGI रोहतक और MMU अंबाला में पढ़ाई दिखाने का आरोप
आरोपियों ने अपनी शैक्षणिक योग्यता के संबंध में अलग-अलग संस्थानों में पढ़ाई करने का दावा किया था। सुमन कुमार और स्वर्णव ने रोहतक स्थित पीजीआईएमएस से पढ़ाई करने का विवरण दिया, जबकि दीपक कुमार ने अंबाला की महर्षि मार्कंडेश्वर यूनिवर्सिटी (MMU) से एमबीबीएस करने का दावा किया था।
आरोप है कि इन दावों के आधार पर हरियाणा मेडिकल काउंसिल की वेबसाइट पर फर्जी रिकॉर्ड तैयार किए गए। हालांकि, संबंधित संस्थानों से शैक्षणिक विवरण का सत्यापन किए जाने पर आरोपियों के नाम का रिकॉर्ड नहीं मिला।
बिहार मेडिकल काउंसिल की NOC का भी मामला
आरोपियों ने खुद को बिहार मेडिकल काउंसिल से अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) प्राप्त करने वाला भी दिखाया था। उनकी योजना कथित तौर पर बिहार की NOC के आधार पर हरियाणा में मेडिकल रजिस्ट्रेशन को वैध साबित करने की थी।
लेकिन जब हरियाणा मेडिकल काउंसिल ने बिहार मेडिकल काउंसिल से दस्तावेजों का सत्यापन कराया, तो वहां आरोपियों के नाम से संबंधित रिकॉर्ड नहीं मिला। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि पोर्टल पर डिग्री, मार्कशीट या अन्य आवश्यक शैक्षणिक प्रमाणपत्र अपलोड नहीं किए गए थे। इसके बावजूद रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी हुई दिखाई गई।
पंचकूला साइबर थाने में शिकायत दर्ज
हरियाणा मेडिकल काउंसिल के अध्यक्ष डॉ. सतीश खट्टर के अनुसार, तीनों युवकों के पास न तो जरूरी डिग्री थी और न ही रजिस्ट्रेशन के लिए आवश्यक दस्तावेज। उन्होंने बताया कि इस संबंध में पंचकूला साइबर थाने में शिकायत दी गई है।
अब पुलिस की जांच में यह पता लगाया जाएगा कि वेबसाइट और डेटाबेस तक अनधिकृत पहुंच कैसे बनाई गई, रिकॉर्ड में किस स्तर पर बदलाव हुआ और इस कथित फर्जीवाड़े में अन्य लोगों की भूमिका तो नहीं थी। साथ ही, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में संभावित खामियों की भी जांच की जा सकती है।
मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला
डॉक्टर का रजिस्ट्रेशन किसी व्यक्ति की शैक्षणिक योग्यता और पेशेवर पात्रता की पुष्टि करने की महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। यदि बिना मान्य डिग्री और दस्तावेजों के कोई व्यक्ति डॉक्टर के रूप में पंजीकरण हासिल कर लेता है, तो इससे मरीजों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।
इस मामले में आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही होगी। फिलहाल, हरियाणा मेडिकल काउंसिल की शिकायत के आधार पर पुलिस की जांच महत्वपूर्ण होगी, ताकि कथित साइबर छेड़छाड़, फर्जी दस्तावेजों और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में हुई अनियमितताओं की पूरी जानकारी सामने आ सके।

