Yuva Haryana: गुरुग्राम में बुनियादी ढांचे से जुड़े कई अहम प्रोजेक्ट वर्षों से अधूरे पड़े हैं। बार-बार तय समयसीमा बढ़ाए जाने के बावजूद काम पूरा नहीं होने पर मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने सभी लंबित परियोजनाओं की स्थिति रिपोर्ट मांगी है। अधिकारियों को यह बताने के लिए कहा गया है कि कौन-सी परियोजनाएं आगे बढ़ेंगी और उनके पूरा होने की संभावित समयसीमा क्या है।
हाल ही में नागरिक अधिकारियों और वरिष्ठ अफसरों की बैठक में परियोजनाओं में हो रही देरी पर चर्चा हुई। अधिकारियों ने मुख्य कारणों के तौर पर तकनीकी अड़चन, टेंडर प्रक्रिया और बजट संबंधी बाधाओं का हवाला दिया है। CMO को परियोजना-वार रिपोर्ट सौंपने के बाद करीब एक महीने में आगे की रणनीति तय होने की उम्मीद है।
सिविल अस्पताल समेत कई बड़े प्रोजेक्ट अधूरे
लंबित परियोजनाओं में सिविल अस्पताल, बस टर्मिनल, स्मार्ट ग्रिड, मेट्रो, दिल्ली-गुरुग्राम-SNB RRTS, कचरा प्रबंधन और ड्रेनेज जैसी महत्वपूर्ण योजनाएं शामिल हैं।
सिविल लाइंस अस्पताल को 2021 में ध्वस्त किया गया था। कई एजेंसियों के पास रहने के बाद अब यह परियोजना हरियाणा स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (HSIIDC) के पास है, लेकिन निर्माण अभी शुरू नहीं हुआ है।
नया बस टर्मिनल करीब 13 वर्षों से लंबित है। वहीं 2015 में घोषित स्मार्ट ग्रिड परियोजना, जिसका लक्ष्य 2017 तक 24 घंटे बिजली और भूमिगत केबलिंग उपलब्ध कराना था, अभी भी अधूरी है।
पॉड टैक्सी और एंटरटेनमेंट जोन भी अधर में
धौला कुआं से मानेसर के बीच प्रस्तावित पॉड टैक्सी कॉरिडोर करीब एक दशक बाद भी शुरू नहीं हो सका है। लगभग 4,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना की व्यवहार्यता पर सरकार ने हाल में फिर चर्चा की थी।
सेक्टर-52 में प्रस्तावित एंटरटेनमेंट जोन में भी एक दशक से अधिक समय बाद खास प्रगति नहीं हुई है।
मेट्रो और RRTS परियोजनाओं में भी देरी
गुरुग्राम की रेल कनेक्टिविटी से जुड़ी परियोजनाएं भी देरी का सामना कर रही हैं। मेट्रो का पहला चरण शुरू होने में 14 साल लगे और अब सेक्टर-9 तक इसका निर्माण चल रहा है। इसे 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
सेक्टर-9 से साइबर सिटी तक करीब 1,662 करोड़ रुपये का मेट्रो टेंडर 18 नवंबर को बंद होगा। दूसरी ओर दिल्ली-गुरुग्राम-SNB रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) कॉरिडोर अभी निर्माण चरण में प्रवेश नहीं कर पाया है।
कचरा प्रबंधन और ड्रेनेज भी बड़ी चुनौती
कचरा प्रबंधन के क्षेत्र में बांधवारी लैंडफिल की मंजूरी की समयसीमा कई बार चूक चुकी है। कचरा साफ करने के लिए लगी दो कंपनियों ने 2025 में 9.02 करोड़ रुपये ही संसाधित किए, जबकि लक्ष्य का केवल 16.5 प्रतिशत ही पूरा हो पाया। सिविक बॉडी ने अब फरवरी 2027 की नई समयसीमा तय की है।
2017 की रियायत के तहत 2019 में पूरा होने वाला वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट भी अभी तक चालू नहीं हुआ है।
ड्रेनेज परियोजनाओं की स्थिति भी चिंताजनक है। लेग-4 मास्टर ड्रेन का काम 2022 में शुरू हुआ था, जबकि सेक्टर-68 से 75 तक करीब 51 करोड़ रुपये का नेटवर्क अभी अधूरा है। स्थानीय निवासियों के समूहों का आरोप है कि 2023 के बाद से कई स्टॉर्मवॉटर ड्रेन की सफाई नहीं हुई, जबकि इस काम के लिए लगभग 100 करोड़ रुपये की मंजूरी दी जा चुकी है।
यूनाइटेड गुरुग्राम RWAs के अध्यक्ष प्रवीण यादव ने कहा कि इन परियोजनाओं में लंबे समय से हो रही देरी ने गुरुग्राम की “मिलेनियम सिटी” की छवि और बुनियादी ढांचे के बीच का अंतर उजागर किया है। उन्होंने सुझाव दिया कि CMO को एक-दो साल तक गुरुग्राम की सीधे निगरानी करनी चाहिए, ताकि लंबित परियोजनाओं को पूरा कराया जा सके।

