Yuva Haryana : पिछले पांच सालों में हरियाणा कांग्रेस प्रदेश में भाजपा सरकार के खिलाफ तीसरी बार सदन में अविश्वास का प्रस्ताव लेकर आई है। भाजपा के दूसरे कार्यालय में दो बार अविश्वास प्रस्ताव आए और अब हरियाणा की नायब सैनी सरकार के खिलाफ यह पहला अविश्वास प्रस्ताव आया है।
हालांकि, इससे पहले दो बार कांग्रेस द्वारा लाया गया प्रस्ताव सदन में गिर गया और इस बार भी बीजेपी सरकार को कोई खतरा नहीं था, लेकिन इस मुद्दे पर राजनीतिक माहौल पूरा गरमाया रहा।
शुक्रवार को हरियाणा के विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान कांग्रेस के अविश्वास प्रस्ताव पर जमकर हंगामा हुआ।
दरअसल, प्रश्नकाल की समाप्ति के बाद सीएम नायब सिंह सैनी ने सदन में बताया कि कांग्रेस द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा के हस्ताक्षर ही नहीं हैं, इसके बाद सदन में करीब 15 मिनट तक भारी हंगामा देखने को मिला।
सीएम ने बड़ी हैरानी जताते हुए कहा कि अविश्वास प्रस्ताव पर खुद नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा के हस्ताक्षर नहीं हैं। उन्होंने कहा कि या तो नेता विपक्ष को इस प्रस्ताव की जानकारी नहीं थी, या फिर उन्होंने जानबूझकर इसे आने दिया। सीएम ने ये भी कहा कि उन्होंने प्रस्ताव पर भूपेंद्र हुड्डा के हस्ताक्षर को चश्मा साफ करके भी कन्फर्म किया, लेकिन हुड्डा के हस्ताक्षर ही नहीं मिले।
क्या बोले CM ? सुनिए…
सीएम की इस बात पर बीजेपी-कांग्रेस के विधायकों ने एक-दूसरे के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कांग्रेस विधायकों ने तर्क दिया कि नियमानुसार अविश्वास प्रस्ताव पर 18 विधायकों के हस्ताक्षर जरूरी थे, लेकिन इस पर 32 कांग्रेसी विधायकों के हस्ताक्षर हैं।
नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र हुड्डा ने भी मुख्यमंत्री के बयान पर आपत्ति जाहिर की और कहा कि प्रस्ताव में तकनीकी खामी नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के 18 विधायकों ने हस्ताक्षर किए हुए है और इसके बावजूद जानबूझकर गलत तरीके से प्रचारित किया जा रहा है।
इस बीच, कांग्रेसी विधायक नारेबाजी करते हुए विधानसभा अध्यक्ष के आसन के सामने पहुंच गए। दूसरी तरफ भाजपा विधायकों ने भी कांग्रेस के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।
ऐसे में विवाद बढ़ा तो विधानसभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण ने तल्ख लहजे में सभी विधायकों को सीटों पर बिठाया और इसके बाद सदन की कार्यवाही आगे बढ़ी।
सदन के बाहर भी कांग्रेस के अविश्वास प्रस्ताव पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं जारी है। पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने हैरानी जताते हुए कहा कि आज न तो बीजेपी का कोई विधायक बागी है, न ही अविश्वास प्रस्ताव लाने की कोई स्थिति दिख रही और न ही कांग्रेस के पास कोई आंकड़ा, इसके बावजूद विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव लाना ये दर्शाता है कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा अपने निजी स्वार्थ के लिए बीजेपी सरकार को एक साल का फ्री पास दे रहे है और भाजपा को फायदा पहुंचा रहे है।
उधर, इनेलो नेता अभय चौटाला ने कहा कि भूपेंद्र हुड्डा ने जानबूझकर प्रस्ताव पत्र पर अपने दस्तखत नहीं किए क्योंकि उनको अमित शाह के सामने यह सफाई देनी है कि बीजेपी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने में उनकी कोई भूमिका नहीं है।
उन्होंने कहा कि यह साफ तौर से भूपेंद्र हुड्डा की बीजेपी से मिलीभगत दर्शाता है। इससे पहले भी भूपेंद्र हुड्डा ने कई मौकों पर बीजेपी को बचाने के लिए काम किए हैं। उदाहरण के तौर पर राज्यसभा चुनावों में भूपेंद्र हुड्डा ने अपना बैलेट पेपर खाली छोड़ा था और अपने विधायकों के साथ मिलकर स्याही कांड करके बीजेपी समर्थित उम्मीदवार सुभाष चंद्रा को जितवाया था और कांग्रेस और इनेलो के समर्थित उम्मीदवार आर के आनंद को हरवाने का काम किया था।
अभय ने कहा कि ऐसे ही बीजेपी की दूसरी अवधि की सरकार के समय भी सदन में अविश्वास प्रस्ताव लाकर के बीजेपी को जीवन दान देने का काम किया था। चौटाला ने कहा कि वे कांग्रेस के विधायकों से कहेंगे कि अब भूपेंद्र हुड्डा के खिलाफ भी अविश्वास प्रस्ताव लेकर आएं।



