Yuva Haryana : मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में दूषित पेयजल के कारण करीब 20 लोगों की मौत के बाद अब देशभर में दूषित पेयजल का विषय खासा चर्चा में है। इस बीच, हरियाणा में पेयजल व्यवस्था का हाल है ? ये आपको बताते है।
दरअसल, एक प्रमुख समाचार पत्र में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार इंदौर जैसे हालात हरियाणा में भी हो सकते है, क्योंकि भूजल का गिरता स्तर और घरों में होने वाले पानी की सप्लाई की व्यवस्था खासा खराब स्थिति में है।
जानकारी के अनुसार कई शहरों में जर्जर पाइप लाइनों में लीकेज के कारण सीवरेज का पानी भी पेयजल में मिलकर घरों में सप्लाई हो रहा है।
हरियाणा के 55 फीसदी क्षेत्रफल में नलकूप के जरिए जमीनी पानी की आपूर्ति होती है। वहीं 45 प्रतिशत जगहों पर नहरी पानी से घरों में पानी की सप्लाई होती है।
17 जिले फ्लोराइड की समस्या से परेशान है। नौ जिलों में यूरेनियम की मात्रा तय सीमा से अधिक है।
खबर में प्रकाशित जानकारी के अनुसार हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले की लगभग एक दर्जन कॉलोनियों में पानी सप्लाई के लिए पुरानी पाइप लाइनें बिछी हुई है।
अनेक कॉलोनियों में 60 से 70 साल पहले जो पेयजल सप्लाई के लिए पाइपें जमीनों मे बिछाई गई थी, उन्हीं पाइप लाइनों के जरिए ही अब पानी की सप्लाई हो रही है।
पानीपत जिले की सात कॉलोनियों में टूटी पाइप के कारण रसायन युक्त पानी लोग पीने को मजबूर है। स्वास्थ्य विभाग ने यहां पिछले चार साल में करीब सवा लाख सैंपल पानी के भरे थे, जिनमें से करीब 35 हजार सैंपल फेल निकले।
अंबाला की 12 कॉलोनियों में 30 साल पुरानी जर्जर पाइप लाइनों से ही दूषित पानी की सप्लाई हो रही है।
रोहतक में एक लाख किलोमीटर से ज्यादा पाइप लाइन 20 साल पुरानी है। यहां सीवरेज का गंदा पानी वाटर सप्लाई मे मिक्स हो रहा है।
अनेक ऐसे जलघर है, जहां कई सालों से सफाई तक नहीं हुई है। जलघरों में मिट्टी, गाद जमा हुई है।
बहादुरगढ़ में हाल ही में 135 पानी के सैंपल में से 18 फेल निकले।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय की मुताबिक अप्रैल 2025 से लेकर जनवरी 2026 तक हरियाणा में 25240 पानी के सैंपल लिए गए, इनमें 400 सैंपल में पानी की क्वालिटी खराब निकली।
वहीं 2023-2024 में अनेक जिलों से करीब 70 हजार सैंपल लिए गए, जिनमें करीब सात हजार सैंपल तय मानकों पर खरा नहीं उतरे।
मंत्रालय की 2025 रिपोर्ट के मुताबिक भूमिगत जल में नाइट्रेट, फ्लोराइड, यूरेनियम और ईसी की मात्रा ज्यादा है।



