Yuva Haryana : हरियाणा की समृद्ध लोक-संस्कृति और कला परंपरा को सहेजने वाले राज्य स्तरीय रत्नावली महोत्सव का कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में भव्य शुभारंभ हुआ। महोत्सव में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की और दीप प्रज्वलित कर महोत्सव का विधिवत शुभारंभ किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह उत्सव हरियाणा की गौरवशाली विरासत, हमारी माटी की महक और लोक जीवन की झलक प्रस्तुत करता है। यह विद्यार्थियों को न केवल अपने व्यक्तित्व को निखारने का अवसर देता है, बल्कि उन्हें अपनी सांस्कृतिक पहचान पर गर्व करने की भावना से भी ओतप्रोत करता है।
नायब सैनी ने भगवान श्रीकृष्ण के कर्मयोग संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि हरियाणा की संस्कृति में सादगी, स्वाभिमान और देशभक्ति का भाव रचा-बसा है। रत्नावली महोत्सव इन्हीं मूल्यों का उत्सव है और इस मंच से निकलने वाले कलाकार न केवल प्रदेश बल्कि देश का नाम भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन करते हैं।

उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय हरियाणा का सबसे प्राचीन विश्वविद्यालय है। यह प्रदेश 1966 में बना लेकिन इस विश्वविद्यालय की नींव 1956 में भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद जी ने रखी थी।
नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्राचीन हरियाणवी कला व संस्कृति को बचाने में आजीवन योगदान करने वाले कलाकारों को ‘हरियाणा रत्न अवार्ड’ से सम्मानित किया जाता है। इसी प्रकार, हरियाणवी थिएटर को जीवंत करने में आजीवन योगदान करने वाले कलाकार को हर वर्ष ‘हरियाणा रत्न पुरस्कार’ दिया जाता है। इसके अलावा, हरियाणवी नृत्य के क्षेत्र में आजीवन योगदान करने वाले कलाकार को नृत्य का ‘हरियाणा रत्न पुरस्कार’ दिया जाता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 38 वर्षों से इस विश्वविद्यालय में रत्नावली महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। हरियाणा की सांस्कृतिक विकास यात्रा में इस उत्सव की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।
इस महोत्सव को हरियाणवी संस्कृति का महाकुंभ कहा जाता है। इसमें अहीर, बांगर, बागर, खादर, कोरवी मेवाती जैसी विभिन्न बोलियों की 34 विधाओं में लगभग 3500 युवा कलाकार भाग लेते हैं। उन्होंने महोत्सव में भाग लेने वाले छात्र-छात्राओं को बधाई एवं शुभकामनाएं दी।
उन्होंने कहा कि इस महोत्सव में हर वर्ष नए-नए प्रयास कर युवाओं को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। पिछले वर्षों में पगड़ी बंधाओ, फोटो खिंचवाओ, हरियाणा के रीति-रिवाजों को प्रतियोगिता का रूप दिया गया। सेल्फी विद हरियाणवी गत वर्ष का अनूठा प्रयास रहा है।



