हरियाणा के 200 सरकारी स्कूलों में शुरू होगा ‘साथ’ प्रोजेक्ट, बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर रहेगी नजर
Yuva Haryana: हरियाणा सरकार स्कूली विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर नई पहल करने जा रही है। राज्य के 200 सरकारी स्कूलों में ‘साथ’ (SAATH) प्रोजेक्ट के तहत मानसिक स्वास्थ्य सहायता व्यवस्था विकसित की जाएगी। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में तनाव, चिंता, अवसाद, बुलिंग, सामाजिक अलगाव और मोबाइल या स्क्रीन के अत्यधिक इस्तेमाल जैसी समस्याओं की समय रहते पहचान करना है। जरूरत पड़ने पर बच्चों को काउंसलिंग के साथ विशेषज्ञों से इलाज और परामर्श भी उपलब्ध कराया जाएगा।
यह पहल स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग और स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त प्रयास से आगे बढ़ाई जा रही है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने इस योजना की रूपरेखा साझा की है। प्रस्तावित व्यवस्था में शिक्षक, अभिभावक, काउंसलर, क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट और मनोचिकित्सक मिलकर काम करेंगे।
पंचकूला की घटना के बाद बच्चों की सुरक्षा और व्यवहार पर चर्चा
इस पहल की चर्चा पंचकूला के सेक्टर-20 स्थित सरकारी स्कूल में हुई गंभीर घटना के बाद और तेज हो गई है। 28 अक्टूबर को स्कूल में केजी की छह वर्षीय छात्रा पर तीसरी कक्षा में पढ़ने वाले आठ वर्षीय छात्र ने कथित तौर पर हमला किया था। घटना में बच्ची को गंभीर चोटें आईं और उसे इलाज के लिए पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती कराया गया।
मामले के सामने आने के बाद स्कूल की निगरानी व्यवस्था और बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठे। शिक्षा विभाग ने दो शिक्षकों और बाद में स्कूल की प्रिंसिपल को भी निलंबित किया। घटना की जांच के लिए सरकार ने समिति गठित की और पुलिस ने स्कूल प्रबंधन की कथित लापरवाही से जुड़ा मामला दर्ज किया।
बच्ची के परिजनों ने मीडिया से बातचीत में आरोपी छात्र के मोबाइल और ऑनलाइन गेम खेलने की आदतों को लेकर भी चिंता जताई थी। हालांकि, किसी गेम या डिजिटल सामग्री को घटना का निश्चित कारण नहीं माना जा सकता। इस पहल का व्यापक उद्देश्य बच्चों के व्यवहार और मानसिक स्थिति में होने वाले बदलावों को समय रहते समझना है।
122 काउंसलर और 400 शिक्षकों का नेटवर्क तैयार
‘साथ’ प्रोजेक्ट के शुरुआती चरण में 200 सरकारी स्कूलों को शामिल किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग ने इसके लिए 122 काउंसलर प्रशिक्षित किए हैं। प्रत्येक चयनित स्कूल में दो शिक्षकों को इस व्यवस्था से जोड़ा जाएगा। इस तरह करीब 400 शिक्षकों का नेटवर्क तैयार होगा।
इन शिक्षकों को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के शुरुआती संकेत पहचानने, विद्यार्थियों से संवेदनशील तरीके से बातचीत करने और जरूरत पड़ने पर उन्हें विशेषज्ञों तक पहुंचाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें बच्चों के व्यवहार, नींद, मनोदशा और पढ़ाई में अचानक गिरावट जैसे बदलावों पर ध्यान दिया जाएगा।
कक्षा 6 से 8 और 9 से 12 के लिए अलग रणनीति
प्रोजेक्ट में विद्यार्थियों की उम्र और जरूरतों के अनुसार अलग-अलग तरीके अपनाए जाएंगे।
कक्षा 6 से 8: इस आयु वर्ग के बच्चों में भावनात्मक समझ, आत्मविश्वास, किशोरावस्था के बदलाव, परीक्षा का तनाव, बुलिंग और माता-पिता के साथ संवाद जैसी चुनौतियों पर ध्यान दिया जाएगा।
कक्षा 9 से 12: इस समूह में बोर्ड और प्रतियोगी परीक्षाओं का दबाव, करियर को लेकर अनिश्चितता, पियर प्रेशर, बॉडी इमेज से जुड़ी चिंताएं और नशे के जोखिम जैसे विषयों पर काम किया जाएगा।
गंभीर स्थिति में विशेषज्ञों तक पहुंचेंगे विद्यार्थी
प्रोजेक्ट में केवल स्कूल स्तर पर काउंसलिंग तक सीमित रहने के बजाय जरूरत के अनुसार विशेषज्ञों से मदद दिलाने की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। आत्म-हानि या आत्महत्या से जुड़े विचारों के संकेत मिलने पर मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विद्यार्थी को उचित स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचाया जाएगा।
विद्यार्थियों के लिए ‘स्टूडेंट हेल्थ एंबेसडर’ और स्कूल स्तर पर समन्वय की व्यवस्था भी विकसित की जाएगी। इसके जरिए बच्चे अपने सहपाठियों को जागरूक करने और जरूरत पड़ने पर मदद लेने के लिए प्रोत्साहित कर सकेंगे। जरूरतमंद विद्यार्थियों को किशोर-अनुकूल स्वास्थ्य क्लीनिक (AFLC) और मानसिक स्वास्थ्य क्लीनिकों में रेफर किया जाएगा, जहां विशेषज्ञ मूल्यांकन, उपचार और फॉलो-अप कर सकेंगे।
अभिभावकों की भागीदारी भी होगी अहम
योजना में माता-पिता की भूमिका को भी महत्वपूर्ण माना गया है। नियमित अभिभावक-शिक्षक संवाद के जरिए उन्हें बच्चों के व्यवहार और भावनात्मक स्थिति में आने वाले बदलावों के बारे में जागरूक किया जाएगा।
सरकार की इस पहल का लक्ष्य स्कूलों को ऐसा सुरक्षित माहौल बनाना है, जहां विद्यार्थी बिना डर अपनी परेशानी साझा कर सकें और समय पर मदद हासिल कर सकें। ‘साथ’ प्रोजेक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन से हरियाणा के सरकारी स्कूलों में मानसिक स्वास्थ्य को शिक्षा और बाल सुरक्षा का अहम हिस्सा बनाने की दिशा में कदम बढ़ सकता है।

