कमजोर मानसून का असर, 5 समूहों में 16 अक्टूबर से शुरू हुई पानी की आपूर्ति; सिंचाई के लिए 7,800 क्यूसेक की मांग, लेकिन 333 क्यूसेक पानी कम मिला
Yuva Haryana: हरियाणा में कमजोर मानसून और नहरों में पानी की कमी का असर अब सिंचाई व्यवस्था पर दिखाई देने लगा है। किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। 16 अक्टूबर से पांच समूहों में नहरी पानी की आपूर्ति शुरू हुई, लेकिन निर्धारित मांग के मुकाबले कम पानी मिलने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। रिपोर्ट में सिंचाई के लिए 7,800 क्यूसेक पानी की मांग और 333 क्यूसेक की कमी का उल्लेख किया गया है।
नहरी पानी की कमी का असर खास तौर पर उन क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है, जहां किसान सिंचाई के लिए नहरों पर निर्भर हैं। पानी की उपलब्धता कम रहने से गेहूं, सरसों, कपास और अन्य फसलों की बुवाई तथा शुरुआती विकास पर असर पड़ने की आशंका है।
पिछले साल के मुकाबले कम मिल रहा नहरी पानी
इस बार नहरों में पानी की उपलब्धता पिछले वर्ष की तुलना में कम रही है। किसानों को उम्मीद थी कि अक्टूबर में सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा, लेकिन कमजोर मानसून और जल संसाधनों की स्थिति के कारण आपूर्ति प्रभावित हुई है।
कुछ क्षेत्रों में नहरी पानी की आपूर्ति का अंतराल बढ़ने से किसानों को सिंचाई के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। पानी समय पर नहीं मिलने से फसलों की बुवाई और खेतों में नमी बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
यमुना से लेकर भाखड़ा तक पानी की उपलब्धता पर असर
सिंचाई विभाग के आंकड़ों में यमुना और भाखड़ा से जुड़े क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता को लेकर दबाव का उल्लेख है। 14,843 क्यूसेक पानी की मांग और 15 अक्टूबर को 14,914 क्यूसेक पानी की आपूर्ति की गई है। वहीं, एक अन्य विवरण में 7,800 क्यूसेक की मांग के मुकाबले 333 क्यूसेक पानी कम मिलने की बात कही गई है।
अलग-अलग नहर प्रणालियों और क्षेत्रों के आंकड़े से पता लगता हैं कि संबंधित नहर या आपूर्ति समूह के संदर्भ में समझना जरूरी है। पानी की कमी का असर इस बात पर निर्भर करेगा कि किस क्षेत्र में कितनी आपूर्ति हो रही है और किसानों की सिंचाई जरूरत कितनी है।
नहरी पानी का अंतराल बढ़ने से किसानों की चिंता
किसानों के लिए सिंचाई का समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। यदि खेतों में जरूरत के समय पानी नहीं पहुंचता, तो फसलों की बुवाई और अंकुरण प्रभावित हो सकते हैं। खासकर रबी सीजन में गेहूं और सरसों जैसी फसलों के लिए शुरुआती सिंचाई अहम मानी जाती है।
कुछ क्षेत्रों में नहरी पानी की आपूर्ति के अंतराल को लेकर किसानों को परेशानी हो रही है। यदि पानी की उपलब्धता पर्याप्त नहीं रही, तो किसानों को ट्यूबवेल या अन्य वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ सकता है। इससे खेती की लागत बढ़ने की आशंका भी रहती है।
आगामी सीजन में भी परेशानी की आशंका
सिंचाई विभाग के अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि आने वाले समय में पानी की उपलब्धता और मांग के बीच संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। यदि जल संसाधनों में पर्याप्त सुधार नहीं हुआ, तो अगले सिंचाई चक्र में भी किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, पानी की कमी की स्थिति में किसानों को सिंचाई का बेहतर प्रबंधन करना चाहिए। खेतों में जरूरत के मुताबिक पानी देना, पानी की बर्बादी रोकना और उपलब्ध संसाधनों का सही उपयोग करना महत्वपूर्ण है। हालांकि, फसल और मिट्टी के प्रकार के अनुसार सिंचाई की जरूरत अलग-अलग होती है।
किसानों के लिए जल प्रबंधन जरूरी
हरियाणा में कृषि उत्पादन का बड़ा हिस्सा सिंचाई पर निर्भर है। ऐसे में नहरी पानी की उपलब्धता कम होना किसानों के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। सरकार और सिंचाई विभाग के सामने नहरों में पानी की आपूर्ति का बेहतर प्रबंधन करने तथा किसानों तक समय पर जानकारी पहुंचाने की जरूरत है।
कुल मिलाकर, कमजोर मानसून और नहरी पानी की कमी ने हरियाणा के किसानों की चिंता बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में पानी की उपलब्धता, नहरों के संचालन और सिंचाई के अंतराल पर स्थिति स्पष्ट होगी। किसानों को सलाह दी जाती है कि वे अपने क्षेत्र की नहरवार आपूर्ति और सिंचाई विभाग की आधिकारिक सूचना के अनुसार खेती की योजना बनाएं।

