Yuva Haryana : हरियाणा में बारिश और जलभराव के कारण फसलों को पहुंचे भारी नुकसान का मुआवजा अभी तक किसानों को नहीं मिला है। हालांकि, विपक्ष इस मुद्दे को लेकर निरंतर सरकार को घेर रहा है।
इस बीच एक खबर ये भी सामने आ रही है कि मुआवजा जारी होने में अभी और देरी होगी। ऐसे में आगामी रबी की फसल की बिजाई के लिए किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। हरियाणा के रोहतक, भिवानी, हिसार सहित कई जिलों में करीब 50 हजार एकड़ में अभी भी कई फीट पानी खेतों में भरा हुआ है।
दरअसल, कई प्रमुख समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों के अनुसार किसानों को मुआवजे के लिए इस नवंबर माह के अंत तक इंतजार करना पड़ सकता है, क्योंकि अभी कई जिलों में गिरवादरी का कार्य पेंडिंग पड़ा है। छह जिलों झज्जर, पंचकूला, पानीपत, रेवाड़ी, सिरसा और यमुनानगर में पटवारियों के स्तर पर 1966.34 एकड़ गिरदावरी का काम बाकी है।
इसके अलावा अधिकारियों के स्तर पर भी 5,25,801.14 एकड़ का सत्यापन का काम अधूरा पड़ा है। वहीं राजस्व विभाग पहले सरकारी फसल खरीद और बीमित किसानों का ब्योरा तैयार करा रहा है। 15 नवंबर तक धान की सरकारी खरीद होनी है और इसके बाद ही विभाग मुआवजे को लेकर कार्यवाही शुरू करेगा।
आपको बता दें कि मानसून के दौरान प्रदेश में हुई भारी बरसात के चलते खेतों में पानी भरने से फसलों को हुए भारी नुकसान पहुंचा था। इसके बाद नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजे की मांग उठी थी।
किसानों, संगठनों और राजनीतिक दलों की मांग पर सरकार ने क्षतिपूर्ति पोर्टल पर आवेदन मांगे थे। 15 सितंबर तक प्रदेश के 6395 गांवों के 5,29,265 किसानों ने पोर्टल पर नुकसान का ब्योरा दर्ज कराया था।
इस ब्यौरे के अनुसार 31,01,461.72 एकड़ फसलों में नुकसान हुआ था। प्रदेश के करीब 1400 पटवारियों के माध्यम से 18 जिलों में गिरदावरी का काम पूरा कर लिया गया है।
प्रदेश में विशेष गिरदावरी का काम 20 सितंबर से शुरू हुआ था। पटवारियों के गिरदावरी करने के बाद इसका सत्यापन अधिकारियों को करना है। क्षतिपूर्ति पोर्टल के अनुसार अभी कानूनगो के स्तर पर 54,325.45 एकड़ और तहसीलदारों के स्तर पर 1,30,318.40 एकड़ गिरदावरी का सत्यापन होना बाकी है।
वहीं एसडीएम स्तर पर 1,23,841.28 एकड़, जिला राजस्व अधिकारियों के स्तर पर 59,370.12 एकड़, उपायुक्त के स्तर पर 1,30,318.40 एकड़ और मंडलायुक्त के स्तर पर 27,627.49 एकड़ फसल का सत्यापन होना शेष है।
तमाम सरकारी कार्रवाई को देखते हुए गिरदावरी को अंतिम रूप 15 नवंबर के बाद ही दिया जाएगा।



