Yuva Haryana : हरियाणा में 1500 करोड़ रुपए का एक बड़ा घोटाला सामने आया है। अपने ही श्रम विभाग से जुड़े इस घोटाले का खुलासा मंत्री अनिल विज ने किया है।
दरअसल, हरियाणा भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड में लंबे समय से चले आ रहे फर्जी वर्क स्लिप और श्रमिक पंजीकरण घोटाले का बड़ा खुलासा हुआ है। मामले की गंभीरता को देखते हुए श्रम मंत्री अनिल विज ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को पत्र लिखकर किसी बड़ी और स्वतंत्र जांच एजेंसी से उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग उठाई है।
विज ने कहा कि कई जगह पूरे गांवों के नाम पर फर्जी वर्क स्लिप बना दी गई ताकि अपात्र लोग योजनाओं का लाभ उठा सके। कई योजनाओं के तहत एक श्रमिक को करीबन ढाई लाख रुपए मिलते है और इन्हीं योजनाओं के जरिए सरकारी धन की खुली लूट की गई और सरकार को करोड़ों रुपए का नुकसान पहुंचाया गया।

श्रम विभाग द्वारा 13 जिलों में कराई गई जांच में सामने आया कि 91.12 प्रतिशत वर्क स्लिप और 87.46 प्रतिशत श्रमिक पंजीकरण फर्जी पाए गए। हालांकि, 9 जिलों की रिपोर्ट आना अभी बाकी है। ऐसे में घोटाले की यह राशि और भी बढ़ सकती है।
यह मामला तब उजागर हुआ जब मंत्री अनिल विज ने विभागीय समीक्षा बैठक में पाया कि कई अधिकारियों ने एक-एक व्यक्ति द्वारा 84 हजार वर्क स्लिप सत्यापित दिखा दी। विज ने इसे असंभव बताया और तीन अधिकारियों को सस्पेंड करके तीन जिलों में जांच करवाने के आदेश दिए।
इसके बाद अधिकारियों द्वारा जांच में आनाकानी की गई, लेकिन मंत्री विज ने प्रदेश के सभी डीसी को पत्र लिखकर तीन सदस्यीय कमेटियां बनाई और 2023 से 2025 तक जारी ऑनलाइन वर्क स्लिप का सत्यापन करवाना शुरू कर दिया, जो कि 13 जिलों में पूरा हो चुका है।
13 जिलों करनाल, रेवाड़ी, नूंह, महेंद्रगढ़, गुरुग्राम, झज्जर, पलवल, पानीपत, रोहतक, सोनीपत, पंचकुला, सिरसा और कैथल में कुल 599758 वर्क स्लिप जारी हुई थी और सत्यापन में सिर्फ 53249 स्लिप ही सही पाई गई। 546509 वर्क स्लिपों में गड़बड़ी मिली।
इसके अलावा 221517 श्रमिकों के पंजीकरण में से जांच के बाद केवल 14240 श्रमिक ही पात्र पाए गए और 193756 पंजीकरण फर्जी निकले।
कैथल में सबसे ज्यादा फर्जी स्लिप और श्रमिक पाए गए। यहां करीब 98-99 प्रतिशत वर्क स्लिप और श्रमिक फर्जी मिले। पानीपत, नूंह, रोहतक और महेंद्रगढ़ में भी 90 प्रतिशत से ज्यादा की गड़बड़ी मिली।
आपको बता दें कि श्रमिक बोर्ड में पंजीकरण के लिए कम से कम 90 दिन काम करने का प्रमाण देना होता है। नियोक्ता द्वारा दी वर्क स्लिप के आधार पर सत्यापन के बाद पंजीकरण होता है और इसी सत्यापन प्रक्रिया के दौरान गड़बड़ी की गई।



