हरियाणा में पोर्टल बना फर्जीवाड़े का अड्डा, बन रही फर्जी एग्रीकल्चर लैंड प्रॉपर्टी आईडी, ये सुनकर मंत्री भी हुए हैरान

Yuva Haryana : हरियाणा सरकार एक तरफ जहां लोगों की सुविधाओं के लिए सेवाओं को ऑनलाइन करने में जुटी हुई है तो वहीं दूसरी तरफ जनता तक सरकार की सेवाओं को पहुंचाने वाले पोर्टल ही फर्जीवाड़े का अड्डा बन रहे है।
एक प्रमुख समाचार पत्र में प्रकाशित खबर के अनुसार किसानों की सुविधा के लिए सरकार ने जो नियम बनाया था, उसका फायदा रिहायशी और कमर्शियल प्रॉपर्टी को कृषि भूमि बताकर प्रॉपर्टी आईडी के जरिए गलत तरीके से उठाया जा रहा है।
एक बड़ी बात ये है कि इसमें नगर निकायों के अधिकारियों की अनुमति के बिना ही पोर्टल के जरिए लोग सीधा प्रोपर्टी आईडी को मंजूर करवा लेते है। इसस पहले 1000 हजार वर्ग से ज्यादा की भूमि की प्रॉपर्टी आईडी बनवाने के लिए फाइल निकाय अधिकारियों के पास जाती थी।
सिस्टम की खामी को उजागर करते हुए बताया गया है कि खेवट व किला नंबर आदि पोर्टल पर डाले जा रहे है। इसके बाद भी खाली पेपर पोर्टल पर अपलोड करके प्रॉपर्टी आईडी बन रही है।
आपको ये भी बता दें कि इसका खुलासा शुक्रवार को रेवाड़ी में ग्रीवेंस मीटिंग के दौरान शहरी निकाय मंत्री विपुल गोयल के समक्ष शिकायतकर्ताओं ने किया। फर्जीवाड़े का यह मामला सुनकर खुद मंत्री भी हैरान हो गए और उन्होंने कहा कि इस तरह तो कोई लाल किला भी बेच सकता है। फर्जीवाड़े की गंभीरता को देखते हुए मंत्री विपुल गोयल ने इसकी जांच करने के लिए अधिकारियों को आदेश दिए।
विपुल गोयल ने कहा कि ऑटो अप्रूव से ऐसे प्रॉपर्टी आईडी बनाना हैरान भरा है। बिना सत्यापन के कैसे ऑनलाइन आईडी बन रही है ? अगर ऐसी खामियां है तो उन्हें दूरस्त करवाने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए है।
दरअसल, सरकार ने अप्रैल 2025 में किसानों के फायदे के लिए कृषि भूमि की प्रॉपर्टी आईडी के लिए ऑटो अप्रूव का नियम लागू किया था, लेकिन कृषि भूमि पहले से अप्रूव्ड होने और टैक्स छूट का फायदा उठाने के लिए भू माफिया फर्जीवाड़े को अंजाम दे रहे है। उनके लोग इसके जरिए रजिस्ट्रियां भी करवा चुके है।
ऐसे अनेक मामले लगातार प्रदेश के कई जिलों से सामने आ रहे है। धारूहेड़ा में पति-पत्नी के विवाद के चलते 2420 वर्ग गज कमर्शियल लैंड की कृषि भूमि आधार पर आईडी बनाने का मामला मंत्री के सामने ग्रीवेंस में आया था।
बैठक के दौरान रेवाड़ी के एसपी ने इस मामले में मंत्री से यह भी पूछा कि इसकी जांच किन धाराओं के तहत होनी चाहिए ? जिस पर एक अधिवक्ता ने तर्क दिया कि जमीन कमर्शियल है और उसे कृषि भूमि दिखाया गया है, अगर इसमें धोखाधड़ी की नियत से दिखाया गया है तो केस बनता है।
First published on: February 15, 2026 03:43 PM