Yuva Haryana : हरियाणा के आईपीएस अधिकारी वाई पूरण कुमार की आत्महत्या मामले में सीबीआई जांच की मांग को लेकर दायर याचिका पर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में सुनवाई हुई है। हाइकोर्ट ने फिलहाल इस मांग को स्वीकार करने से इंकार कर दिया है।
हाइकोर्ट का कहना है कि इस मामले में ऐसा कोई ठोस आधार नहीं दिखता, जिसके लिए जांच सीबीआई को सौंपी जाए। अगर जांच हरियाणा पुलिस करती तो बात अलग होती।
पीठ ने याची से कहा कि सीबीआई पहले से ही बहुत व्यस्त है इसलिए जांच स्थानांतरण का आदेश हल्के में नहीं दिया जा सकता। आपको जांच में किसी गड़बड़ी या कमी का उदाहरण देना होगा।
दरअसल, शुक्रवार को वाई पूरन कुमार की आत्महत्या से जुड़े मामले में दर्ज एफआईआर में आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप बनता है या नहीं, इस पर भी पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सवाल उठाया है।
हाईकोर्ट ने सवाल उठाते हुए पूछा है कि क्या यह आरोप बनता है या नहीं। गाली देने या थप्पड़ मारने तक की बात हो तब भी 306 का मामला नहीं बनता। जांच चंडीगढ़ पुलिस कर रही है इसलिए निष्पक्षता पर सवाल नहीं उठता।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील से पूछा कि इस मामले में आरोप क्या है ? जिसपर हाईकोर्ट को को बताया गया कि वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा था। उनका बार-बार तबादला कर दिया जाता था और उन्हें उनके पद के अनुसार वाहन भी नहीं दिया जाता था। यह सब उनके साथ लगातार किया जा रहा था जिसके चलते वे आत्महत्या के लिए मजबूर हो गए।
कोर्ट ने कहा कि ऐसे आरोपों पर क्या आत्महत्या के लिए उकसाने की धारा लगाई जा सकती है? हमें कोई मामला बताएं जिसमें इस प्रकार के आरोपों में दोषी करार दिया गया हो और फैसला सुप्रीम कोर्ट तक टिका हो।
वहीं चंडीगढ़ पुलिस की ओर से पेश वकील ने बताया कि तीन आईपीएस अधिकारी जांच टीम में शामिल हैं और इस समय सीबीआई जांच की कोई आवश्यकता नहीं है।
हरियाणा सरकार की ओर से भी याचिका का विरोध किया और कहा कि याची पंजाब का निवासी है और मामला चंडीगढ़ का है और इसमें हरियाणा की कोई सीधी भूमिका नहीं है।
IPS पूरन कुमार सुसाइड केस में हाईकोर्ट ने CBI जांच से किया इनकार, सुनवाई के दौरान HC ने कही यह बातें
Yuva Haryana : आईपीएस अधिकारी वाई पूरण कुमार की आत्महत्या मामले में सीबीआई जांच की मांग को लेकर दायर याचिका पर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में सुनवाई हुई है। हाईकोर्ट ने फिलहाल इस मांग को स्वीकार करने से इंकार कर दिया है।
हाई कोर्ट का कहना है कि इस मामले में ऐसा कोई ठोस आधार नहीं दिखता, जिसके लिए जांच सीबीआई को सौंपी जाए। अगर जांच हरियाणा पुलिस करती तो बात अलग होती।
पीठ ने याची से कहा कि सीबीआई पहले से ही बहुत व्यस्त है इसलिए जांच स्थानांतरण का आदेश हल्के में नहीं दिया जा सकता। आपको जांच में किसी गड़बड़ी या कमी का उदाहरण देना होगा।
दरअसल, शुक्रवार को वाई पूरन कुमार की आत्महत्या से जुड़े मामले में दर्ज एफआईआर में आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप बनता है या नहीं, इस पर भी पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सवाल उठाया है।
हाईकोर्ट ने सवाल उठाते हुए पूछा है कि क्या यह आरोप बनता है या नहीं। गाली देने या थप्पड़ मारने तक की बात हो तब भी 306 का मामला नहीं बनता। जांच चंडीगढ़ पुलिस कर रही है इसलिए निष्पक्षता पर सवाल नहीं उठता।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील से पूछा कि इस मामले में आरोप क्या है ? जिस पर हाईकोर्ट को को बताया गया कि वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा था। उनका बार-बार तबादला कर दिया जाता था और उन्हें उनके पद के अनुसार वाहन भी नहीं दिया जाता था। यह सब उनके साथ लगातार किया जा रहा था जिसके चलते वे आत्महत्या के लिए मजबूर हो गए।
कोर्ट ने कहा कि ऐसे आरोपों पर क्या आत्महत्या के लिए उकसाने की धारा लगाई जा सकती है? हमें कोई मामला बताएं जिसमें इस प्रकार के आरोपों में दोषी करार दिया गया हो और फैसला सुप्रीम कोर्ट तक टिका हो।
वहीं चंडीगढ़ पुलिस की ओर से पेश वकील ने बताया कि तीन आईपीएस अधिकारी जांच टीम में शामिल हैं और इस समय सीबीआई जांच की कोई आवश्यकता नहीं है।
हरियाणा सरकार की ओर से भी याचिका का विरोध किया और कहा कि याची पंजाब का निवासी है और मामला चंडीगढ़ का है और इसमें हरियाणा की कोई सीधी भूमिका नहीं है।



