Yuva Haryana: हरियाणा सरकार ने राज्य में पारदर्शी व्यवस्था और वित्तीय सुशासन को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकारी स्तर पर किसी भी ठेकेदार, फर्म या कंपनी के बिलों के भुगतान में बिना वजह देरी होती है, तो उन्हें देरी की अवधि का ब्याज दिया जाएगा। इसके लिए उन्होंने वित्त विभाग को जल्द से जल्द योजना तैयार करने का निर्देश दिया है।
मुख्यमंत्री सोमवार को हरियाणा सिविल सचिवालय में विभिन्न विभागों द्वारा अपनाई जा रही ‘गुड प्रैक्टिसिज’ (श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों) की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे।
लापरवाह अधिकारियों की जेब से कटेगा ब्याज:
यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही के कारण भुगतान में देरी होती है, तो ब्याज का खर्च सरकार वहन नहीं करेगी, बल्कि इसकी वसूली संबंधित जिम्मेदार अधिकारीकर्मचारी के वेतन से की जाएगी।
कांट्रैक्टर के बजाय सीधे कर्मचारी के खाते में जाएगी सैलरी:
कर्मचारियों के शोषण को रोकने और ठेकेदारों (Contractors) की गड़बड़ियों पर अंकुश लगाने के लिए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि किसी भी एजेंसी के जरिए काम कर रहे कर्मचारियों का वेतन ठेकेदार के खाते के बजाय सीधे कर्मचारियों के बैंक खाते में भेजा जाएगा।
डिजिटल सिग्नेचर/डोंगल के गलत इस्तेमाल पर सख्ती:
बिल पास करने वाली प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए डिजिटल सिग्नेचर और डोंगल के गलत इस्तेमाल पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। डोंगल का दुरुपयोग होने पर संबंधित अधिकारी ही जिम्मेदार होगा और नुकसान की भरपाई उसके वेतन से होगी।
बड़ी परियोजनाओं के लिए ‘SPVअर्जुन परिषद’:
बैठक में जानकारी दी गई कि हरियाणा देश का अकेला ऐसा राज्य है जहां ‘एसपीवीअर्जुन काउंसिल’ का गठन किया गया है। इसके तहत 9 बड़े विभागों की ₹4,000 करोड़ की विकास परियोजनाओं की स्वतंत्र समीक्षा की जाती है और काम के नतीजे सही पाए जाने पर ही बजट जारी किया जाता है।
पर्यावरण सुधार के लिए साझा मंच:
हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और बिहार को मिलाकर एक ‘मुख्यमंत्रियों का स्वच्छ वायु मंच’ बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। चूंकि वायु प्रदूषण सीमापार असर डालता है, इसलिए सभी राज्य मिलकर साझी रणनीति बनाएंगे।
100% ऑनलाइन और डिजिटल भुगतान व्यवस्था:
राज्य में ईस्टांपिंग, ईवाउचर और केंद्रीयकृत ईबिलिंग प्लेटफॉर्म के जरिए सभी वेतन व बिलों की प्रोसेसिंग अब पूरी तरह डिजिटल कर दी गई है। ‘एसएनए स्पर्श’ प्रणाली लागू करके मई 2026 से कागजरहित (Paperless) वेतन प्रक्रिया चालू कर दी गई है।

