हरियाणा के गांवों में पानी की जांच करेगी मोबाइल लैब, एक दिन में 5 से 6 गांवों तक पहुंचेगी टीम
Yuva Haryana: हरियाणा के ग्रामीण इलाकों में पेयजल की गुणवत्ता जांचने के लिए जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग विशेष अभियान चलाने की तैयारी कर रहा है। इसके तहत मोबाइल वाटर टेस्टिंग लैब गांव-गांव पहुंचकर पानी के सैंपल लेगी और उनमें बैक्टीरिया तथा हानिकारक रासायनिक तत्वों की मौजूदगी की जांच करेगी। अभियान नवंबर 2026 से शुरू होकर सितंबर 2027 तक चलाने की योजना है। विभाग का लक्ष्य है कि प्रतिदिन 5 से 6 गांवों को कवर किया जाए, ताकि ग्रामीणों को उनके घरों तक पहुंचने वाले पानी की गुणवत्ता के बारे में जानकारी मिल सके।
शुरुआत में नौ जिलों के गांवों को अभियान में शामिल करने की योजना बनाई गई है। मोबाइल लैब की मदद से उन इलाकों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जहां पेयजल स्रोतों के दूषित होने या पानी की गुणवत्ता खराब होने की आशंका है। इससे पानी की समस्या की पहचान समय रहते की जा सकेगी और संबंधित विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने में मदद मिलेगी।
नवंबर से सितंबर तक चलेगा अभियान
नवंबर और दिसंबर 2026 में पलवल जिले के गांवों में जांच की जाएगी। जनवरी 2027 में रेवाड़ी और फरीदाबाद, मार्च में नारनौल (महेंद्रगढ़), अप्रैल में गुरुग्राम, मई में सोनीपत, जून में सिरसा, जुलाई में हिसार, अगस्त में जींद और सितंबर में अंबाला जिले में मोबाइल लैब पहुंचेगी।
इस कार्यक्रम के जरिए अलग-अलग जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों में पानी के नमूने इकट्ठा किए जाएंगे। विभाग की टीम गांवों में पहुंचकर पेयजल स्रोतों की जांच करेगी। एक दिन में पांच से छह गांवों को कवर करने की योजना है। इससे ग्रामीणों को पानी की जांच के लिए दूर स्थित प्रयोगशालाओं तक जाने की जरूरत कम होगी।
पानी में बैक्टीरिया और रसायनों की होगी जांच
मोबाइल लैब के जरिए पानी में मौजूद बैक्टीरिया के साथ-साथ विभिन्न रासायनिक तत्वों की मात्रा भी जांची जाएगी। इसमें पानी का पीएच स्तर, टीडीएस, कठोरता, फ्लोराइड, नाइट्रेट, सल्फेट, आयरन, जिंक और टर्बिडिटी जैसे मानकों की जांच शामिल हो सकती है।
जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की प्रयोगशालाओं में पेयजल के भौतिक, रासायनिक और बैक्टीरियोलॉजिकल परीक्षण की सुविधा उपलब्ध है। विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर पानी के सैंपल की जांच के लिए आवेदन की सुविधा भी दी गई है। बैक्टीरियोलॉजिकल जांच के लिए प्रयोगशाला से मिलने वाली स्टरलाइज्ड बोतल में नमूना लेना जरूरी होता है।
दूषित पानी की पहचान से ग्रामीणों को मिलेगा फायदा
पानी की जांच से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि किसी गांव में सप्लाई किया जा रहा पेयजल पीने के लिए सुरक्षित है या नहीं। पानी में बैक्टीरिया मिलने पर जलजनित बीमारियों का खतरा हो सकता है, जबकि कुछ रासायनिक तत्वों की अधिक मात्रा भी स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकती है।
समय पर जांच होने से खराब गुणवत्ता वाले पानी के स्रोतों की पहचान की जा सकेगी। इसके बाद विभाग संबंधित अधिकारियों के माध्यम से जरूरी कदम उठा सकता है। ग्रामीणों को भी यह जानकारी मिलेगी कि उनके क्षेत्र में पानी की गुणवत्ता कैसी है और क्या सावधानियां बरतनी चाहिए।
पहले भी गांवों में पहुंच चुकी हैं मोबाइल लैब
हरियाणा में मोबाइल वाटर टेस्टिंग लैब के जरिए गांवों में पानी की जांच पहले भी की जाती रही है। जून 2025 में महेंद्रगढ़ जिले के नारनौल क्षेत्र में मोबाइल लैब ने गांवों में जाकर पानी के नौ रासायनिक मानकों की जांच की थी। उस दौरान प्रतिदिन कम से कम सात गांवों को कवर करने की योजना बनाई गई थी।
वहीं, दिसंबर 2024 में कैथल जिले के 148 गांवों में मोबाइल वाटर टेस्टिंग लैब से पेयजल की जांच का कार्यक्रम चलाया गया था। उस अभियान में भी प्रतिदिन कई गांवों के पानी के नमूने जांचने की योजना थी।
कुल मिलाकर, प्रस्तावित अभियान ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता और पानी की गुणवत्ता पर निगरानी मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम हो सकता है। इससे दूषित पानी की समस्या वाले क्षेत्रों की पहचान करने और समय रहते जरूरी कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।

