Yuva Haryana: गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJU) की छात्रा की सड़क हादसे में हुई दर्दनाक मौत के बाद हरियाणा परिवहन विभाग हरकत में आ गया है। विभाग ने प्रदेश भर में चलने वाली ‘किलोमीटर स्कीम’ की बसों के संचालन को लेकर सख्ती बढ़ा दी है और खामियां मिलने पर कड़ा संज्ञान लेने के निर्देश दिए हैं।
डिपो प्रबंधकों को निरीक्षण और कार्रवाई के कड़े निर्देश
परिवहन निदेशालय ने प्रदेश के सभी डिपो महाप्रबंधकों को पत्र जारी कर किलोमीटर स्कीम की बसों का व्यापक निरीक्षण कराने के निर्देश दिए हैं।
जांच के दौरान फ्लाइंग टीमें निम्नलिखित मानकों की गहन समीक्षा करेंगी:
- बस स्टाफ की वर्दी (Uniform)
- चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस (DL)
- बसों की फिटनेस प्रमाण पत्र
- यात्रियों की सुरक्षा और बस संचालन की योग्यता
हिसार रोडवेज महाप्रबंधक राहुल मित्तल ने बताया कि मुख्यालय से किलोमीटर स्कीम की बसों के निरीक्षण संबंधी दिशा-निर्देश प्राप्त हो चुके हैं। यदि जांच में किसी भी प्रकार की अनियमितता या खामी पाई जाती है, तो नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बढ़ती शिकायतों के बाद विभाग की सख्त चेतावनी
परिवहन महानिदेशक के अनुसार, प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से किलोमीटर स्कीम की बसों के संबंध में लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इनमें सड़क दुर्घटनाओं के अलावा चालकों द्वारा यात्रियों के साथ दुर्व्यवहार और लापरवाही से वाहन चलाने के मामले शामिल हैं।
निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि जांच केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि अनियमितता पाए जाने पर सख्त प्रशासनिक कदम उठाए जाएंगे।
रोडवेज जैसी रंगत से भ्रम: बसों का रंग अलग करने की मांग तेज
किलोमीटर स्कीम की बसों की रंग-रंगत (Color Scheme) हरियाणा रोडवेज की सामान्य बसों जैसी होने के कारण यात्रियों को इन्हें पहचानने में काफी परेशानी हो रही है।
भ्रम का कारण: इन बसों के आगे और पीछे छोटी लाल पट्टी होती है, जिससे दूर से निजी अनुबंध वाली बस और सरकारी रोडवेज बस में अंतर करना मुश्किल होता है।
व्यवस्था: किलोमीटर स्कीम के तहत बसें निजी मालिकों के अनुबंध पर चलती हैं, जिसमें चालक बस मालिक का होता है जबकि परिचालक (Conductor) हरियाणा रोडवेज का होता है।
कर्मचारियों की मांग: रोडवेज कर्मचारी संगठन लंबे समय से किलोमीटर स्कीम की बसों का रंग पूरी तरह अलग करने की मांग कर रहे हैं, ताकि यात्रियों और आमजन को निजी अनुबंध वाली बसों तथा सरकारी रोडवेज की बसों के बीच पहचान करने में आसानी हो।

