Yuva Haryana: लोकतंत्र में विचारों और दृष्टिकोण में भिन्नता व सहमति-असहमति होना पूरी तरह स्वाभाविक है, लेकिन असहमति का भी पूरा सम्मान किया जाना चाहिए। असहमति ही शासन व्यवस्था को सही दिशा, दर्शन और बेहतर कार्य करने की प्रेरणा देती है। शासन चलाने से बड़ी जिम्मेदारी जनसेवा की होती है, इसलिए सहमति-असहमति के बावजूद देश और प्रदेश को प्रगति के पथ पर आगे ले जाने के लिए सभी को साझा प्रयास करना चाहिए।
यह विचार लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को पंचकूला स्थित इंद्रधनुष ऑडिटोरियम में हरियाणा विधानसभा संविधान पखवाड़ा के तहत आयोजित जनप्रतिनिधि सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए व्यक्त किए। कार्यक्रम का शुभारंभ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण, नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा, विधानसभा उपाध्यक्ष डॉ. कृष्ण मिड्ढा, संसदीय कार्य मंत्री महिपाल ढांडा आदि मौजूद रहे।
जनता की खुशहाली हमारी साझा मंजिल : सीएम नायब सैनी
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि जनप्रतिनिधिया की राजनीतिक विचारधाराएं अलग हो सकती हैं, लेकिन हरियाणा की प्रगति और जनता की खुशहाली सभी की साझा मंजिल है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को विधानसभा की गरिमा बनाए रखते हुए जनसंवाद और जवाबदेही को मजबूत करना चाहिए। संविधान के न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुता के मूल्यों को अपने आचरण में उतारना जरूरी है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से युवाओं को संविधान के प्रति जागरूक करने और 2047 के विकसित भारत में हरियाणा की महत्वपूर्ण भूमिका सुनिश्चित करने का आह्वान किया।
सशक्त हरियाणा के लिए जनभागीदारी जरूरी: हरविंद्र कल्याण
विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण ने कहा कि विकसित हरियाणा का निर्माण समाज की सक्रिय सहभागिता और जागरूकता से ही संभव है। जनप्रतिनिधियों को संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने के लिए रोल मॉडल की भूमिका निभाानी चाहिए। उन्होंने 1966 के बाद से प्रदेश की तरक्की को रेखांकित करते हुए लोकसभा अध्यक्ष के मार्गदर्शन का आभार जताया।
संविधान ने दिया समान मताधिकार: भूपेंद्र हुड्डा
पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि आजादी से पहले मतदान का अधिकार संपत्ति या शिक्षा तक सीमित था, लेकिन संविधान ने हर नागरिक को एक समान वोट देने का अधिकार दिया। हुड्डा ने लोकसभा अध्यक्ष की मौजूदगी में यह भी कहा कि लोकतंत्र में स्पीकर को रेफरी की भूमिका निभाते हुए पक्ष और विपक्ष दोनों को अपनी बात रखने का बराबर अवसर देना चाहिए।

