Yuva Haryana: समालखा से नारायणा रोड पर 7 जुलाई 2023 को हुई कथित पुलिस मुठभेड़ (एनकाउंटर) मामले में पानीपत अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने सबूतों के अभाव और पुलिस के दावों में गंभीर कमियों के आधार पर मुख्य आरोपी प्रवीन उर्फ सोनू जाट को बरी कर दिया है।
इस मुठभेड़ में सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड में शामिल आरोपी प्रियव्रत फौजी का भाई राकेश उर्फ राका दो गोलियां लगने से मारा गया था, जबकि प्रवीन घायल हुआ था।
5 बड़े पॉइंट: आखिर कोर्ट में क्यों नहीं टिके पुलिस के आरोप?
कोर्ट में प्रवीन के वकील तेजेंद्र मलिक ने डेढ़ दिन चली बहस के दौरान पुलिस की थ्योरी में कई गंभीर खामियां उजागर कीं:
- बरामद कार का फर्जीवाड़ा: पुलिस ने 7 जुलाई को घटनास्थल से जिस बलेनो कार को आरोपियों के पास से बरामद दिखाया, उसके मालिक कैथल निवासी पंकज ने बताया कि कार 25 जून 2023 को लूटी गई थी। पुलिस ने उन्हें 6 जुलाई को ही पानीपत थाने बुलाकर खड़ी कार की निशानदेही कराई थी। ऐसे में 7 जुलाई को वह कार राकेश के पास कैसे हो सकती है?
- गनपाउडर व फायरिंग के सैंपल का अभाव: वकील ने तर्क दिया कि अगर दोनों ओर से गोलीबारी हुई थी, तो हाथ पर बारूद के अवशेष (गनपाउडर) और घटनास्थल से सैंपल मिलने चाहिए थे। पुलिस ने सिर्फ कागजों में सैंपल दिखाए, और बिना किसी फॉरेंसिक सैंपल रिपोर्ट के यह साबित नहीं हो सका कि गोलियां राकेश व प्रवीन ने ही चलाई थीं।
- मेडिकल रिपोर्ट और ब्लैकनिंग में विरोधाभास: पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक गोली 12-15 फीट दूर से चलाई गई थी, जबकि डॉक्टरों की मेडिकल रिपोर्ट में ‘ब्लैकनिंग’ (गनपाउडर का काला निशान) पाई गई, जिसका मतलब गोली महज 2-3 फीट की दूरी से मारी गई थी। इसके अलावा मृतक राकेश के शरीर पर 16 चोट के निशान थे, जबकि पुलिस ने केवल 2 गोलियों की बात कही थी। पोस्टमार्टम से पहले पूरी बॉडी का सीटी स्कैन भी नहीं कराया गया।
- मोहाली से उठाने का आरोप व लोकेशन: परिजनों ने आरोप लगाया था कि दोनों युवकों को पुलिस ने पहले ही मोहाली से उठाया था। जांच में एसआई (SI) सौरभ की लोकेशन भी मोहाली की ही मिली, जिसे बचाव पक्ष ने अदालत के सामने रखा।
- परिवार की शिकायत पर केस दर्ज न होना: परिजनों ने एनकाउंटर के पहले ही दिन पुलिस पर फर्जी मुठभेड़ और हत्या का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन पुलिस ने उस शिकायत पर कोई केस दर्ज नहीं किया और न ही आरोपी पुलिसकर्मियों का पॉलीग्राफ टेस्ट कराया गया।
“मेरे लिए जज ही भगवान का रूप हैं” — पीड़ित मां का छलका दर्द
बरी हुए प्रवीन की मां उर्मिला ने बताया कि पुलिस टॉर्चर के कारण उनका बेटा जेल में भी बुरी तरह डरा-सहमा रहता था। उन्होंने कहा, “मेरे बेटे का पहले कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था, लेकिन फर्जी एनकाउंटर के बाद उस पर 3-4 झूठे केस और जोड़ दिए गए। मैंने समालखा कोर्ट में याचिका लगाई थी। आज भगवान ने मेरी सुन ली, मेरे लिए जज साहब ही भगवान का रूप हैं।”c

