Yuva Haryana: बिजली बिलों का लाखों रुपये बकाया होने के बावजूद उसी परिसर में नया कनेक्शन लेकर आपूर्ति जारी रखने के मामलों की अब गहन जांच होगी। ऊर्जा मंत्री अनिल विज के जनता दरबार में भारी बकाये की शिकायतें सामने आने के बाद बिजली निगम ने ऐसे परिसरों की पड़ताल करने का कड़ा निर्देश जारी किया है।
निगम अधिकारियों को 15 दिनों के भीतर जांच पूरी करने के आदेश दिए गए हैं।
जांच के मुख्य बिंदु और विभागीय कार्रवाई
- दस्तावेजों और कनेक्शन की पड़ताल:
जांच में यह पता लगाया जाएगा कि नया कनेक्शन किसके नाम पर जारी हुआ, आवेदन के साथ कौन से दस्तावेज जमा किए गए और पुराने कनेक्शन व परिसर के रिकॉर्ड में क्या संबंध है। यह भी देखा जाएगा कि कहीं बकाये से बचने के लिए उसी भवन या परिसर में किसी दूसरे व्यक्ति या परिजन के नाम से तो कनेक्शन नहीं लिया गया।
- अधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका की जांच:
यह भी जांच का विषय होगा कि पुराने बकाये की वसूली किए बिना नया कनेक्शन कैसे जारी कर दिया गया। इसमें बिजली विभाग के अधिकारियों या कर्मचारियों की किसी भी प्रकार की लापरवाही या मिलीभगत पाई गई, तो उनके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- पुराने मीटर के रिकॉर्ड का मिलान:
स्थायी रूप से काटे गए कनेक्शनों के बकाये को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। पुराने मीटर का पूरा विवरण, बकाया बिल, कनेक्शन काटने की तारीख और नए कनेक्शन के दस्तावेजों का आपस में मिलान किया जाएगा। जहाँ भी नियमों के तहत बकाये की वसूली संभव होगी, आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
जनता दरबार में उठे गंभीर सवाल
ऊर्जा मंत्री अनिल विज के अंबाला छावनी स्थित जनता दरबार में बिजली बिल माफी और राहत की मांग को लेकर पहुंचे उपभोक्ताओं के 1.5 लाख से 2 लाख रुपये तक के बकाये के मामले सामने आए।
इस पर मंत्री विज ने कड़ी नाराजगी जताते हुए सवाल उठाया कि “आखिर बिजली का बिल इतना अधिक कैसे बढ़ गया?” लंबे समय तक बिल जमा न होने के कारण बिजली निगम की निगरानी व्यवस्था और वसूली प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े हुए हैं।
राहत के विकल्पों पर भी विचार
निगम का प्राथमिक लक्ष्य राजस्व की सुरक्षा करना और बकाया वसूली को प्रभावी बनाना है। इसके साथ ही, आम उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए बिलों का किस्तों (Instalments) में भुगतान करने जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है।

